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Election Laws bill: वोटर कार्ड-आधार लिंक के बिल पर सियासी घमासान, क्या हैं प्रावधान और विपक्ष को क्या आपत्ति?

Election Reform Bill Explainer: चुनाव सुधार से जुड़ा बिल लोकसभा में पास हो गया. इस बिल में वोटर आईडी से आधार को लिंक करने का प्रावधान भी है. विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है. विपक्ष का कहना है कि इससे लोगों की निजता और सुरक्षा को खतरा होगा.

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वोटर आईडी से आधार को लिंक करने की सिफारिश चुनाव आयोग ने की थी. (फाइल फोटो-PTI)
वोटर आईडी से आधार को लिंक करने की सिफारिश चुनाव आयोग ने की थी. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आधार को वोटर आईडी से लिंक करने पर आपत्ति
  • विपक्ष का आरोप- नागरिकों की निजता खतरे में

Election Reform Bill Explainer: चुनाव सुधार से जुड़ा एक अहम बिल The Election Laws (Amendment) Bill, 2021 सोमवार को लोकसभा से पास हो गया. इस बिल को अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल के कानून बनते ही वोटर आईडी से आधार कार्ड को लिंक करने का रास्ता साफ हो जाएगा.

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2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आधार और वोटर कार्ड को लिंक करने पर रोक लगा दी थी. लेकिन इस कानून से ये रास्ता बन जाएगा. चुनाव सुधार से जुड़े इस अहम बिल में आधार-वोटर आईडी लिंकिंग के अलावा 3 और बड़े बदलाव हैं. हालांकि, विपक्ष ने वोटर आईडी को आधार से लिंक करने पर आपत्ति जताई है. इस बिल से क्या बदलाव होंगे? और विपक्ष को क्या आपत्तियां हैं? जानते हैं...

बिल में क्या-क्या प्रावधान है?

1. वोटर आईडी-आधार कार्ड से लिंकः इस बिल में जो अहम प्रावधान है, वो है वोटर आईडी और आधार कार्ड को लिंक करने का. चुनाव आयोग ने ही इसकी सिफारिश की थी. तर्क है कि अगर वोटर आईडी से आधार कार्ड को जोड़ दिया जाता है तो उससे चुनावों में फर्जी वोटिंग को रोका जा सकेगा, साथ ही वोटर आईडी की डुप्लीकेसी पर भी लगाम लगेगी. 

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2. साल में 4 बार रजिस्ट्रेशनः इस बिल में वोटर लिस्ट में साल में 4 बार नाम जुड़वाने का प्रावधान भी है. अभी तक साल में एक बार ही नामांकन करवा सकते थे. लेकिन अब 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को नामांकन करवा सकेंगे.

3. जेंडर न्यूट्रल होगाः सर्विस वोटर के लिए इसे जेंडर न्यूट्रल बनाया गया है. इससे महिला कर्मचारियों के पति भी सर्विस वोटर की लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकेंगे. अब 'पत्नी' शब्द की जगह 'पति या पत्नी' (Spouse) लिखा जाएगा. 

4. चुनाव आयोग को मिला अधिग्रहण का अधिकारः कानून बनते ही चुनाव आयोग को किसी भी संस्था या परिसर का चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल करने के लिए अधिग्रहण करने का अधिकार मिल जाएगा. चुनाव आयोग वोटिंग, काउंटिंग या ईवीएम रखने या फिर अन्य दूसरे काम करने के लिए अधिग्रहित कर सकेगी. 

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विपक्ष को क्या है आपत्तियां?

1. प्राइवेसी को खतरा-डेटा चोरी की आशंकाः विपक्ष को इस बिल में सबसे ज्यादा आपत्ति आधार कार्ड और वोटर आईडी को साथ जोड़ने पर है. विपक्ष का आरोप है कि इससे प्राइवेसी का हनन है और डेटा भी चोरी हो सकता है. तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुधांशु शेखर रे ने कहा कि आधार और वोटर आईडी को जोड़ने से न सिर्फ लोगों की प्राइवेसी से समझौता होगा, बल्कि इससे वास्तविक वोटर्स भी बाहर हो जाएंगे. 

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2. जिनके पास नागरिकता नहीं, वो भी वोटर बन जाएंगेः कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि आधार कार्ड निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं. उन्होंने कहा कि अगर आधार को वोटर कार्ड से जोड़ा जाता है तो इससे गैर-नागरिकों को भी वोटिंग का अधिकार मिल जाएगा. थरूर ने कहा कि इसके जरिए सरकार संभावित रूप से गैर-नागरिकों को वोटिंग का अधिकार दे रही है.

3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघनः एमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है, जिसमें अदालत ने निजता को मौलिक अधिकार बताया था. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा होने से लोगों की निजता और सुरक्षा को खतरा है.

सरकार का क्या है कहना?

- लोकसभा में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल को पेश किया था. विपक्ष की आपत्तियों पर रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और डुप्लीकेसी को रोका जा सकेगा.

- रिजिजू ने कहा कि आधार और वोटर आईडी को लिंक करने से अगर इलेक्टोरल रोल में किसी व्यक्ति का नाम एक से ज्यादा बार है तो अपने आप ही वो हट जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि आधार को लिंक कराना वैकल्पिक होगा. कोई व्यक्ति चाहेगा तो ही उसका वोटर आईडी आधार से लिंक होगा.

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