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नीति आयोग में NDA के दलों की एंट्री, बजट से ठीक पहले दिल्ली में चंद्रबाबू नायडू... समझें इन कदमों के सियासी मायने

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले केंद्रीय बजट आने की तारीख नजदीक आ गई है. इससे पहले सरकार ने सहयोगी दलों को नीति आयोग की टीम में जगह दी है. इसके मायने निकाले जा रहे हैं. इस बीच, एनडीए के दो प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने केंद्रीय बजट में आंध्र प्रदेश और बिहार को ज्यादा बजट दिए जाने पर जोर लगा रहे हैं. सरकारी सूत्र बताते हैं कि दोनों राज्यों का 'विशेष दर्जे' पर नहीं बल्कि 'विशेष पैकेज' पर फोकस है.

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आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने जुलाई के पहले हफ्ते में पीएम मोदी नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. (फाइल फोटो)
आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने जुलाई के पहले हफ्ते में पीएम मोदी नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. (फाइल फोटो)

नीति आयोग की नई टीम का गठन हो गया है. मोदी सरकार के दो कार्यकालों से इतर इस बार एनडीए के सहयोगी दलों की नीति आयोग में एंट्री हुई है. बीजेपी के दिग्गज नेताओं के अलावा सरकार में शामिल टीडीपी, जेडीएस, जेडीयू, हम, लोजपा (R) कोटे से मंत्रियों को नीति आयोग में जगह दी गई है. ये पुर्नगठन इसलिए अहम है, क्योंकि अगले हफ्ते केंद्रीय बजट आने वाला है. मोदी सरकार बजट को लेकर अर्थशास्त्रियों से लेकर राज्यों के प्रतिनिधियों तक से बातचीत और रायशुमारी कर रही है. एनडीए सरकार में अहम रोल निभाने वाले दो राज्यों की सरकारों को इस बार बजट से ज्यादा उम्मीदें जुड़ी हैं. 

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नीति आयोग में सहयोगी दलों को शामिल किए जाने पर जानकार कहते हैं कि मोदी 3.0 में पहली बार नीति आयोग में एनडीए के दलों की एंट्री हुई है. सत्ता में पार्टनर्स की भागीदारी का मतलब ये है कि पिछले दो कार्यकाल से अलग बीजेपी के अलावा बाकी दलों की भी नीति निर्धारण में भूमिका होगी. इसके लिए पहले समझाना होगा कि नीति आयोग क्या काम करता है और देश की नीतियों को बनाने में और दिशा निर्धारण में उसका कितना अहम योगदान है. दरअसल, वर्तमान लोकसभा में बीजेपी को अकेले दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. हालांकि, बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 293 सीटें जीती हैं. यह आंकड़ा बहुमत से काफी ज्यादा है. बीजेपी के 240 सांसदों के बाद टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सदस्य हैं. यही वजह है कि इस बार टीडीपी और जेडीयू दोनों ही दलों की सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है.

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नीति आयोग में कौन-कौन?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अध्यक्ष
सुमन के बेरी उपाध्यक्ष
वीके सारस्वत पूर्णकालिक सदस्य
प्रो. रमेश चंद्र पूर्णकालिक सदस्य
वीके पाल पूर्णकालिक सदस्य
अरविंद विरमानी पूर्णकालिक सदस्य
राजनाथ सिंह पदेन सदस्य
अमित शाह पदेन सदस्य
शिवराज सिंह चौहान पदेन सदस्य
निर्मला सीतारमण पदेन सदस्य
नितिन गडकरी विशेष आमंत्रित
जगत प्रकाश नड्डा विशेष आमंत्रित
एचडी कुमारस्वामी विशेष आमंत्रित
जीतनराम मांझी विशेष आमंत्रित
राजीव रंजन सिंह विशेष आमंत्रित
डॉ. वीरेंद्र कुमार विशेष आमंत्रित
डॉ. के राममोहन नायडू विशेष आमंत्रित
जुएल ओरांव विशेष आमंत्रित
अन्नपूर्णा देवी विशेष आमंत्रित
चिराग पासवान विशेष आमंत्रित
राव इंद्रजीत सिंह विशेष आमंत्रित

नीति आयोग की टीम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री को पदेन सदस्य बनाया गया है. पिछली बार नरेंद्र सिंह तोमर बतौर कृषि मंत्री पदेन सदस्य के रूप में नीति आयोग की टीम में शामिल थे. पिछली बार पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव विशेष आमंत्रित सदस्य थे. इस बार दोनों को शामिल नहीं किया गया है. उनकी जगह सहयोगी दलों के सभी वरिष्ठ मंत्रियों को जगह मिली है. यह मोदी 3.0 में सहयोगी दलों के बढ़ते महत्व को दिखाता है.

