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शपथ के लिए इंजीनियर राशिद को मिली 2 घंटे की परोल, कोर्ट ने रखी ये शर्तें

शेख अब्दुल राशिद को 2017 में आतंकी फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था. रशीद ने शपथ लेने और अपने संसदीय कार्यों को करने के लिए अंतरिम जमानत या वैकल्पिक रूप से हिरासत पैरोल की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था.

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इंजीनियर रशीद को शपथ लेने के लिए मिली पैरोल (फाइल फोटो)
इंजीनियर रशीद को शपथ लेने के लिए मिली पैरोल (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) की एक कोर्ट ने मंगलवार को कश्मीरी नेता शेख अब्दुल राशिद को कुछ शर्तों के साथ शपथ लेने की अनुमति दे दी है. वो 5 जुलााई को सांसद के रूप में शपथ लेंगे. इंजीनियर राशिद, हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराकर बारामूला सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे. जेल में होने की वजह से अभी तक उनकी शपथ नहीं हो पाई है. अब कोर्ट ने इंजीनियर राशिद को दो घंटे की हिरासत पैरोल दी है.

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शेख अब्दुल राशिद को 2017 में आतंकी फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था. रशीद ने शपथ लेने और अपने संसदीय कार्यों को करने के लिए अंतरिम जमानत या वैकल्पिक रूप से हिरासत पैरोल की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था. एडिशनल सेशन जज चंदर जीत सिंह ने 5 जुलाई को उन्हें शपथ लेने के लिए दो घंटे की हिरासत पैरोल की अनुमति दी, जो कुछ शर्तों के अधीन थी. दो घंटे के निर्धारित वक्त में सफर का समय शामिल नहीं है.

किन चीजों की नहीं मिली छूट?

कोर्ट ने कहा कि राशिद की पत्नी और बच्चों को पहचान पत्र दिखाने पर शपथ लेने के दौरान मौजूद रहने की अनुमति दी गई. उन्हें फोन और इंटरनेट के एक्सेस की छूट नहीं दी गई. अदालत ने यह भी कहा कि वह किसी भी मुद्दे पर मीडिया से बात नहीं करेंगे. इसके साथ ही वह संबंधित अधिकारियों के अलावा किसी से ही बात करेंगे.

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कोर्ट ने कहा कि उनके परिवार को समारोह की तस्वीरें न लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने का निर्देश दिया गया है. सोमवार को एनआईए के वकील ने राशिद की याचिका का विरोध नहीं किया और कहा कि उनका शपथ ग्रहण कुछ शर्तों के तहत होना चाहिए.

2019 से जेल में हैं राशिद

इंजीनियर राशिद, साल 2019 से जेल में है, जब एनआईए ने उस पर आतंकी फंडिंग मामले में कथित संलिप्तता के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाया था. मौजूदा वक्त में वो तिहाड़ जेल में बंद हैं.

पूर्व विधायक का नाम कश्मीरी बिजनेसमेन जहूर वटाली की जांच के दौरान सामने आया था, जिनको एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को कथित रूप से वित्त पोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

यह भी पढ़ें: जम्मू कश्मीर में 5 आतंकियों की संपत्ति कुर्क, कोर्ट के आदेश पर J-K पुलिस का एक्शन

एनआईए ने इस मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक, लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन समेत कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. यासीन मलिक को आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद 2022 में एक ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

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