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J-K के इतिहास में सबसे बड़ा रोशनी जमीन घोटाला, कांग्रेस-पीडीपी और NC नेताओं के नाम

जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े जमीन घोटाले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. 25 हजार करोड़ के इस जमीन घोटाले में कई पार्टी के नेताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है. जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जा करने वाले नेताओं और नौकरशाहों की लिस्ट आजतक के पास मौजूद है.

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राज्य के कई नेताओं का नाम जमीन घोटाले में आया सामने (फाइल फोटो)
राज्य के कई नेताओं का नाम जमीन घोटाले में आया सामने (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जम्मू-कश्मीर में हुआ अब तक का सबसे बड़ा जमीन घोटाला
  • घोटाले में कांग्रेस-पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस के नेताओं के नाम
  • अब सभी लोगों से सरकारी जमीन वापस ली जाएगी

जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े जमीन घोटाले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. 25 हजार करोड़ के इस जमीन घोटाले में कई पार्टी के नेताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है. जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जा करने वाले नेताओं और नौकरशाहों की लिस्ट आजतक के पास मौजूद है.

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खास बात यह है कि इस घोटाले में पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब दरबो के भी शामिल होने की पुष्टि हुई है. इसके अलावा उनकी रिश्तेदार शहजादा बानो, एजाज हुसैन और इफ्तिकार दरबो के नाम भी सामने आए हैं. इसके अलावा कांग्रेस नेता केके अमला पर भी इस घोटाले में शामिल होने की पुष्टि हुई हैं. अब इन सभी से वह जमीन वापस ली जाएगी.

कांग्रेस नेता केके अमला की रिश्तेदार रचना अमला, वीणा अमला और फकीर चंद अमला के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं. इसके अलावा मुस्ताक अहमद चाया, मोहम्मद सफी पंडिट, मिस निघत पंडित, सैयद मुजफ्फर आगा, सैयद अखनून, एमवाई खान, अब्दुल मजीन वाणी, असलम गोनी, हरून चौधरी, सुज्जैद किचलू, तनवीर किचलू और कुछ अन्य लोग शामिल हैं.

1999 के पहले जो सरकारी जमीन थी उसे गरीब तमगे के लोगों को विधिपूर्वक जमीन उपलब्ध कराने के लिए रोशनी एक्ट बनाया गया था. इसका दूसरा उपयोग पॉवर प्रोजेक्ट के लिए पैसा इकट्ठा करना था ताकि उसे जम्मू-कश्मीर के पॉवर प्रोजेक्ट में लगाया जा सके. 2001 में इसे बनाया गया था. लेकिन इसमें समय-समय पर संशोधन किया जाता रहा. समय-समय पर राज्य में सरकारें बदलती रहीं और लगातार राजनेताओं को फायदा उठाने का मौका दिया जाता रहा.

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इस घोटाले में कई बिजनेसमैन और अफसरशाहों के नाम भी सामने आए हैं. राज्य के एलजी मनोज सिन्हा ने साफ-साफ कहा था कि सभी से जमीन वापस ली जाएगी. यही वजह है कि अब ये कदम उठाए जा रहे हैं. इन लोगों ने सरकारी जमीन को अपने नाम तो किया ही साथ ही साथ अपने रिश्तेदारों को भी दिलवाई. अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन लोगों से जमीन वापस ली जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि राज्य में होने वाले डीडीसी चुनावों के दौरान यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है.

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