इलेक्टोरल बॉन्ड्स का डेटा चुनाव आयोग को सौंपने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दे दी है. एक हलफनामे में बैंक ने बताया कि कोर्ट के आदेश का परिपालन हो गया है. स्टेट बैंक ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स की खरीद-बिक्री का डेटा सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद 24 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को सौंप दी है. डेटा में 187 बॉन्ड्स की जानकारी नहीं दी गई है, जिसका पैसा पीएम केयर फंड में जमा करा दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने इस तरह के बॉन्ड को उसे देने वालों को ही वापस करने का आदेश दिया था.
एसबीआई ने अपने हलफनामे में कहा है कि बैंक ने सीलबंद लिफाफे में, एक पेनड्राइव में दो पीडीएफ फाइल के जरिए डेटा सौंपी है, जो पासवर्ड प्रोटेक्टेड हैं. हालांकि, डेटा में 'यूनिक कोड' शामिल है या नहीं, यह हलफनामे में कथित रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है. इसी 'यूनिक कोड' का इस्तेमाल करके पार्टियों के नाम के साथ मिलान किया जा सकता है, जिससे पता चलेगा कि आखिर किस पार्टी को कितना चंदा मिला.
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'पीएम रिलीफ फंड में जमा किया गया बाकी बॉन्ड्स'
एसबीआई ने अपने हलफनामे में दावा किया कि जिस इलेक्टोरल बॉन्ड का भुगतान किसी पार्टी को नहीं हो पाया, उसकी रकम पीएम रिलीफ फंड में जमा कर दी गई है. हलफनामे में बैंक ने आंकड़ों के जरिए बताया है कि 1 अप्रैल 2019 के बाद से 15 फरवरी 2024 तक कुल 22,217 इलेक्टोरल बॉन्ड्स बिके. बैंक ने बताया कि, इनमें से 22,030 बॉन्ड्स राजनीतिक दलों द्वारा भुना लिए गए.
स्टेट बैंक ने आगे दावा किया कि 187 बॉन्ड्स को भुनाया नहीं जा सका और इसलिए इसका भुगतान भी नहीं किया गया, और उसे पीएम रिलीफ फंड में जमा करा दिया गया. स्टेट बैंक ने बताया कि अप्रैल 2019 में उसी साल के 11 अप्रैल तक 3,346 बॉन्ड्स खरीदे गए थे और इनमें कुल 1,609 को उसी अवधि में पार्टियों द्वारा कैश करा लिया गया था.
क्या है 15 दिनों की डेडलाइन?
डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने नवंबर 2022 में इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम में संशोधन किया था. इसमें लोकसभा के चुनावी साल में बॉन्ड्स की बिक्री 15 और दिनों के लिए बढ़ाई गई थी. हालांकि, इससे पहले इसे 30 दिनों के सेल की मंजूरी थी लेकिन लोकसभा के चुनावी साल में इसमें 15 और दिनों का इजाफा किया गया.
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स्टेट बैंक ने चुनाव आयोग को दी जानकारी
स्टेट बैंक के हलफनामे के मुताबिक, चुनावी बॉन्ड के खरीदारों के नाम, बॉन्ड की खरीद और बॉन्ड्स के मूल्य की तारीख और बॉन्ड को भुनाने वाले राजनीतिक दलों के नाम के साथ बॉन्ड्स की तारीख और उसकी कीमत के साथ चुनाव आयोग को सौंप दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हलफनामे में यह नहीं बताया गया है कि प्रत्येक चुनावी बांड पर दर्ज 'यूनिक कोड' का इस्तेमाल संबंधित पार्टियों के नाम के साथ मैच किया जा सकता है, डेटा में शामिल है या नहीं.