कोरोना संकट की दूसरी लहर भले फिलहाल शांत होती दिख रही है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं हैं. एक्सपर्ट, केंद्र और राज्य सरकारें अभी भी अलर्ट मोड पर हैं. लोगों को भी ऐसे ही रहना भी होगा वरना कोरोना की संभावित तीसरी लहर का आना तय माना जा रहा है. कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी, आने पर यह कितनी तबाही मचाएगी इसको लेकर अभी अंदाजे ही लगाए जा रहे हैं. लेकिन इस बीच कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट चिंता की सबसे बड़ी वजह है.
डेल्टा प्लस वैरिएंट फिलहाल तीन राज्यों में दस्तक दे चुका है. मध्य प्रदेश (भोपाल), महाराष्ट्र और केरल में कुल मिलाकर कोराना डेल्टा प्लस वैरिएंट के 25 मरीज मिल चुके हैं. अब एक्सपर्ट ने भी चिंता जता दी है कि अगर तीसरी लहर आई तो इसके पीछे डेल्टा प्लस वैरिएंट प्रमुख रूप से शामिल होगा.
सबसे पहले समझिए ये वैरिएंट क्या है. आसान शब्दों में जब वायरस अलग-अलग वजहों से रूप बदलकर और खतरनाक या जानलेवा हो जाता है तो उसे नया वैरिएंट कहते हैं. कोरोना भी बाकी कई वायरसों की तरह रूप बदलकर नए-नए वैरिएंट में सामने आ रहा है.
WHO ने किया कोरोना वैरिएंट्स का 'नामकरण'
पहले जिस देश से कोरोना का वह वैरिएंट सबसे पहले सामने आया था, उसके नाम से उसे जाना जाता था. लेकिन फिर WHO ने इनको नए नाम दिए. अब कोरोना के वैरिएंट्स को डेल्टा, कप्पा, अल्फा, बीटा, गामा आदि नामों से जाना जाता है.
क्या है कोरोना डेल्टा प्लस वैरिएंट
अब बात करते हैं डेल्टा प्लस वैरिएंट की. यह डेल्टा वैरिएंट के रूप में हुए बदलावों की वजह से बना है. डेल्टा वैरिएंट यानी B.1.617.2 जो कि पहले भारत में मिला था. फिर बाद के महीनों में यह दूसरे कई देशों में भी पाया गया. कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट में इसके स्पाइक प्रोटीन में K417N बदलाव हुआ है. डेल्टा प्लस वैरिएंट को पहले B.1.617.2.1 कहा जाता था. यह सबसे पहली बार यूरोप में मिला था. स्पाइक प्रोटीन कोरोना वायरस का जरूरी हिस्सा है. इसकी वजह से ही वायरस मानव शरीर में घुसकर इंफेक्शन करता है.
कितना खतरनाक है कोरोना डेल्टा प्लस वैरिएंट
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर, जिसने भारत में तबाही मचाई, उसके आने के पीछे डेल्टा वैरिएंट प्रमुख रूप से शामिल था. अब खतरा डेल्टा वैरिएंट के विकसित रूप यानी डेल्ट प्लस वैरिएंट से है. कोरोना की संभावित तीसरी लहर के पीछे यह वैरिएंट प्रमुख रूप से शामिल हो सकता है, इसकी प्रमुख वजह एक्सपर्ट्स द्वारा हाल में जताई गई चिंता है.
भारत के टॉप विषाणु विज्ञानी और INSACOG के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहिद जमील ने इसपर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट वैक्सीन और इम्युनिटी दोनों को चकमा दे सकता है. मतलब वैक्सीन, जिसे अबतक कोरोना से लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा था, अगर डेल्ट प्लस वैरिएंट उसे भी भेदकर अपनी चपेट में ले सकने की ताकत रखता है, तो स्थिति गंभीर होने की आशंका है.
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डेल्टा प्लस वैरिएंट पर वैक्सीन के संभावित रूप से असर ना करने की आशंका क्यों है. इसके वैज्ञानिक पक्ष पर भी जमील ने बात की है. वह बोले कि डेल्टा प्लस में सिर्फ ओरिजनल डेल्टा वैरिएंट की ही विशेषताएं नहीं हैं. बल्कि इसमें K417N का म्यूटेशन भी है. जो कि साउथ अफ्रीका में मिले बीटा वैरिएंट में भी मिला था. यह तथ्य भी है कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खेप वापस कर दी थी. उनका कहना था कि यह वैक्सीन वहां वायरस के वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं थी.
ऐसी खबरें भी आई हैं कि कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट पर इलाज में इस्तेमाल हो रहीं मौजूदा दवाएं असर नहीं कर रही हैं.
महाराष्ट्र, जहां कोरोना की पहली और दूसरी लहर का सबसे ज्यादा असर रहा है उसने तो तैयारी भी शुरू कर दी हैं. महाराष्ट्र मानकर चल रहा है कि तीसरी लहर डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह से ही आएगी, ऐसे में सीएम उद्धव ठाकरे ने अधिकारियों को अलर्ट मोड पर कर दिया है.