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समान नागरिक संहिता: जानिए UCC का हिंदू उत्तराधिकार और टैक्स कानून पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

अगर UCC लागू होता है, तो UCC का सबसे सीधा प्रभाव हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को मिलने वाले कर लाभ और हिंदू परिवार उत्तराधिकार अधिनियम पर पड़ने की संभावना है. ये दोनों कॉन्सेप्ट हिंदू के अलावा किसी धर्म में मौजूद नहीं हैं. ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या UCC सुधारों में हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कॉन्सेप्ट को शामिल किया जाएगा? 

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समान नागरिक संहिता पर देशभर में छिड़ी बहस
समान नागरिक संहिता पर देशभर में छिड़ी बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) पर देशभर में बहस छिड़ गई है. UCC पर आम चर्चा अभी विवाह, तलाक, गोद लेने, विरासत, उत्तराधिकार जैसे कानूनों तक सीमित है. हालांकि, अगर UCC लागू होता है तो इससे राजस्व, टैक्स कानून पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है. 

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माना जा रहा है कि UCC का सबसे सीधा प्रभाव हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को मिलने वाले कर लाभ और हिंदू परिवार उत्तराधिकार अधिनियम पर पड़ने की संभावना है. ये दोनों कॉन्सेप्ट हिंदू के अलावा किसी धर्म में मौजूद नहीं हैं. ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या UCC सुधारों में हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कॉन्सेप्ट को शामिल किया जाएगा? 

क्या होता है हिंदू अविभाजित परिवार (HUF)? 

हिंदू कानून के मुताबिक,  HUF एक परिवार है जिसमें एक सामान्य पूर्वजों के वंशज होते हैं. इसमें उनके परिवार के सदस्य जैसे उनकी पत्नी और अविवाहित बेटियां शामिल हैं. हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) किसी संहिताबद्ध कानून की रचना नहीं है, बल्कि यह केवल एक अभ्यास से है जिसे आयकर अधिनियम 1961 के प्रावधानों के तहत एक अलग व्यक्ति के रूप में माना गया है. हिंदू के अलावा जैन, सिख और बौद्ध परिवार भी एचयूएफ बना सकते हैं.

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- एचयूएफ हिंदू संयुक्त परिवार प्रणाली से उत्पन्न हुआ, जिसमें पारिवारिक संपत्ति परिवार के मुखिया या कर्ता के पास होती है. ऐसे में एचयूएफ को कानूनी और कर इकाई के रूप में मान्यता देने के लिए एक अलग कर संरचना बनाई गई है, जो किसी अन्य धर्म में मौजूद नहीं है. HUF को आयकर में विशेष छूट भी मिलती है. 

HUF को क्या क्या मिलती है छूट ?

 - कानूनी दृष्टि से एचयूएफ एक अलग इकाई है. यहां, परिवार के अलग-अलग सदस्यों के पास पैन कार्ड होते हैं और HUF का अपना अलग पैन कार्ड होता है. एक एचयूएफ आय उत्पन्न करने के लिए अपना खुद का व्यवसाय चला सकता है. 

-इसमें शेयर और म्यूचुअल फंड में भी निवेश किया जा सकता है. और एक अलग इकाई होने के नाते, एचयूएफ को 2.5 लाख रुपये की मूल कर छूट प्राप्त है, जो परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत आय से अलग है. इसके अलावा, एचयूएफ अपने प्रत्येक सदस्य के लिए भुगतान किए गए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर अतिरिक्त टैक्स छूट का दावा कर सकता है.

- HUF धारा 80C, 80D, 80G आदि के तहत सभी कर लाभों के लिए भी योग्य है, और पूंजीगत लाभ के संबंध में धारा 54 और 54F के तहत छूट का आनंद लेता है. 

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जब HUF को बंद करने की सिफारिश की गई

- 1936 में, आयकर जांच रिपोर्ट में HUF को विशेष छूट दिए जाने पर भारी राजस्व हानि की चेतावनी दी गई थी. 

