वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है. यहीं पर उसके अन्य साथी भी बंद हैं. गुरुवार को यहां अमृतपाल और अन्य आरोपियों से मिलने इनके परिवार के 10 लोग पहुंचे. दरअसल, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गिरफ्तार किए गए लोगों के परिवार के एक-एक सदस्य को उनसे मिलने की अनुमति दी थी.
जेल में बंद आरोपियों से मिलने गए 10 लोगों में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के एक कार्यकारी सदस्य और कानूनी सलाहकार भगवंत सिंह सियालका व एक अन्य वकील सिमरनजीत सिंह भी शामिल थे.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया है, उन सभी के खिलाफ समान आरोप लगाए गए हैं. उनके मामलों से जुड़ा अनुबंध भी एक जैसा है और यह 'असंभव' लगता है.
उन्होंने कहा, "गिरफ्तार किए गए लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. यह निश्चित रूप से ये एक साजिश है, क्योंकि उन पर एनएसए के तहत मामला दर्ज करने का कोई कारण नहीं है. अमृतपाल नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान चला रहा था और सिख धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करने में भी लगा हुआ था."
सिंह ने कहा, "हमने हाईकोर्ट में सभी के खिलाफ एनएसए के आरोपों को रद्द करने की अपील की है. मामले की सुनवाई की अगली तारीख 1 मई तय की गई है."
डिब्रूगढ़ जेल में कैसी है सिक्योरिटी?
असम में 6 सेंट्रल जेल हैं, उनमें से एक डिब्रूगढ़ में है. इसे बेहद सिक्योर जेल माना जाता है. खालिस्तानी समर्थकों के यहां होने से जेल और उसके आसपास सिक्योरिटी और भी टाइट कर दी गई है. एक सीनियर अफसर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जेल के कंपाउंड के चारों तरफ असम पुलिस के ब्लैक कैट कमांडो और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं. अमृतपाल को बेहद टाइट सिक्योरिटी में स्पेशल सेल में रखा गया है. वहां पंजाब पुलिस के साथ-साथ असम पुलिस के जवान भी मौजूद हैं. 19 मार्च को यहां वारिस पंजाब दे संगठन से जुड़े चार लोगों को लाया गया था. तब से ही डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल के अंदर और बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है.
कौन है अमृतपाल?
अमृतपाल 'वारिस पंजाब दे'संगठन का चीफ है. वह अलग देश खालिस्तान की मांग कर रहा है. वह कुछ दिन पहले ही दुबई से लौटा है. वारिस पंजाब दे संगठन को पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू ने बनाया था. दीप सिद्धू की मौत के बाद अमृतपाल ने इसपर कब्जा कर लिया. उसने भारत आकर संगठन में लोगों को जोड़ना शुरू किया. अमृतपाल का ISI लिंक बताया जा रहा है.
अमृतपाल पर क्यों हो रही कार्रवाई?
अमृतपाल सबसे पहले 23 फरवरी को चर्चा में आया था. उसने अजनाला में अपने करीबी को छुड़ाने के लिए हजारों समर्थकों के साथ थाने पर हमला बोल दिया था. इस हमले में 6 पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे. इसके बाद उसने कई टीवी चैनलों में दिए इंटरव्यू में अलग खालिस्तान की मांग की थी. इतना ही नहीं अमृतपाल ने देश के गृह मंत्री अमित शाह को भी धमकी दी थी.