न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी (MSP) पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से उम्मीद लगाए बैठी सरकार को निराशा हाथ लगी है. केंद्र सरकार ने दलहन फसलों को आधार बनाकर एमएसपी गारंटी का मुद्दा सुलझाने की उम्मीद लगा रखी थी. लेकिन किसानों के सामने केंद्र की 'दाल' नहीं गली है. किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया है और कहा है कि उन्हें फूल MSP गारंटी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है.
इससे पहले सोमवार को, संयुक्त किसान मोर्चा, जिसने 2020-21 के किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया था, ने सरकार के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह एमएसपी के लिए किसानों की मांग को "भटकाना और कमजोर करना" चाहती है. SKM ने कहा कि उस फॉर्मूले से कम कुछ नहीं मानेंगे. जिसकी पैरवी स्वामिनाथन आयोग ने की है. इस फॉर्मूले को 'सी -2 प्लस 50 प्रतिशत का फॉर्मूला कहा जाता है.
किसान मजदूर मोर्चा के साथ 'दिल्ली चलो' मार्च का नेतृत्व कर रहे एसकेएम (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, "हमारे दो मंचों पर चर्चा के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र का प्रस्ताव किसानों के हित में नहीं है और हम इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं.”
अब हम आपको बताते हैं कि C2 प्लस 50 % का फॉर्मूला क्या है?
दरअसल स्वामिनाथन आयोग ने किसानों की उपज का मूल्य तय करने के लिए एक फॉर्मूला निकाला है. जिसमें फसल की लागत, मजदूरी, खाद-बीज का मूल्य, बीमा जैसे कई फैक्टर शामिल हैं.
अभी सरकार की ओर से MSP तय करने का काम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices -CACP) की ओर से किया जाता है. CACP इसके लिए तीन फॉर्मूले का इस्तेमाल करता है. इसे A2, A2+FL और C2 कहा जाता है.
A2, A2+FL और C2 का गणित
ए2 में किसी खास फसल में लगी किसान की लागत है. मतलब कि बीज, खाद, कीटनाशनक, मजदूरों की मजदूरी, जमीन पर लगने वाला किराया और मशीनरी और फ्यूल की लागत. लेकिन इतना तो किसान का लागत है. इसमें उसका गुजारा कैसे होगा? इसमें तो उसके खुद के मेहनत का मूल्य तो शामिल है ही नहीं.
इसलिए इस ए2 लेवल को आगे ले जाया गया और इसमें कृषि कार्य के दौरान किसान स्वयं और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा मुफ्त में किए गए काम का मूल्य भी शामिल होता है.इस तरह जो रकम बनती है उसे A2+FL कहते हैं.
लेकिन किसान इससे भी संतुष्ट नहीं हैं. किसानों का तर्क है कि इस रकम में उनकी अपनी मेहनत तो शामिल है लेकिन जमीन पर लगने वाला किराया और खेती के लिए मशीनों को खरीदने पर लगने वाला ब्याज नहीं शामिल है. इसलिए इसे आगे बढ़ाया जाए. इसके बाद तय किया गया कि अगर किसान खुद की जमीन पर खेती कर रहा है तो उस जमीन का अनुमानित किराया और खेती के दौरान लगने वाले फिक्स्ड कैपिटल पर दिया जाने वाला ब्याज भी A2 में शामिल किया जाए. इस तरह जो रकम बनती है उसे C2 कहते हैं.
C2 प्लस 50 परसेंट का समीकरण
किसानों का तर्क है कि देश में कृषि बाजार की स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से कई बार उनकी लागत भी नहीं निकल पाती है. इसलिए किसानों का फसलों का उचित मूल्य मिल सके इसलिए 18 नवंबर 2004 को केंद्र सरकार ने एक आयोग का गठन किया था. इसे स्वामीनाथन आयोग कहा जाता है.
इस आयोग ने कहा कि किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 'C2+50% फॉर्मूले' पर तय किया जाए. मतलब कि किसान को सी2 तो मिले ही साथ ही उस पर 50 फीसदी अतिरिक्त राशि मिले जो कि उसका मुनाफा होगा.
क्या था सरकार का ऑफर
अब एक बार फिर लौटते हैं सरकार के ऑफर पर. सोमवार की रात को जब सरकार के तीन मंत्री किसानों के पास बात करने गए तो उन्होंने किसानों को कुछ चुनिंदा फसलों को MSP पर खरीदने की गारंटी दे दी. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने किसानों के साथ वार्ता के बाद कहा था कि जो किसान अरहर दाल, मसूर दाल, उड़द दाल पैदा करते हैं या फिर कॉटन उपजाते, या फिर मक्का पैदा करते हैं उनकी सभी उपज को सरकार गारंटीड MSP पर खरीदने को तैयार है.
