दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को बीजद सांसद पिनाकी मिश्रा द्वारा दायर मानहानि के मामले में वकील जय अनंत देहाद्राई को समन जारी किया. साथ ही यह अहम टिप्पणी की कि 'देश के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ साजिश रचना राजद्रोह है.' पिनाकी मिश्रा ने अपनी याचिका में देहाद्राई पर उनके ऊपर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाने और उन्हें उड़िया बाबू, पुरी का दलाल जैसे आपत्तिजनक नामों से बुलाने का आरोप लगाया है. न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने मिश्रा और देहाद्राई के वकीलों और स्वयं जय देहाद्राई की ओर से व्यापक दलीलें सुनने के बाद आदेश पारित किया.
हाई कोर्ट ने कहा कि सीबीआई पहले से ही देहाद्राई द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है. अदालत ने अपने आदेश में दर्ज किया कि देहाद्राई के वकील ने आश्वासन दिया है कि सुनवाई की अगली तारीख से पहले वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपराधिक साजिश में पिनाकी मिश्रा के शामिल होने से संबंधित आरोप नहीं दोहरायेंगे. हालांकि जय अनंत देहाद्राई ने स्वयं अदालत को आश्वासन दिया कि वह इस तरह के बयान सार्वजनिक डोमेन में नहीं देंगे, और इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं करने का अनुरोध किया.
मेरे पास अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत: देहाद्राई
हालांकि देहाद्राई ने कहा कि उनके पास पिनाकी मिश्रा के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत हैं, जो उन्होंने सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत किए हैं. जय अनंत ने कहा, 'उस आदमी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ साजिश रची है. यह 140 पृष्ठों की सामग्री है, और मैंने अपनी जान जोखिम में डालकर इस बात का सबूत रिकॉर्ड पर रखा है कि साजिश क्या थी. मैं खुली अदालत में नहीं कहूंगा, लेकिन मैं अपने वकील से अदालत को यह दिखाने के लिए कहूंगा कि ये सिर्फ आरोप नहीं थे.'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देहाद्राई के उन बयानों पर नाराजगी जताई जिसमें उन्होंने पीएम के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है और कहा कि देश की सर्वोच्च एजेंसियां पहले से ही इस मामले की जांच कर रही हैं. न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने टिप्पणी की, 'मुझे आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से कोई दिक्कत नहीं है- लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते. देखिए आपने क्या लिखा है, साजिश रची गई, भाषण प्रायोजित थे. आप ये सब नहीं कह सकते. क्या यह आपका बयान नहीं है कि वह साजिश रच रहे हैं?' कोर्ट ने देहाद्राई के वकील से पूछा, 'आप बताएं कि पिनाकी मिश्रा पीएम के खिलाफ कैसी साजिश रच रहे थे?'
जय अनंत देहाद्राई के वकील राघव अवस्थी ने कोर्ट से कहा, 'बयान का आधार मोइत्रा और मिश्रा के बीच घनिष्ठ संबंध है.' जस्टिस सिंह ने कहा, 'यही आपका एकमात्र कारण है? ये एक देश के पीएम पर गंभीर आरोप हैं. आप खुश नहीं हो सकते? आप एक सांसद द्वारा पीएम पर साजिश का गंभीर आरोप लगा रहे हैं. आप काउंटी के सर्वोच्च पद के बारे में बात कर रहे हैं' न्यायमूर्ति सिंह ने टिप्पणी की, ''यही आपका एकमात्र कारण है? ये एक देश के पीएम पर गंभीर आरोप हैं. आप खुश नहीं हो सकते? आप एक सांसद द्वारा पीएम पर साजिश का गंभीर आरोप लगा रहे हैं. आप देश के एक सर्वोच्च पद के बारे में बात कर रहे हैं.'
पीएम के खिलाफ साजिश स्टेट के खिलाफ अपराध है: HC
इसके बाद वकील जय अनंत देहाद्राई ने अदालत में खुद अपनी दलील रखी. उन्होंने कहा, 'मैं महुआ मोइत्रा, पिनाकी मिश्रा और दर्शन हीरानंदानी के बीच बातचीत का गवाह रहा हूं. मैंने खुद चीजें देखी हैं. विशेष रूप से मिश्रा और मोइत्रा के बीच एक साजिश रची गई थी, जहां मिश्रा मोइत्रा के भाषण लिखते थे और उन्हें बताते थे कि उन्हें पीएम को कैसे निशाना बनाना है.' न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, 'मिश्रा के वकील ने खुद कहा है कि उनकी पार्टी वैचारिक रूप से केंद्र में भाजपा के साथ जुड़ी हुई है. यह गंभीर है. मैं इसकी अनुमति नहीं दे सकता. पीएम के खिलाफ साजिश स्टेट के खिलाफ अपराध है. यही तो परेशानी वाली बात है. यह सब मत करो.'
जय अनंत देहाद्राई के वकील ने अदालत से कहा, 'लोकपाल ने सीबीआई को महुआ मोइत्रा और पिनाकी मिश्रा के खिलाफ देहाद्राई के आरोपों के सभी पहलुओं की जांच करने का निर्देश दिया था. वास्तव में, लोकपाल की राय थी कि अधिकांश आरोप ठोस सबूतों द्वारा समर्थित थे. अत: यह नहीं कहा जा सकता कि देहाद्राई इन्हें सिद्ध नहीं कर सकेंगे.' इस पर जस्टिस जगमीत सिंह ने कहा, 'कृपया समझें.
जब आप कहते हैं कि देश के सर्वोच्च पद पर काबिज व्यक्ति के खिलाफ साजिश रची गई, तो इसका आम जनता पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.' दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को करेगा.