सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स का डेटा चुनाव आयोग को सौंप दिया था. इससे जुड़ी जानकारी को आयोग ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है. लेकिन अब इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को चुनाव आयोग की याचिका पर सुनवाई करेगा. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट के 11 मार्च के आदेश के एक हिस्से में संशोधन करने की अपील की है.
चुनाव आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सुनवाई के दौरान सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेजों की प्रतियां आयोग के कार्यालय में रखी जाएंगी. चुनाव आयोग ने कहा कि उसने दस्तावेजों की कोई प्रति नहीं रखी है.
ऐसे में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अदालत को सौंपे गए चुनावी बॉन्ड पर सीलबंद लिफाफे वापस करने की मांग की है. आयोग ने कहा कि उसने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों के तहत सीलबंद लिफाफे में चुनावी बॉन्ड की जानकारी सौंपी थी.
इसी मामले पर आज सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी. वहीं, 11 मार्च, 2024 के आदेश के अनुसार, चुनाव आयोग ने एसबीआई के उसे दिए गए चुनावी बॉन्ड का डाटा अपलोड कर दिया है.
चुनाव आयोग की ओऱ से अपनी वेबसाइट पर जो डाटा शेयर किया गया है, उसमें 12 अप्रैल 2019 के बाद से 1,000 रुपये से 1 करोड़ रुपये कीमत के चुनावी बॉन्ड (ये बॉन्ड अब समाप्त हो चुके हैं) की खरीद संबंधी जानकारी दी गई है. इसमें उन कंपनियों और व्यक्तियों का ब्योरा दिया गया है, जिन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे. साथ ही उन पार्टियों का भी विवरण है, जिन्हें ये चुनावी चंदा दिया गया था.
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किसे मिला चुनावी चंदा और किसने दिया?
इलेक्शन कमीशन की ओऱ से साझा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि चुनावी बांड के माध्यम से चुनावी चंदा हासिल करने वालों में भाजपा, कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, बीआरएस, शिवसेना, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल शामिल हैं.चुनावी बांड के माध्यम से राजनीतिक दलों को दान देने वालों की लिस्ट में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, मेघा इंजीनियरिंग, पीरामल एंटरप्राइजेज, टोरेंट पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ कमर्शियल डेवलपर्स, वेदांता लिमिटेड, अपोलो टायर्स, लक्ष्मी मित्तल, एडलवाइस, पीवीआर, केवेंटर, सुला वाइन, वेलस्पन, सन फार्मा और अन्य शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी साझा करने की समयसीमा 30 जून तक बढ़ाए जाने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने एसबीआई की मांग को खारिज कर दिया था और उसे 12 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग के समक्ष साझा करने को कहा था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को 'असंवैधानिक' करार देते हुए रद्द कर दिया था. साथ ही एसबीआई से 6 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग के पास जमा करने को कहा था. इस पर एसबीआई ने 30 जून तक का समय मांगा था. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने एसबीआई की मांग को खारिज करते हुए 12 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग को देने का आदेश दिया है. साथ ही चुनाव आयोग को ये सारी डिटेल 15 मार्च की शाम 5 बजे तक वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा था.
क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड?
साल 2017 में केंद्र सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा की थी. इसे 29 जनवरी 2018 को कानूनी रूप से लागू किया गया था. सरकार का कहना था कि चुनावी चंदे में 'साफ-सुथरा' धन लाने और 'पारदर्शिता' बढ़ाने के लिए इस स्कीम को लाया गया है. एसबीआई की 29 ब्रांचों से अलग-अलग रकम के इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए जाते हैं. ये रकम एक हजार से लेकर एक करोड़ रुपये तक हो सकती है. इसे कोई भी खरीद सकता है और अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को दे सकता है.