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किसानों के भारत बंद से RSS से जुड़े भारतीय किसान संघ ने खुद को किया अलग

8 दिसंबर यानी कल होने वाले भारत बंद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय किसान संघ ने दूरी बना ली है. भारतीय किसान संघ का कहना है कि इस आंदोलन में राजनैतिक पार्टियां जुड़ गई हैं.

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कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन जारी (फोटो-PTI)
कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन जारी (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कल किसानों संगठनों ने बुलाया भारत बंद
  • भारतीय किसन संघ ने खुद किया अलग

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान 8 दिसंबर को भारत बंद पर अड़ गए हैं. 9 दिसंबर को सरकार और किसानों के बीच छठे दौर की बातचीत तय है. दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेताओं ने ऐलान किया कि कल सुबह से दोपहर 3 बजे तक पूरे देश में चक्का जाम किया जाएगा. इस दौरान दूध और सब्जी की सप्लाई भी बंद करने की चेतावनी दी गई है.  

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हालांकि, 8 दिसंबर यानी कल होने वाले भारत बंद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय किसान संघ ने दूरी बना ली है. भारतीय किसान संघ का कहना है कि उन्होंने इस भारत बंद से दूरी इसलिए बनाई है, क्योंकि इसमें राजनैतिक पार्टियां जुड़ गई हैं.  

भारतीय किसान संघ के मुताबिक, किसान संगठनों को लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात सरकार के सामने रखनी चाहिए.   सरकार ने जो कृषि संबंधित तीन कानून बनाए हैं, उसमें तीन कमियां हैं, जिसको लेकर हम सरकार को पहले से ज्ञापन दे चुके हैं. किसान की फसल को खरीदने के लिए सभी व्यापारियों को एक वेबसाइट पर रजिस्टर करना होगा.

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भारतीय किसान संघ ने कहा कि ये वेबसाइट भारत सरकार की देखरेख में चलेगी, जिससे कोई भी फर्जी कंपनी किसान की फसल को नहीं खरीद सकें, जो भी कंपनियां किसान की फसल खरीदेंगी, उनकी बैक गारंटी होनी चाहिए, जिससे फसल को खरीदेने के बाद तीन दिन उसकी पेमेंट अगर नहीं होती हैं तो उसका भुगतान बैक करें.

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भारतीय किसान संघ ने कहा कि मंडी और बाहर के लिए एमएसपी एक ही हो, यानी कोई भी एमएसपी से नीचे के दाम पर मंडी और बाहर से किसान की फसल को ना खरीद सके. हालांकि, किसान संगठन पांच कानून/बिल को वापस लेने की जिद पर अड़े हैं, जिसमें कृषि से जुड़े तीन कानून शामिल हैं.

 

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