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कारगिल वॉर के बीच PAK की कैद में कैसे फंस गए थे लेफ्टिनेंट नचिकेता? सहा बेइंतहा टॉर्चर, Exclusive इंटरव्यू

लेफ्टिनेंट नचिकेता ने आजतक को बताया कि जब कारगिल ऑपरेशन शुरू ही हुआ था, तब वह मिग-27 फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ा रहे थे. उनका स्क्वाड्रन 4 एयरक्राफ्ट का था, जिसे एक टारगेट को खत्म करने का ऑर्डर मिला था.

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लेफ्टिनेंट नचिकेता ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत की.
लेफ्टिनेंट नचिकेता ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत की.

कारगिल विजय दिवस के 25 साल पूरे होने पर देश वीर जवानों की शहादत को याद कर रहा है. इस बीच आजतक ने कारगिल वॉर के हीरो लेफ्टिनेंट नचिकेता से द्रास में ही एक्सक्लूसिव इंटरव्यू बातचीत की. आजतक ने उनसे जाना कि आखिर वह कैसे पाकिस्तान की कैद में फंस गए थे और कैद में रहने के दौरान उन्हें क्या-क्या सहना पड़ा.

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लेफ्टिनेंट नचिकेता ने आजतक को बताया कि जब कारगिल ऑपरेशन शुरू ही हुआ था, तब वह मिग-27 फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ा रहे थे. उनका स्क्वाड्रन 4 एयरक्राफ्ट का था, जिसे एक टारगेट को खत्म करने का ऑर्डर मिला था. उस समय उनके एयरक्राफ्ट की स्पीड करीब 900 किलोमीटर प्रतिघंटे के आसपास थी. इस स्पीड पर हम जब रॉकेट फायर किया जाता है तो बटन दबाने से लेकर फायर होने तक का पूरा प्रोग्राम एक मिनट में खत्म हो जाता है.

900 की स्पीड पर किया था अटैक

लेफ्टिनेंट नचिकेता ने बताया कि उन्हें डाइव पैटर्न अटैक करना था, जिसमें टारगेट के ऊपर डाइव की जाती है और उसके बाद 900 की स्पीड से जाकर रॉकेट फायर करते हैं. इसके बाद जहाज को घुमाकर वापस अपनी जगह पर आ जाते हैं. उन्होंने अपने लीडर के साथ मिलकर ऐसा ही किया. हमले के बाद लौटते समय हमारा जहाज ऊपर की तरफ चढ़ रहा था. इस दौरान ही उनका इंजन फ्लेम आउट हो गया. तब फाइटर जेट्स में आज के आधुनिक एयरक्राफ्ट की तरह दो इंजन नहीं हुआ करते थे.

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तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जोरदार तरीके से लेफ्टिनेंट नचीकेता का स्वागत किया था. (File Photo)

इजेक्ट होकर पहुंच गए PAK की कैद में

इंजन फ्लेम आउट होने के बाद उसे दोबारा स्टार्ट करने की एक प्रक्रिया होती है. लेफ्टिनेंट नचिकेता ने उस प्रक्रिया को पूरा किया. लेकिन हाई एल्टीट्यूड होने के कारण इंजन दोबारा स्टार्ट नहीं हुआ. तब उन्होंने देखा की उनका फाइटर जेट तेजी से पहाड़ियों के करीब पहुंच रहा है. उन्होंने तुरंत इजेक्ट करने के लिए कहा. अगर वे ऐसा नहीं करते तो जहाज पहाड़ में घुस सकता था और वह इजेक्ट हो गए.

पाकिस्तान ने हर तरह से किया प्रताड़ित

इजेक्शन के बाद उनका पैराशूट पाकिस्तान के चंगुल वाले इलाके में लैंड हुआ. वहां 4 से 5 पाकिस्तानी सैनिक आ गए. लेफ्टिनेंट नचिकेता के पास उस समय एक माइक्रो पिस्टल थी, जिसमें 8 फायरिंग राउंड थे. उनकी फायरिंग खत्म होने के बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें बंदी बना लिया. पाकिस्तान की कैद में उन्हें शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से काफी पीड़ा पहुंचाई गई. खूफिया जानकारी हासिल करने के लिए काफी टॉर्चर किया गया. लेकिन उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला. तब वह सोचने लगे थे कि इससे आसान तो मौत होती. 

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कैसे कैद से छूटे थे नचिकेता?

कारगिल युद्ध के दौरान नचिकेता भारतीय सेना के नौंवे स्क्वाड्रन में तैनात थे. यह स्क्वाड्रन युद्धग्रस्त बटालिक सेक्टर में तैनात था. करगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट नचिकेता को भारतीय वायु सेना की ओर से चलाए गए 'ऑपरेशन सफेद सागर' में MIG 27 उड़ाने का काम सौंपा गया था. उस वक्त उनकी उम्र 26 साल थी. 27 मई की तारीख थी. जब नचिकेता को 17 हजार फीट की ऊंचाई पर रॉकेट दागने की जिम्मेदारी दी गई थी. जहां उन्होंने 17 फीट की ऊंचाई से 80mm के रॉकेट दागे थे. वहीं इसी बीचे उनका विमान MIG 27 का इंजन खराब हो गया था. जिसके बाद उन्हें इजेक्ट करना पड़ा. वह पैराशूट की मदद से नीचे उतरे. जहां वह उतरे वह पाकिस्तानी सीमा थी. जहां उन्हें पाकिस्तानी आर्मी ने घेर लिया.

कुछ ही देर में पाकिस्तानी सेना ने उन्हें अपनी बंदी बना लिया था और रावलपिंडी की जेल में भेज दिया. जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें लगातार 3 से 4 दिनों तक शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से टॉर्चर किया था. पाकिस्तानी आर्मी उनसे भारतीय आर्मी की जानकारी निकालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान भारत से करगिल यु्द्ध के दौरान पहले ही हार चुका था. ऐसे में पाकिस्तान में कैद नचिकेता की खबरें इंटरनेशन मीडिया की सुर्खियां बन रही थी. जिसके बाद पाकिस्तान पर काफी दवाब बना और महज 8 दिन बाद पाकिस्तानी आर्मी ने नचिकेता को इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस को सौंपा.

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