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CAA के बावजूद क्या पाकिस्तान-बांग्लादेश-अफगानिस्तान से आए मुस्लिमों को मिल सकती है भारत की नागरिकता? जानिए सिस्टम

सीएए के तहत भले ही तीनों पड़ोसी देशों से आए मुस्लिम समुदाय के लोग भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं, लेकिन पुराने कानून के तहत दावा कर सकते हैं. विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता पाने के लिए पुराने कानून की मदद लेनी होगी. इतना ही नहीं, पुराने कानून की मदद से ही सिंगर अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता हासिल की थी.

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देश में सीएए लागू हो गया है.
देश में सीएए लागू हो गया है.

देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू हो गया है. इसके तहत अब तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थी (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई) को भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है. मुस्लिम समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है. इसलिए उन्हें लगता है कि भेदभाव किया जा रहा है. हालांकि, सरकार का तर्क है कि इन तीनों देशों में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक में आता है. जबकि सीएए के दायरे में लाए गए 6 गैर मुस्लिम समुदाय वहां अल्पसंख्यक में गिने जाते हैं. वहां उन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जाता है, इसलिए तंग आकर ऐसे शरणार्थी सालों पहले भारत में आकर बस गए हैं.

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हालांकि, ऐसा नहीं है कि तीनों पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को भारत में नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इसके लिए जरूरी शर्तों और नियमों का पालन किया जाना जरूरी है. आइए जानते हैं क्या हैं भारतीय नागरिकता को लेकर नियम...

'पात्रता पूरी करने पर मिलेगी भारतीय नागरिकता'

सीएए के तहत भले ही तीनों पड़ोसी देशों से आए मुस्लिम समुदाय के लोग भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं, लेकिन पुराने कानून के तहत दावा कर सकते हैं. विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता पाने के लिए पुराने कानून की मदद लेनी होगी. इतना ही नहीं, पुराने कानून की मदद से ही सिंगर अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता हासिल की थी. 2019 में गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि पिछले छह वर्षों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए करीब 4,000 लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई है. इनमें सैकड़ों मुस्लिम भी शामिल हैं. सरकार का कहना था कि ऐसे शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलती रहेगी, जो पात्रता पूरी करते हैं. सीएए विदेश के किसी भी धार्मिक समुदाय को टारगेट नहीं करता है.

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विदेशी मुस्लिम कैसे हासिल कर सकते हैं भारतीय नागरिकता?

भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सिटीजनशिप एक्ट 1955 में कानूनी प्रावधान किए गए हैं. इसके मुताबिक कोई भी ऐसा शख्स जो 12 साल से भारत में निवास कर रहा हो और आवेदन करने से पहले वो लगातार एक साल तक भारत में रहा हो, इसके अलावा उसने कुल 11 साल का वक्त भारत में रहकर बिताया हो, वो भारतीय नागरिकता हासिल करने का दावा कर सकता है. इसके अलावा वो सिटीजनशिप एक्ट के तीसरे अनुसूची में निर्धारित योग्यता को पूरा करता हो. गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पर एक सवाल के जवाब में कहा था, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान भी पहले के कानून के मुताबिक भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. शाह का कहना था कि हाल के वर्षों में करीब 566 मुसलामनों को इसी तरह से भारतीय नागरिकता दी गई है.

CAA

भारतीय नागरिकता के लिए और क्या प्रावधान हैं?

- 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद और 1 जुलाई 1987 के पहले जिन लोगों का भारत में जन्म हुआ है, वो भारतीय नागरिक कहलाएंगे. इससे फर्क नहीं पड़ता कि इनके माता-पिता कहां के नागरिक थे या हैं.
- 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच भारत में जन्म लेने वाला ऐसा शख्स जिसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई भी नागरिक भारतीय है, वो भारतीय नागरिक कहलाएगा.
- 3 दिसंबर 2004 के बाद भारत में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति जिसके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों या कम से कम कोई एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो, तो वह भारतीय नागरिक कहलाएगा.
- भारत की नागरिकता रजिस्ट्रेशन के जरिए भी पाई जा सकती है. भारतीय मूल का ऐसा व्यक्ति जो कम से कम 7 सालों से यहां रह रहा हो, वो रजिस्ट्रेशन के जरिए नागरिकता पा सकता है.
- ऐसा व्यक्ति जिसका भारतीय नागरिक से विवाह हुआ हो और रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई करने से पहले कम से कम 7 सालों से भारत में रह रहा हो. ऐसे व्यक्ति के छोटे बच्चे जो भारतीय नागरिक हैं.

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पर्यटन और धार्मिक वीजा पर भारत आते हैं विदेशी नागरिक

पाकिस्तान या अन्य देशों से ज्यादातर गैर मुस्लिम नागरिक धार्मिक या पर्यटन वीजा पर भारत आते हैं और यहीं रह जाते हैं. ऐसे शख्स नागरिकता के लिए आवेदन भी करते हैं, लेकिन किसी वजह से नागरिकता नहीं मिलने की स्थिति में यह लोग अधर में लटक जाते हैं. वीजा और पासपोर्ट एक्सपायर होने की वजह से अपने देश भी नहीं लौट पाते हैं. इधर, भारत की नागरिकता ना मिलने की वजह से यहां मिल रही सुविधाओं का अधिकार भी हासिल नहीं कर पाते हैं.

अब तक 9 राज्यों के कलेक्टरों को मिले थे अधिकार

 2004 में केंद्र सरकार ने 1965 और 1971 के युद्धों के कारण विस्थापित हिंदू या उन हिंदू शरणार्थियों के संबंध में गुजरात और राजस्थान के छह कलेक्टरों और गुजरात सरकार को नागरिकता देने की शक्ति सौंपी थी, जो पांच साल पहले पाकिस्तान से आए थे. पिछले दो वर्षों में 9 राज्यों में 30 से ज्यादा कलेक्टरों और गृह सचिवों को नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत तीनों देशों से आने वाले गैर मुस्लिम छह समुदायों को भारतीय नागरिकता देने की शक्तियां दी गई हैं. गृह मंत्रालय के मुताबिक, एक अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक तीनों देशों के 1414 गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता दी गई है.

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'सीएए में किसे मिलेगी भारतीय नागरिकता?'सरकार का कहना था कि तीनों पड़ोसी देशों में मुस्लिम बहुसंख्यक समुदाय हैं. यदि वे पंजीकरण या देशीयकरण के लिए कानून में पहले से ही प्रदान की गई पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं तो उन्हें भारतीय नागरिकता मिलती रहेगी. सीएए के अनुसार, 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से जुड़े लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी.  इससे पहले भारत में अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले लोगों को नागरिकता नहीं दी जाती थी. उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था.

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'4.61 लाख तमिलों को भारतीय नागरिकता दी गई'

भारत के संविधान के अनुच्छेद 6 में प्रावधान है कि जो व्यक्ति 19 जुलाई 1948 से पहले पाकिस्तान से भारत आया है, उसे भारतीय नागरिक माना जाएगा. दूसरा, भले ही वो इस तिथि को या उसके बाद भारत आया हो, यहां सिर्फ छह महीने रहने के बाद उसे भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत किया गया था. साल 1964 से 2008 के दौरान 4.61 लाख भारतीय मूल के तमिलों को भारतीय नागरिकता दी गई है. वर्तमान में करीब 95,000 श्रीलंकाई शरणार्थी तमिलनाडु में रह रहे हैं. उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा राशन, अनुदान और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं.

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मुस्लिमों के विरोध की वजह 

विपक्ष का कहना है कि इसमें मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. वे जानबूझकर अवैध घोषित किए जा सकते हैं. वहीं बिना वैध दस्तावेजों के भी बाकियों को जगह मिल सकती हैं. नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की सबसे बड़ी वजह यही है. विरोध करने वाले इस कानून को एंटी-मुस्लिम बताते हैं. उनका कहना है कि जब नागरिकता देनी है तो उसे धर्म के आधार पर क्यों दिया जा रहा है? इसमें मुस्लिमों को शामिल क्यों नहीं किया जा रहा? इस पर सरकार का तर्क है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान इस्लामिक देश हैं और यहां पर गैर-मुस्लिमों को धर्म के आधार पर सताया जाता है, प्रताड़ित किया जाता है. इसी कारण गैर-मुस्लिम यहां से भागकर भारत आए हैं. इसलिए गैर-मुस्लिमों को ही इसमें शामिल किया गया है.

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