पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है. यहां तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक हिंसा नहीं थम सकी है. इस हिंसा के पीछे प्रमुख वजहों में अफीम की खेती को भी माना जा रहा है. सरकार ने इस पूरे कारोबार को खत्म कर दिया है. इधर, मणिपुर के बाद तस्करों ने मिजोरम का ड्रग्स व्यापार का अड्डा बना दिया है. यहां म्यांमार से ड्रग्स की सप्लाई की जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, मणिपुर में तीन मई से हिंसा शुरू हुई, उसके बाद से ही मिजोरम में ड्रग्स पकड़े जाने की घटनाओं में तेजी आई है. दरअसल, मणिपुर में तीन मई की हिंसा के बाद से ही हाइवे ब्लॉक है, इसीलिए स्मगलर्स अब दूसरे रास्तों के जरिए ड्रग्स भेज रहे हैं. इन्होंने अपना रास्ता मणिपुर के बजाए अब मिजोरम से कर दिया है.
3 मई से अब तक 78 करोड़ की ड्रग्स जब्त
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीन मई के बाद से अब तक मिजोरम में 78 करोड़ रुपए से ज्यादा के नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं. बताते चलें कि सरकार की मणिपुर को ड्रग्स कारोबार से राहत मिली है. चूंकि, मणिपुर में कुकी समुदाय लंबे समय से अफीम की खेती कर रहा था, जिसकी वजह से मणिपुर में एक बड़ा ड्रग कल्चर खड़ा हो गया था. लेकिन, जब सरकार ने उसे नष्ट कर दिया तो समुदाय में नाराजगी बढ़ गई.
मिजोरम में कुछ प्रमुख ड्रग बरामदगी...
- 5 मई: ऐजवाल (Aizawl) में 11 करोड़ रुपए की ड्रग्स पकड़ी गई.
- 22 मई: ऐजवाल में 12 करोड़ रुपए की हेरोइन पकड़ी गई.
- 23 मई: ऐजवाल में फिर करीब 20 करोड़ रुपए की ड्रग्स पकड़ी गई.
- 6 जून: ऐजवाल में 15 करोड़ रुपए की हेरोइन पकड़ी गई.
-14 जून: ऐजवाल में 5 करोड़ रुपए की हेरोइन पकड़ी गई.
मणिपुर में हिंसा की वजह बनी अफीम की खेती? तीन समुदायों में उलझी है पूरी कहानी
अब तक 78 करोड़ रुपए की ड्रग्स पकड़ी जा चुकी है. इसका वजन 16 हजार किलोग्राम से भी ज्यादा है. ये कार्रवाई मिजोरम के अलग-अलग इलाकों में की गई है.
मणिपुर में हिंसा की क्या वजह...
मणिपुर में मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं और वो इस हिंसा के लिए कुकी आदिवासियों को दोषी ठहराते हैं. जबकि कुकी समुदाय के ज्यादातर लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं. हिंसा के लिए मैतेई समुदाय के लोग कुकी पर आरोप ला रहे हैं. उनके अनुसार, अफीम की खेती, उग्रवाद और मैतेई को एसटी का दर्जा देने की मांग का विरोध किया जा रहा है.
ड्रग्स की लड़ाई क्यों...?
- मणिपुर में अफीम की अवैध खेती जबरदस्त तरीके से होती है. मणिपुर में लगभग साढ़े 15 हजार एकड़ की जमीन पर अफीम की खेती होती है.
- इसमें से 13 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन पर कुकी-चिन समुदाय के लोग अफीम की खेती करते हैं. करीब 2300 एकड़ जमीन पर नगा खेती करते हैं. बाकी 35 एकड़ जमीन पर दूसरे समुदाय के लोग अफीम की खेती करते हैं.
- सरकार ने 2017 में इसके खिलाफ क्रैकडाउन शुरू किया था. इसी महीने कुछ आंकड़े सामने आए थे. इसमें बताया गया था कि 2017 से 2023 के बीच ड्रग्स के सिलसिले में किस समुदाय के कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
- सामने आया कि राज्य में एनडीपीएस एक्ट के तहत ढाई हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से 873 लोग कुकी-चिन समुदाय के थे. एक हजार से ज्यादा मुस्लिम थे और 381 लोग मैतेई समुदाय से जुड़े थे. 181 लोग दूसरे समुदायों के थे.
- यहां मुख्य रूप से तीन समुदाय हैं. पहला- मैतेई, दूसरा- नागा और तीसरा- कुकी. इनमें नागा और कुकी आदिवासी समुदाय हैं. जबकि, मैतेई गैर-आदिवासी हैं.
अफीम, जमीन और आरक्षण की लड़ाई... आखिर मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय आमने-सामने क्यों हैं?