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बंगाल की खाड़ी में देर रात भूकंप, रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई तीव्रता

बंगाल की खाड़ी में सोमवार की रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस दौरान रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई. इससे पहले मोरक्को में आए भूकंप से तबाही मच गई थी, जिसमें अबतक 2100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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सांकेतिक फोटो
सांकेतिक फोटो

बंगाल की खाड़ी में सोमवार की रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस दौरान रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, सोमवार की रात 01:29:06 बजे आए भूकंप का केंद्र 70 किमी गहराई में था. 

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इससे पहले अफ्रीकी देश मोरक्को में 9 सितंबर की सुबह आए भूकंप ने भीषण तबाही मचा दी. यहां धरती में हुए कंपन के बाद कई इमारतें ढह गईं, जिसमें 2100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.8 थी. रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है. भूकंप इतना जोरदातर था कि उसका असर मराकेश से करीब 350 किलोमीटर दूर राजधानी रबात में भी महसूस किया गया.   

क्यों आता है भूकंप?  

धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं. एकदूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं. 

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रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 तक होती है. भूकंप की तीव्रता को उसके केंद्र यानी एपीसेंटर से नापा जाता है. यानी उस केंद्र से निकलने वाली ऊर्जा को इसी स्केल पर मापा जाता है. 1 यानी कम तीव्रता की ऊर्जा निकल रही है. 9 यानी सबसे ज्यादा. बेहद भयावह और तबाही वाली लहर. ये दूर जाते-जाते कमजोर होती जाती हैं. अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है. 

कितने प्रकार के होते हैं भूकंप?

भूकंपों के चार प्रकार होते हैं. पहला इंड्यूस्ड अर्थक्वेक (Induced Earthquake) यानी ऐसे भूकंप जो इंसानी गतिविधियों की वजह से पैदा होते हैं. जैसे सुरंगों को खोदना, किसी जलस्रोत को भरना या फिर किसी तरह के बड़े भौगोलिक या जियोथर्मल प्रोजेक्ट्स को बनाना. बांधों के निर्माण की वजह से भी भूकंप आते हैं. 

दूसरा होता है वॉल्कैनिक अर्थक्वेक (Volcanic Earthquake) यानी वो भूकंप जो किसी ज्वालामुखी के फटने से पहले, फटते समय या फटने के बाद आते हैं. ये भूकंप गर्म लावा के निकलने और सतह के नीचे उनके बहने की वजह से आते हैं.

तीसरा होता है कोलैप्स अर्थक्वेक (Collapse Earthquake) यानी छोटे भूकंप के झटके जो जमीन के अंदर मौजूद गुफाओं और सुरंगों के टूटने से बनते हैं. जमीन के अंदर होने वाले छोटे विस्फोटों की वजह से भी ये आते हैं.

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चौथा है एक्सप्लोसन अर्थक्वेक (Explosion Earthquake) इस तरह के भूकंप के झटके किसी परमाणु विस्फोट या रासायनिक विस्फोट की वजह से पैदा होते हैं.

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