क्या काम करता है नीति आयोग?

नीति आयोग केंद्र सरकार का एक प्रमुख थिंक टैंक और नीति निर्माण संस्थान है. इसे 1 जनवरी 2015 को स्थापित किया गया था. यह योजना आयोग का उत्तराधिकारी है. नीति आयोग का मुख्य उद्देश्य भारत के सतत और समग्र विकास के लिए नीतियों और कार्यक्रमों का निर्माण करना है. नीति आयोग देश के विभिन्न क्षेत्रों और विषयों में नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सरकार की सहायता करता है. राज्यों के साथ मिलकर काम करता है और उन्हें विकास योजनाओं और कार्यक्रमों में सहायता प्रदान करता है. विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन करता है ताकि उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी और सफल नीतियों और प्रथाओं को भारत में लागू करने के लिए सुझाव देता है. नीति आयोग सरकार को सुधार और नवाचार के क्षेत्र में मार्गदर्शन और सुझाव प्रदान करता है. विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर अनुसंधान और विश्लेषण करता है और इसके आधार पर सरकार को सिफारिशें प्रदान करता है. नीति आयोग का मुख्य उद्देश्य देश के विकास में सभी प्रमुख हितधारकों को शामिल करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है.

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पॉलिसी मेकिंग में नीति आयोग का क्या रोल?

नीति आयोग का पॉलिसी मेकिंग में महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका है. विभिन्न क्षेत्रों में नई नीतियों और कार्यक्रमों का मसौदा तैयार करता है. इसमें आर्थिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय नीतियां शामिल होती हैं. दीर्घकालिक योजना और दृष्टिकोण तैयार करता है ताकि देश की विकास यात्रा को स्थिर और सतत रखा जा सके. इसमें 15 वर्ष का दृष्टिकोण दस्तावेज और 7 वर्ष का रणनीतिक योजना दस्तावेज शामिल है. राज्यों के साथ मिलकर राज्य-स्तरीय नीतियों और योजनाओं को तैयार करने में सहयोग करता है. यह संघीय ढांचे को मजबूत करता है और राज्यों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है. नीति आयोग क्षेत्रीय और अंतर-क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए विशेष नीतियां और कार्यक्रम तैयार करता है. नीति आयोग गहन अनुसंधान और विश्लेषण के जरिए नीतिगत निर्णयों को सूचित करता है. यह आर्थिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय पहलुओं का व्यापक एनालिसिस करता है. नीति आयोग शासन, आर्थिक नीतियों, और सेवा वितरण में सुधार और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सुझाव और सिफारिशें प्रदान करता है. विशेष लक्षित कार्यक्रमों और अभियानों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है, जैसे 'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' जिसका उद्देश्य पिछड़े जिलों का समग्र विकास है. 

सहयोगी दलों का नीति आयोग में क्या रोल?

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नीति आयोग में सहयोगी दलों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है. चूंकि नीति आयोग विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम करता है ताकि समावेशी और सतत विकास को प्राप्त किया जा सके. इन सहयोगी दलों में सरकार के विभिन्न विभाग, राज्य सरकारें, उद्योग जगत, शिक्षा संस्थान, थिंक टैंक, गैर-सरकारी संगठन (NGO) और नागरिक समाज शामिल होते हैं. सहयोगी दल नीति निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं. उनकी विशेषज्ञता और अनुभव नीति आयोग को प्रभावी और व्यावहारिक नीतियां तैयार करने में मदद करते हैं. सहयोगी दल विभिन्न मुद्दों और समस्याओं की पहचान करते हैं और उनके समाधान के लिए सुझाव प्रदान करते हैं. इससे नीति आयोग को जमीनी हकीकत समझने और उसके अनुसार नीतियां बनाने में मदद मिलती है.

फीडबैक और सलाह देते हैं सहयोगी दल

सहयोगी दल विभिन्न क्षेत्रों में डेटा और एनालिसिस भी मुहैया करवाते हैं, जिससे नीति आयोग को ठोस और सबूत आधारित नीतियां बनाने में मदद मिलती है. सहयोगी दल शासन, सेवा वितरण, और आर्थिक नीतियों में सुधार और नवाचार के लिए सुझाव और समर्थन प्रदान करते हैं. वे सुनिश्चित करते हैं कि योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हों. आयोग के कार्यक्रमों और नीतियों की समीक्षा और मूल्यांकन करते हैं, इससे नीतियों की प्रभावशीलता और सुधार की आवश्यकता की पहचान होती है. सहयोगी दल नीति आयोग को निरंतर फीडबैक और सलाह देते हैं, जिससे नीतियों को समय-समय पर अद्यतन और सुधारित किया जा सके. सहयोगी दल राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हैं और राज्य स्तरीय नीतियों और योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में सहायता करते हैं.

