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जेल में भूख हड़ताल के 8वें दिन बिगड़ी इंजीनियर राशिद की तबियत, RML अस्पताल में एडमिट

सांसद इंजीनियर राशिद, जो आठ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में भर्ती हैं, की स्थिति नाजुक बनी हुई है। उनकी हालत को लेकर परिवार और समर्थक चिंतित हैं। उनकी हिरासत पैरोल की याचिका पर उच्च न्यायालय का फैसला 5 फरवरी 2025 को होगा। राशिद आतंकवाद वित्तपोषण मामले का सामना कर रहे हैं।

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इंजीनियर राशिद
इंजीनियर राशिद

जम्मू कश्मीर के बारामूला सीट से सांसद इंजीनियर राशिद की तबियत बिगड़ गई है. संसद सत्र में शामिल होने की अपनी मांगों के बीच वह भूख हड़ताल पर चले गए थे. पिछले आठ दिनों से वह भूख हड़ताल पर थे, जब शुक्रवार को उनकी हालत खराब हो गई और अस्पताल में एडमिट कराना पड़ा. वह फिलहाल दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है.

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अवामी इत्तिहाद पार्टी (एआईपी) के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन्न नबी ने कहा, "इंजीनियर राशिद की हालत चिंताजनक है, लेकिन न्याय के लिए उनकी आवाज मजबूत बनी हुई है. हम मानवीय आधार पर तुरंत उनके इलाज की मांग करते हैं." उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की, ताकि न्याय की प्रतिष्ठा बनी रहे.

यह भी पढ़ें: सांसद इंजीनियर राशिद के संसद सत्र में शामिल होने का मामला, दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

एआईपी ने इंजीनियर राशिद के समर्थन में पब्लिक और राजनीतिक एकजुटता की मांग कर रही है और जस्टिस में अपने अटूट विश्वास को दोहराया है, साथ ही मानवीय व्यवहार और उनके मामले के जल्द समाधान की अपील की है.

सीएम उमर अब्दुल्ला ने जताई चिंता!

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इंजीनियर राशिद की हालत बिगड़ने पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने एक एक्स पोस्ट में कहा, "इंजीनियर राशिद को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की खबर सुनकर मैं बहुत चिंतित हूं. यह जरूरी है कि अधिकारी उचित देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि जब तक अदालत उनकी जमानत याचिका पर विचार-विमर्श करके कोई निर्णय नहीं ले लेती, तब तक उनकी हालत खराब न हो."

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इंजीनियर राशिद की याचिका पर फैसला सुरक्षित!

दिल्ली हाईकोर्ट में इंजीनियर राशिद ने संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए कस्टडी पैरोल की मांग की थी. हालांकि, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस याचिका का विरोध किया. एनआईए ने कहा कि राशिद के संसद में हिस्सा लेने के लिए कोई विशेष कारण नहीं हैं, और उन्होंने इस तरह की मांग करने का भी अधिकार नहीं है. कोर्ट ने उनकी इस मांग पर शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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