अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि पर मंदिर पुनर्निर्माण के लिए कोष संग्रह अभियान का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार से हो रहा है. अभियान के प्रथम दिवस पर देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की शुभेच्छा के साथ आने वाले 13 दिन विश्व हिंदू परिषद और अन्य अनुषांगिक संगठनों की टोलियां देशभर के पांच लाख से ज्यादा गांवों के करीब 13 करोड़ परिवारों में जाकर 65 करोड़ से ज्यादा लोगों से संपर्क करेंगी.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मुलाकात करने वालों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी जी महाराज के साथ न्यास के अन्य पदाधिकारी भी होंगे. उनके साथ विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार और उनके सहयोगी पदाधिकारी भी होंगे. राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद साझा तौर पर अभियान की बारीकियां और प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी.
विश्व हिंदू परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट आलोक कुमार ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि अभियान के दौरान परिषद और अन्य अनुषांगिक संगठनों की टीमें स्थानीय निवासियों की मदद से गांव, कस्बे, शहर और महानगरों में हर दरवाजे पर दस्तक देंगी. अब भारतीय परंपरा के मुताबिक इस पुनीत कार्य में कोई भी श्रद्धालु और उनका परिवार कुछ भी योगदान करेगा तो सभी के हाथ लगवाए जाते हैं और घर के मंदिर में देव प्रतिमा के सामने धनराशि अर्पित कर कार्यकर्ता टोली को सौंपी जाती है.
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परिषद ने ये तय किया है कि दस रुपये से लेकर हजार रुपये तक सहयोग राशि समर्पित करने वालों को कूपन दिए जाएंगे, जिन पर रामलला और मंदिर की प्रतिकृति बनी होगी. हजार रुपये से ज्यादा सहयोग करने वालों को रसीद दी जाएगी. लोग इसे स्मृति या ट्रॉफी के तौर पर अपने घर के मंदिर या पूजा उपासना के स्थान पर रख सकेंगे.
जब आजतक ने उनसे पूछा कि कई लोगों को ये भी आशंका है कि कोई फर्जी आदमी फर्जी रसीद लेकर विश्व हिंदू परिषद के नाम पर चंदा वसूल कर फर्जीवाड़ा करने लगे तो? आखिर जनता कैसे पहचाने कौन-असली कौन नकली? इस पर आलोक कुमार का कहना था कि ऐसी इक्का-दुक्का घटनाएं सामने आ सकती हैं, लेकिन स्थानीय नागरिक तो हर किसी को पहचानते हैं. फिर भी श्रद्धालु जनता को सतर्क रहने की जरूरत है.
आलोक कुमार के मुताबिक, रोजाना जमा राशि को 48 घंटे के अंदर न्यास के बैंक खातों में जमा करना होगा. इसके लिए हर टीम को बैंक खाते और इलाके का एक कोड दिया गया है यानी बिलकुल पारदर्शी और नियमित तौर पर सहयोग राशि इकठ्ठा कर बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया तय की गई है, जिसमें पाई-पाई का हिसाब बिल्कुल साफ रहेगा.