एवरेस्ट के बेस कैंप में पहुंची आठ साल की बच्ची रोजाना 8-9 किलोमीटर चलती है. उसकी लगन को देखकर ट्रेकर्स हैरान हैं. अपनी मां प्रसिद्ध तैराक स्नेह वाधवनी और गाइड कम ट्रिप लीडर संजीव राय के साथ आठ साल की वीरा वाधवानी दहिया ने तीन मार्च को अपना ट्रेक शुरू किया और 12 मार्च को वह एवरेस्ट के बेस कैंप में पहुंच गई.
वीरा की ऊर्जा का रहस्य ये है कि वह अपनी मां के साथ नियमित रूप से ट्रेकिंग करती रही है. जब वो छोटी थी तभी से ही उसकी मां उसे अपने हाइकिंग कैरियर में ट्रेक पर लेकर जाती थी. इसी वजह से वीरा और पहाड़ों का संबंध बन गया. इतनी छोटी उम्र में उसकी एनर्जी और लगन को देखकर सभी साथी ट्रेकर्स हैरान हैं.
वीरा की मां स्नेह ने कहा कि वह हमेशा तंबू में रहने का आनंद लेती है. स्लीपिंग बैग में शांति से सोती है और प्रकृति में उसे घर जैसा लगता है. बिना किसी झंझट के बच्ची के साथ ट्रेकिंग करना आसान और आनंददायक था. उसे शिविर में भोजन करना और चॉकलेट, दही, लस्सी ने खुश रखा.
जब से वीरा ने चलना शुरू किया, तब से वह अपनी मां और अपने दोस्तों के साथ ट्रेक पर जाने के लिए उत्साहित रहती थी. स्नेह ने कहा कि हमारी सभी छुट्टियों में हमेशा हाइक या ट्रेक शामिल होते हैं. वीरा लंबी दूरी तक चलने से कभी नहीं डरी. काफी लंबी दूरी तय करने के लिए उस पर हमेशा भरोसा किया जा सकता था. स्नेह ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है.
वीरा के पिता लखनऊ आईपीएल टीम के कोच
वीरा की मां ने कहा कि उन्होंने बेटी को एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा के लिए तैयार करने का खास ख्याल रखा. मैंने अभिभावक के रूप में यही सीखा कि बच्चे अद्धुत हैं. सच कहूं तो वह अपने माता-पिता को घर पर देखती है, हम दोनों खिलाड़ी और सक्रिय आउटडोर प्रेमी हैं- हमें खुशी है कि हमने उसे उसी के लिए अपने प्यार के साथ जोड़ा. वीरा के पिता और टेस्ट क्रिकेटर विजय दहिया के लिए, यह बहुत खुशी का क्षण था. वे कहते हैं कि वीरा ने वह हासिल किया जो मैं लंबे समय से चाहता था. विजय वर्तमान में इंडियन प्रीमियर लीग में लखनऊ सुपर जायंट्स के कोच के रूप में काम कर रहे हैं.
दिल्ली में पढ़ती है वीरा
द हिंदू के मुताबिक, वीरा दिल्ली के ब्रिटिश स्कूल में कक्षा तीन की छात्रा है. उसने बीते साल भर में कई छोटे ट्रेक किए. दिसंबर 2022 में वीरा और स्नेह ने कश्मीर में नारानाग-डुमैल पगडंडी पर पैदल यात्रा की. मार्च 2022 में उन्होंने हिमाचल में शुमगा ट्रेक लिया और उसके बाद गढ़वाल के हिडन मीडोज के लिए पांच दिवसीय ट्रेक किया.
सुबह 5 बजे उठती है वीरा
वीरा ने सुबह और शाम के समय कई सक्रिय खेलों में भी हिस्सा लिया. स्कूल एथलेटिक्स और तैराकी टीम का हिस्सा होने के नाते वह नियमित रूप से ट्रेनिंग लेती है. उसकी ट्रेनिंग में सप्ताह में दो बार बैले कक्षाएं और सप्ताह में एक बार बोल्डरिंग भी शामिल है. वीरा की मां कहती हैं कि वीरा के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने ट्रेनिंग सत्रों के लिए हर सुबह 5 बजे उठने के बारे में कभी कोई बात नहीं करती है. एवरेस्ट के बेस कैंप में कई युवाओं से मिलने के बाद वीरा सपनों से भरी हुई वापस आ गई है. वह भविष्य में कई और ट्रेक पर जाने की उम्मीद करती है. वह आवश्यक तकनीकों और तरकीब सीखने के लिए IMF (इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन) में शामिल होने के लिए उत्सुक है.