- 2018 में लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में 1971 की प्रत्यक्ष कर जांच समिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि HUF का इस्तेमाल कर से बचने के लिए किया गया है, और सुझाव दिया गया है कि एचयूएफ को समाप्त कर दिया जाना चाहिए. मई 2005 में केंद्र सरकार ने HUF के नाम पर पीपीएफ खाता खोलने पर प्रतिबंध लगा दिया था. 

अगर UCC के तहत HUF को खत्म किया जाता है, तो करोड़ों हिंदू परिवारों, खासकर व्यापारिक परिवारों पर असर पड़ने की संभावना है, इसलिए यह देखना बाकी है कि क्या सरकार एचयूएफ को दी जाने वाली कर, बीमा और निवेश छूट को भेदभावपूर्ण मानकर समाप्त कर देगी.  

सहदायिकता और उत्तराधिकार कानून पर भी पड़ेगा प्रभाव

हिंदू उत्तराधिकार प्रणाली में सहदायिक का अर्थ है, पैतृक संपत्ति का हिस्सा प्राप्त करने का जन्म से निहित अधिकार.  इसका मतलब यह है कि अगर किसी हिंदू पुरुष की मृत्यु हो जाती है, तो पैतृक या स्वयं अर्जित संपत्ति में उनका हिस्सा सहदायिकों- पत्नी, बच्चों और पारिवारिक संपत्ति के मामले में विधवा मां के बीच समान रूप से विभाजित हो जाता है

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- 2005 तक  केवल बेटों को जन्म से विरासत के अधिकार के साथ सहदायिक माना जाता था. लेकिन 2005 में हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम द्वारा बेटियों को सहदायिक का सदस्य बनाया गया है. 
 
- विनीता शर्मा मामले में 2020 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने के लिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में संशोधन पूर्वव्यापी होगा. पीठ ने स्पष्ट किया कि बेटियों को धारा 6 द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है. बेटों की तरह बेटियों को भी कृषि संपत्ति सहित संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति प्राप्त करने का जन्म से समान अधिकार है. 

- जनवरी 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल गौंडर (मृत) बनाम पोन्नुस्वामी में अपने फैसले के माध्यम से कहा कि बिना वसीयत के मरने वाले हिंदू पुरुष की स्व-अर्जित संपत्ति विरासत द्वारा हस्तांतरित होगी, न कि उत्तराधिकार द्वारा. इसके अलावा, बेटी ऐसी संपत्ति के साथ-साथ सहदायिक या पारिवारिक संपत्ति के विभाजन के माध्यम से प्राप्त संपत्ति को पाने की हकदार होगी.

- यह भी देखा गया कि, यदि कोई महिला बिना वसीयत किए मर जाती है, तो उसके पिता से प्राप्त पैतृक संपत्ति उसके पिता के उत्तराधिकारियों को दी जाएगी और उसके पति की ओर से प्राप्त संपत्ति उसके पति के उत्तराधिकारी को सौंपी जाएगी. 

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हिंदू कानून में संशोधन के तहत पैतृक संपत्ति के संबंध में पुरुषों और महिलाओं के लिए समान विरासत की बात कही गई है. जबकि अन्य धर्मों में उत्तराधिकार कानून अलग अलग हैं. जैसे मुस्लिम कानून स्पष्ट रूप से संहिताबद्ध नहीं है. ऐसे में तलाकशुदा पत्नी के बच्चों, बेटियों और विधवाओं को उनके हिस्से से वंचित किया जा सकता है. लॉ कमीशन की रिपोर्ट में भी मुस्लिम कानून को संहिताबद्ध करने की सिफारिश की गई है कि पत्नियों/विधवाओं और बच्चों को उत्तराधिकारी के रूप में संरक्षित किया जा सके. 

- ईसाइयों के लिए, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 ईसाइयों के लिए हिंदू कानून के समान विरासत की समान अवधारणाओं को लागू करता है. हालांकि, ये तब लागू होता है जब प्रथागत कानून का पालन न हो. 

 

 

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