दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि शहर एक झुग्गी बस्ती बन गया है और नागरिक अधिकारियों को अवैध निर्माण के खिलाफ मिलकर काम करना चाहिए. हाईकोर्ट ने केंद्र में स्थित निज़ामुद्दीन की बावली और बाराखंभा मकबरे जैसी संरक्षित स्मारक के पास अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने पर एमसीडी और डीडीए की खिंचाई की. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों से एक-दूसरे पर दोष मढ़ना बंद करने को कहते हुए कहा, "बहुत दुखद मामला है कि आपने शहर को इस हद तक सीमित कर दिया है."
पीठ में न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा भी शामिल थे, उन्होंने कहा, "इस जुगलबंदी को रोकना होगा. शहर के साथ ऐसा मत करो. यह एक स्लम बन गया है." अदालत, जो एक ऐसे मामले से निपट रही थी, जहां पहले से ही सील किए गए गेस्टहाउस की ऊपरी मंजिलों पर अनधिकृत निर्माण हुआ था, जो स्मारकों के पास डीडीए भूमि पर अवैध रूप से बनाया गया था, ने इमारत के मालिक की उपस्थिति मांगी और राय दी। कि ''प्रथम दृष्टया इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की जरूरत है.''
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने अदालत में मौजूद अधिकारियों को चेतावनी दी और सवाल किया कि अवैध निर्माणों को हटाने के साथ-साथ काम रोकने के पहले के आदेश की सूचना के बावजूद निर्माण गतिविधि को कैसे जारी रखने की अनुमति दी गई. पीठ में न्यायाधीश मनमीत पीएस अरोड़ा भी शामिल थे. अदालत ने इमारत के मालिक के वकील से यह बताने को भी कहा कि दूसरी और पांचवीं मंजिल के बीच निर्माण कैसे किया गया, जबकि निचली मंजिलों को अधिकारियों द्वारा कभी भी डी-सील नहीं किया गया था. अदालत ने पिछले महीने कहा था कि इस तरह का निर्माण प्रथम दृष्टया पुलिस और नागरिक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है.
यह कार्यवाही एनजीओ जामिया अरबिया निज़ामिया वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका पर हुई, जिसमें दावा किया गया था कि बावली गेट, हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह के पास "खसरा संख्या 556 ज़ियारत गेस्टहाउस" में "अवैध और अनधिकृत निर्माण" किया जा रहा था. वकील राकेश लाकड़ा के माध्यम से प्रस्तुत याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि डीडीए, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) गेस्टहाउस में निर्माण को रोकने में विफल रहे हैं, जो केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक निज़ामुद्दीन के 100 मीटर के भीतर स्थित है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि अदालत के निर्देशों के अनुसार, संपत्ति को सील कर दिया गया था, हालांकि, इसके बावजूद यहां अवैध निर्माण होने लगा था. मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी.