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MP News: ग्वालियर जिला मुख्यालय से 41 किमी दूर दक्षिण की ओर चलने पर घाटीगांव के सिरसा गांव में शनिवार को काफी चहल-पहल थी. आगरा-मुंबई राजमार्ग (AB Road) के किनारे बसे इस स्थान पर बच्चे-बूढ़े-बड़ों की भारी भीड़ और उनकी गाड़ियों की कतारें ही कतारें लगी हुई थीं. दूर-दूर तक वातावरण सुगंधित था और घी की खुशबू आ रही थी. मौका था गुर्जर समाज के आराध्य भगवान देवनारायण जी के 1111वें अवतरण महोत्सव के उपलक्ष्य में हुए विशाल भंडारे का. इस भंडारे में बर्तनों की जगह सीमेंट-कांक्रीट मिक्सर से प्रसाद तैयार किया गया और ट्रैक्टर की ट्रॉलियों में भरकर श्रद्धालुओं को परोसा गया.
सिरसा गांव के विशाल परिसर में फैले भगवान देवनारायण मंदिर में इस खास अवसर पर पिछले सात दिन से भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा था. साथ ही कथा समापन के बाद हर शाम भंडारे का आयोजन हुआ. वहीं, अंतिम यानी सातवें दिन यह आयोजन काफी बड़े स्तर पर हुआ.
100 क्विंटल शक्कर और 500 क्विंटल आटा
भंडारे की व्यवस्था में सिरसा, महारामपुरा, घेंघोली, रेंहट समेत पड़ोसी गांवों को लगाया गया था. रेंहट निवासी ब्रजेश गुर्जर ने बताया कि सप्ताहभर प्रसाद में श्रद्धालुओं को मालपुए, खीर और आलू की सब्जी परोसी गई. इसके लिए तकरीबन हर रोज 30 क्विंटल शक्कर, 60 क्विंटल आलू, 20 क्विंटल चावल और 35 क्विंटल गेहूं के आटे समेत बड़ी मात्रा में घी की खपत हुई. इसके अलावा खीर में लगने वाला दूध आसपास के ग्रामीण मुहैया करवा रहे थे. वहीं, कथा के अंतिम दिन हुए भंडारे में 100 क्विंटल से ज्यादा शक्कर, आलू 100 क्विंटल, 60 क्विंटल चावल और 500 क्विंटल आटे की खपत हो गई.
कंक्रीट मिक्सर और ट्रॉलियों का इस्तेमाल
इस अनोखे भंडारे में मालपुओं का घोल तैयार करने के लिए बिल्डिंग निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट-कंक्रीट मिक्सर की मदद ली गई. साथ ही सब्जी और खीर को कड़ाहों से निकालकर बर्तनों की जगह ईंट-सीमेंट की बनीं हौद यानी टंकियों में स्टोर किया गया. इसके अलावा मालपुए के भी ढेर के ढेर लगा दिए गए.
बाल्टियों में भरकर परोसा गया प्रसाद
टंकियों और ट्रॉलियों में भरी सब्जी-खीर और मालपुओं को बाल्टियों में भरकर पत्तलों में परोसा गया. लगभग 250 स्वयंसेवकों की टीम परोसने के लिए काम में लगी हुई थी. वहीं, बड़ी मात्रा में प्रसाद बनाने में 100 से ज्यादा हलवाइयों के लोग लगे हुए थे.
गांववार बांटा गया जिम्मा
इसके अलावा, भंडारे की व्यवस्था का जिम्मा संत शीतलदास महाराज ने गांववार बांट दिया था. मसलन, किसी एक गांव के लोगों को प्रसाद तैयार करवाने, दूसरे गांव को परोसने और तीसरे गांव को पत्तल उठाने की जिम्मेदारी सौंप दी थी. वहीं, कुछ स्वयंसेवकों ने मंदिर आने वाले श्रद्धालओं की गाड़ियां सही ढंग से पार्क करने का बीड़ा उठाया.
देवनारायण मंदिर के महंत शीतलदार जी महाराज ने Aajtak.in को बताया कि कथा के बाद हर शाम होने वाले भंडारे में तकरीबन 80 हजार लोगों ने प्रसाद पाया. जबकि अंतिम दिन लगभग 2 लाख लोग शामिल हुए. देखें मिक्सर से घोल बनाने का Video:-
चंदे से हुआ आयोजन
महंत शीतल दास महाराज के अनुसार, भगवान देवनारायण जी के अवतरण महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित कथा और भंडारे के लिए ग्वालियर-चंबल संभाग के गुर्जर समाज से चंदा लिया गया था. हालांकि, अन्य समाजसेवियों, नेताओं और सामान्य लोगों ने भी इस धार्मिक कार्य के लिए अपनी-अपनी श्रद्धानुसार मुद्रा और वस्तुओं का दान दिया. इस दान में गेंहू, दूध चावल समेत अन्य सामग्रियां भी शामिल हैं.
गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शनिवार को राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित भगवान देवरानाराण की जन्मस्थली मालासेरी गांव गए थे. भगवान देवरानाराण के 1111वें अवतरण महोत्सव में पीएम मोदी ने कहा था कि भगवान देवनारायण भी ऐसे ही ऊर्जापुंज थे, अवतार थे, जिन्होंने अत्याचारियों से हमारे जीवन और हमारी संस्कृति की रक्षा की. देह रूप में मात्र 31 वर्ष की आयु बिताकर, जनमानस में अमर हो जाना, सर्वसिद्ध अवतार के लिए ही संभव है. उन्होंने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने का साहस किया, समाज को एकजुट किया, समरसता के भाव को फैलाया. भगवान देवनारायण ने समाज के विभिन्न वर्गों को साथ जोड़कर आदर्श व्यवस्था कायम करने की दिशा में काम किया. यही कारण है कि भगवान देवनारायण के प्रति समाज के हर वर्ग में श्रद्धा है, आस्था है. इसलिए भगवान देवनारायण आज भी लोकजीवन में परिवार के मुखिया की तरह हैं, उनके साथ परिवार का सुख-दुख बांटा जाता है.