कृषि कानून (Farm Laws) के खिलाफ जारी किसानों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है. किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि 22 जुलाई को संसद (Parliament) तक मार्च किया जाएगा. इसको लेकर बुधवार को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने आजतक से बात की. राकेश टिकैत ने साफ कहा कि अगर पुलिस परमिशन नहीं देती है, तो कोई बात नहीं हम ज़रूर जाएंगे चाहे हमें गिरफ्तार कर लें.
राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन तो पूरी दुनिया में होते ही हैं, दिल्ली पुलिस जैसे चाहेगी हम उस शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालेंगे. राकेश टिकैत ने कहा कि ये लोग नहीं चाहते हैं कि हम मार्च निकालें, क्योंकि अभी सदन चल रहा है. लेकिन जब कृषि कानून संसद में ही बना है, तो हम विरोध करने रामलीला मैदान या किसी और जगह क्यों जाएं.
'जंतर-मंतर के अलावा कोई और जगह नहीं है प्रदर्शन के लिए मंजूर। पुलिस नहीं देगी अनुमति फिर भी जाएंगे, वह कर लें गिरफ्तार' - संसद घेराव से 1 दिन पहले @RakeshTikaitBKU की दो टूक! देखें @KumarKunalmedia के साथ बातचीत#ReporterDiary #FarmersProtest | https://t.co/mf6keLW7vJ pic.twitter.com/ZeMSgf3KXY
— AajTak (@aajtak) July 21, 2021
‘कोई और तरीका हो तो बताएं’
किसान नेता राकेश टिकैत बोले कि क्या हम संसद पहुंचकर सत्ता परिवर्तन कर देंगे? ये सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन है, ये सांकेतिक होता है. संसद के पास हजारों लोग घूमते हैं, हम तो बताकर जा रहे हैं. हम सिर्फ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताना चाहते हैं, अगर इससे आसान कोई तरीका हो तो हमें बता दीजिए.
26 जनवरी की हिंसा को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को आखिरकार ऐसा क्या हुआ था? हमने तो इनसे रिंग रोड मांगी थी, लेकिन उन्होंने तब अनुमति नहीं दी. यही लाल किले पर ले गए थे उन्होंने ही रास्ता बंद किया था और गांव के लोगों को रास्ते का पता नहीं था.
‘शांतिपूर्ण होगा हमारा प्रदर्शन’
गुरुवार के प्रदर्शन को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि हम संसद में शांतिपूर्वक तरीके से जाएंगे. पार्लियामेंट थाने के बाहर अपना मंच लगाएंगे और जब पार्लियामेंट खत्म हो जाएगा तो वापस आ जाएंगे, उसका तो समय भी निश्चित है.
गौरतलब है कि पिछले करीब एक साल से कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है. दिल्ली के टिकरी, सिंघु और गीजापुर बॉर्डर पर हजारों किसान डटे हुए हैं. किसानों और सरकार के बीच कई दौर की बात हुई है, लेकिन लंबे वक्त से वो भी बंद है. किसान तीनों कानून वापस करवाना चाहते हैं, लेकिन सरकार पर इसपर राज़ी नहीं है.