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आंध्र प्रदेश और बिहार को केंद्रीय बजट से क्या उम्मीद?

इधर, दशकों से विशेष राज्य का दर्जा मांगने वाले बिहार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री अब केंद्र सरकार से ज्यादा बजट दिए जाने पर जोर दे रहे हैं. दोनों राज्यों की सरकारों ने भी यह बात लगभग साफ कर दी है. तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मंगलवार शाम दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंच गए हैं. देर शाम उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और राज्य की वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए आगामी केंद्रीय बजट में पर्याप्त बजट आवंटन किए जाने का आग्रह किया है.

जुलाई में दूसरी बार दिल्ली दौरे पर नायडू

सूत्र बताते हैं कि शाह के आवास पर बैठक के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि 2014 में विभाजन (तेलंगाना अलग राज्य बना) के बाद आंध्र प्रदेश मुश्किलों का सामना कर रहा है. विकास के लिए धन की जरूरत है. नायडू बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात करेंगे और राज्य की वित्तीय जरूरतों पर चर्चा करेंगे. सूत्रों ने बताया कि नायडू की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी बैठक हो सकती है. करीब एक पखवाड़े में नायडू की यह दूसरी दिल्ली यात्रा है. इससे पहले 4 जुलाई को उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी और सात सूत्री विकास एजेंडा सामने रखा था, जिसमें राज्य के विभाजन के बाद आईं चुनौतियों और उनका समाधान करने का आग्रह किया था. नायडू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत सभी वरिष्ठ मंत्रियों से भी मुलाकात की थी.

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बिहार भी मांग रहा है विशेष पैकेज

माना जा रहा है कि चंद्रबाबू नायडू इस बार भी केंद्र सरकार के सामने ना सिर्फ स्पेशल स्टेटस या स्पेशल पैकेज पर बात करेंगे, बल्कि बजट से ठीक पहले राज्य के मुद्दों पर केंद्र से निगोसिएशन करेंगे. आंध्र प्रदेश की तरह बिहार सरकार भी ज्यादा बजट दिए जाने पर जोर दे रही है. सोमवार को जेडी (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और आगामी बजट में बिहार के लिए ज्यादा आवंटन की मांग की. झा ने कहा कि केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और बिहार के विकास और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई. सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त करते हैं. जेडीयू ने हाल ही में बिहार के लिए विशेष दर्जा या विशेष पैकेज की मांग करते हुए एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया है. 

जेडीयू के इस कदम के बाद टीडीपी भी एक्टिव मोड में देखी जा रही है. जेडीयू कहती है कि अगर हमें अगले पांच सालों में केंद्र से विशेष मदद मिलती है तो बिहार एक विकसित राज्य बन जाएगा. प्रधानमंत्री भी चाहते हैं कि बिहार एक विकसित राज्य बने. हमें विशेष मदद की बहुत उम्मीद है. इसी तरह, चंद्रबाबू नायडू भी आंध्र प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा वो 'अमरावती' नई राज्य राजधानी परियोजना और पोलावरम बांध परियोजना के लिए केंद्र से विशेष पैकेज मांग रहे हैं. 

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आंध्र प्रदेश की केंद्र से क्या डिमांड?

आंध्र प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की वित्तीय हालत चिंताजनक है. सार्वजनिक ऋण 2019-20 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 31.02 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 33.32 प्रतिशत हो गया है. यह पिछले पांच वर्षों में गिरावट का संकेत देता है. टीडीपी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय बजट में आंध्र प्रदेश में बीपीसीएल रिफाइनरी की घोषणा होने की संभावना है. बुंदेलखंड पैकेज की तर्ज पर यहां के पिछड़े इलाकों के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की उम्मीद भी की जा रही है. पिछले कुछ दिनों में नायडू ने दो और श्वेत पत्र जारी किए हैं. इसमें पिछली वाईएसआरसीपी सरकार में राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट और आंध्र के बिजली क्षेत्र की दयनीय स्थिति शामिल है. नायडू केंद्र से राज्य के वित्त को संभालने, औद्योगिक विकास के लिए प्रोत्साहन और पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत अतिरिक्त आवंटन की मांग उठा रहे हैं, इसमें सड़क, पुल, सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं जैसे जरूरी क्षेत्र हैं. उन्होंने दुगराजपट्टनम बंदरगाह के लिए भी सहायता मांगी है. आंध्र के सीएम ने सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ प्रभावी समन्वय के लिए एक सिस्टम तैयार करे, ताकि समस्याओं पर समय पर हस्तक्षेप किया जा सके.  

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