कोरोना वायरस को हराने की तैयारी में लगे देश को जल्द नया वैक्सीन रूपी 'हथियार' मिल सकता है. इस वैक्सीन से देश के बच्चे भी कोरोना से सुरक्षित हो जाएंगे. सोमवार को मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय कंपनी जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D को इसी हफ्ते आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल सकती है. देश में 12-18 साल के बच्चों को लगाए जाने वाली यह पहली वैक्सीन होगी. इसे डेल्टा वैरिएंट पर भी असरदार बताया जाता है.
भारतीय कंपनी जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D कई मायनों में खास है. इसकी एक या दो नहीं बल्कि तीन खुराक लेनी होंगी. साथ ही साथ यह नीडललेस है, मतलब इसे सुई से नहीं लगाया जाता. इसकी वजह से साइड इफेक्ट के खतरे भी कम रहते हैं. जायडस कैडिला ने 1 जुलाई को भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मांगी थी. जायडस का कोरोना टीका 66 फीसदी प्रभावी बताया जाता है.
फार्माजेट तकनीक से लगाई जाती है जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन
जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन पहली पालस्मिड DNA वैक्सीन है. इसके साथ-साथ इसे बिना सुई की मदद से फार्माजेट तकनीक (PharmaJet needle free applicator) से लगाया जाएगा, जिससे साइड इफेक्ट के खतरे कम होते हैं. बिना सुई वाले इंजेक्शन में दवा भरी जाती है, फिर उसे एक मशीन में लगाकर बांह पर लगाते हैं. मशीन पर लगे बटन को क्लिक करने से टीका की दवा अंदर शरीर में पहुंच जाती है.
ZyCoV-D कोरोना वैक्सीन को 12 से 18 साल के बच्चों के लिए सुरक्षित पाया गया है. पहले जानकारी सामने आई थी कि जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D का तीसरे चरण का ट्रायल हो चुका है. इसमें 28 हजार प्रतिभागियों से हिस्सा लिया था. भारत में किसी वैक्सीन का यह अब तक का सबसे बड़ा ट्रायल था, जिसके नतीजे भी संतोषजनक आए. जायडस कैडिला पहले ही सालाना 10-12 करोड़ कोरोना वैक्सीन खुराक बनाने की बात कह चुकी है.
जायडस कैडिला की वैक्सीन के साथ क्लोड स्टोरेज का झंझट नहीं
ZyCoV-D के साथ यह झंझट भी नहीं है कि इसे स्टोर करने के लिए बेहद कम तापमान चाहिए. इसकी थर्मोस्टेबिलिटी अच्छी बताई जाती है. मतलब क्लोट चेन, स्टोरेज की टेंशन नहीं रहेगी, जिससे वैक्सीन की बर्बादी भी कम होगी. ZyCoV-D Plasmid आधारित DNA वैक्सीन है. इस वजह से ही इसे 2-8 डिग्री के तापमान में रखा जा सकता है.