प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) की 50:50 स्कीम में भारी गड़बड़ी सामने आई है. इस घोटाले में 490 करोड़ रुपये की 1095 संपत्तियां अवैध रूप से आवंटित की गईं, जिनकी बाजार वैल्यू 700 करोड़ रुपये से अधिक है. ED ने पाया कि इन संपत्तियों को नियमों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर बेनामी और फर्जी नामों पर आवंटित किया गया. इन संपत्तियों को बाद में रियल एस्टेट कारोबारियों द्वारा बेचकर अवैध कैश बनाई गई.
कैसे हुआ घोटाला?
जांच में यह सामने आया कि MUDA के पूर्व कमिश्नर दिनेश कुमार ने कथित रूप से इन अवैध आवंटनों के बदले लग्जरी कारें, नकदी और संपत्तियां लीं. इन आवंटनों को बाद में प्रभावशाली लोगों और रियल एस्टेट कारोबारियों को ट्रांसफर कर दिया गया.
ये संपत्तियां बाद में ग्राहकों को बेची गईं, और इस बिक्री से मिली अवैध राशि को रियल एस्टेट बिजनेस से हुए मुनाफे या कमीशन के रूप में दिखाया गया. कई बार यह पैसा बेनामी व्यक्तियों या रिश्तेदारों के नाम पर छिपा दिया गया.
ED ने इस पूरे मामले को 'अपराध से प्राप्त धन' (Proceeds of Crime) करार दिया है. इस मामले की जानकारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की संबंधित धाराओं के तहत दी गई है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके.
MUDA स्कैम क्या है?
मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण को शॉर्ट फॉर्म में MUDA कहते हैं. जब सरकार किसी जमीन का अधिग्रहण करती है तो मुआवजे के तौर पर दूसरी जगह जमीन देती है. पूरा कथित MUDA स्कैम भी इसी से जुड़ा है.
ये पूरा मामला सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को मुआवजे के रूप में मिली 14 प्रीमियम साइट से जुड़ा है. यह मामला MUDA की ओर से उस समय मुआवजे के तौर पर जमीन के पार्सल के आवंटन से जुड़ा है जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे.
ये प्लॉट मैसूर में हैं. आरोप है कि सिद्धारमैया और उनकी पत्नी पार्वती ने MUDA से गैरकानूनी तरीके से जमीन ली. दावा है कि इसमें 4 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है.जिस जमीन की यहां बात हो रही है वो केसारू गांव की 3.16 एकड़ का प्लॉट है. साल 2005 में इस जमीन को सिद्धारमैया के बहनोई मल्लिकार्जुन स्वामी देवराज को ट्रांसफर कर दिया गया था.