पीयूष गोयल ने कहा, "एनसीसीएफ (राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ) और नाफेड (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ) जैसी सहकारी समितियां उन किसानों के साथ अनुबंध करेंगी जो 'अरहर दाल', 'उड़द दाल', 'मसूर दाल' या मक्का उगाते हैं. अगले पांच वर्षों तक उनकी फसल एमएसपी पर खरीदी जाएगी.''
किसान मान जाते तो कम होता दाल आयात का बिल
दरअसल सरकार को प्रतिवर्ष दालों के आयात में भारी भरकम रुपया खर्च करना होता है. सरकार की मंशा थी कि अगर किसान इस प्रस्ताव पर राजी होते हैं तो हर साल दाल के आयात पर खर्च होने वाला लाखों करोड़ डॉलर किसानों को जाता और उन्हें MSP भी मिल जाती. इसके अलावा लगातार धान की फसल की वजह से पंजाब में खराब हो चुके जलस्तर को भी सुधारने में मदद मिलती क्योंकि इन दलहन फसलों में चावल-गेहूं की अपेक्षा कम पानी की जरूरत होती. कृषि विज्ञान में इसे फसल चक्रीकरण कहा जाता है.
कपास की फसल पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और पंजाब एक बार फिर कपास की खेती करेगा. उन्होंने कहा कि जो भी किसान कपास की किसानी पुनर्जीवित करेगा उनके साथ कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया भी 5 वर्ष का कांट्रैक्ट करेगा और उसकी फसल को एमएसपी पर खरीदेगा.
दुनिया की कुल खपत का आधा दाल अकेले खाते हैं भारतीय
बता दें कि एक डाटा के अनुसार भारत दुनिया दाल का जो कुल खपत है उसका लगभग आधा अकेले ही उपभोग करता है. जनवरी 2024 में जारी एक आंकड़े के अनुसार भारत ने कैलेंडर इयर 2023 में 29 लाख टन मसूर, अरहर और उड़ल दाल का आयात किया है. ये आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी ज्यादा है. माना जाता है कि लगातार दो साल से दलहन की पैदावार में गिरावट की वजह से आयात बढ़ रहा है.
ऑफर खारिज करने के पीछे किसानों ने क्या दिया तर्क
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि केंद्र के इस प्रस्ताव में कुछ नहीं है और इसे हम खारिज करते हैं. डल्लेवाल ने कहा कि चौथे दौर की वार्ता के समय केंद्रीय मंत्री ने किसानों से कहा था कि अगर सरकार दल पर एमएसपी देती है तो सरकार के खजाने पर 1.50 लाख करोड़ का खर्च आएगा.
इसके बाद उन्होंने कृषि एक्सपर्ट के आकलनों के आधार पर कहा कि अगर सभी फसलों पर MSP दी जाती है तो 1.75 लाख करोड़ का खर्च आएगा.
डल्लेवाल ने कहा कि सरकार 1.75 लाख करोड़ का पॉम ऑयल खरीदती है. कई लोग इस तेल की वजह से बीमार हो रहे हैं. इसके बावजूद इसका आयात किया जा रहा है. अगर इस 1.75 लाख करोड़ का इस्तेमाल MSP की गारंटी देकर दूसरे फसलों को पैदा करने में किया जाए तो इससे सरकार पर कोई भार नहीं पड़ेगा.
फायदा तो चंद किसानों को मिलेगा
जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सरकार के ऑफर की खामियां गिनाते हुए कहा कि सरकार ने जिन पांच फसलों पर एमएसपी की गारंटी देने का वादा किया है उसका फायदा उन्हीं किसानों को मिलेगा जो क्रॉप डाइवर्सीफिकेशन (फसल चक्रीकरण) को अपनाते हैं. यानी कि जो किसान धान-गेंहू से दाल उपजाने की ओर शिफ्ट होते हैं उन्हीं को ये फायदा मिल पाएगा. इसका फायदा मूंग उपजाने वाले किसानों को नहीं मिलेगा.
डल्लेवाल ने कहा कि सरकार के ऑफर से किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला है. उन्होंने कहा कि किसानों को सभी 23 फसलों पर एमएसपी की गारंटी चाहिए.
सरकार की नीयत में खोट?
शंभू बॉर्डर किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढ़ेर ने कहा कि हमने प्रस्ताव को रद्द कर दिया है. मीटिंग में सरकार ने चाल चलने का काम किया है. सरकार की नीयत में खोट है. नीयत साफ होती तो ऐसा न करते. सरकार एमएसपी गारंटी कानून 23 फसलों पर बनाकर दे. और जो फसले बचेंगी उसपर स्टडी करके उसपर भी दे.