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'रेल रोको' ने रोकी कोयले की सप्लाई! केंद्र ने कहा- अपना ही नुकसान कर रहे किसान

केंद्र सरकार का दावा है कि सोमवार को किसान संगठनों के रोल रोको आंदोलन ने देश में कोयले की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. सरकार के मुताबिक, उस दिन 2 लाख टन कोयला ले जा रहीं 46 मालगाड़ियों को रोका गया.

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लखीमपुर हिंसा मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर किसानों ने 18 अक्टूबर को रेल रोको आंदोलन चलाया था. (फोटो-PTI)
लखीमपुर हिंसा मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर किसानों ने 18 अक्टूबर को रेल रोको आंदोलन चलाया था. (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 18 अक्टूबर को था रेल रोको आंदोलन
  • आंदोलन से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित
  • 46 मालगाड़ियों को रोके जाने का दावा

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि सोमवार को किसान संगठनों के 'रेल रोको' ने न सिर्फ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि इसने कोयले की आपूर्ति को भी प्रभावित किया. सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सोमवार को कोयला ले जा रहे कम से कम 46 रेलवे ट्रैक फंसे रहे, क्योंकि उस दिन किसानों ने देशभर में रेल रोको आंदोलन चलाया था. कोयले से लदी ये गाड़ियां उन राज्यों में पहुंचनी थी जहां पावर प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं.

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पिछले हफ्ते कोयले की कमी और बिजली संकट के लिए आलोचना का सामना कर रही केंद्र सरकार ने कहा था कि राज्य सरकारें बिजली की बढ़ती मांग का अनुमान लगाने में नाकाम रही हैं. 

कोयला मंत्रालय से जुड़े एक सूत्र ने बताया, 'रेल रोको आंदोलन ने पंजाब और राजस्थान में मालगाड़ियों की आवाजाही को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. ये ऐसे वक्त हुआ है जब केंद्र सरकार की पूरी मशीनरी देश में बढ़ती कोयले की मांग को पूरा करने के लिए काम कर रही है.'

एक और अधिकारी ने बताया कि आंदोलन कर रहे लोग किसान नहीं, बल्कि दलाल थे. उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी पटरियों पर बैठ गए, जिससे कोयला ले जा रही मालगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई. इस कारण पावर स्टेशनों में कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ा. 

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2 लाख टन कोयला ले जा रहीं गाड़ियों की आवाजाही प्रभावित

जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि करीब 2 लाख टन कोयला ले जा रही 46 गाड़ियों को प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया. बिजली मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 2 लाख मीट्रिक टन कोयला 322 मिलियन यूनिट बिजली पैदा करने में इस्तेमाल किया जा सकता था. अनुमान के मुताबिक, पंजाब में हर दिन 160 मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती है और इतना कोयला पंजाब की दो दिन की जरूरत को पूरा कर सकता था.

रेल मंत्रालय का कहना है कि इस समय मालगाड़ी सबसे कीमती है. मालगाड़ी को जल्द से जल्द वहां लौटना होता है जहां कोयला लोड किया जाता है ताकि आपूर्ति को बढ़ाया जा सके. वहीं, कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि क्योंकि आवाजाही प्रभावित हो गई थी, इसलिए पहले यात्री ट्रेनों को रवाना किया गया, जिस कारण मालगाड़ियों को और ज्यादा इंतजार करना पड़ा.

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, 'ये विडंबना है कि प्रदर्शनकारी किसानों के फायदे के लिए लड़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उनके इस काम से किसानों और देश के हितों को नुकसान पहुंच रहा है, क्योंकि इस वक्त सिंचाई के लिए बिजली की ज्यादा जरूरत है.'

मालगाड़ियों में जो कोयला फंसा था, वो कोल इंडिया लिमिटेड की खदानों से आया था, जो देश की 80 फीसदी जरूरत को पूरा करती है. बताया जा रहा है कि कोयले की कमी दूर करने के लिए कोल इंडिया पिछले कुछ हफ्तों से ओवर टाइम कर रही है. बिजली की मांग को पूरा करने के लिए थर्मल पावर प्लांट को हर दिन औसतन 1.90 मिलियन टन कोयले की जरूरत होती है और अभी उन्हें मांग से ज्यादा 2 मिलियन टन कोयले की सप्लाई की जा रही है.

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केंद्र के दावे पर सियासत भी शुरू

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार को 6 घंटे के रेल रोको अभियान का आह्वान किया था. इससे देश में 130 जगहों पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई थी और 50 से ज्यादा ट्रेनों के संचालन में रुकावट आई थी, जबकि कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ गया था.

केंद्र सरकार दावा कर रही है कि कुछ राज्य सरकारों ने राजनीतिक फायदे के लिए किसानों के रेल रोको आंदोलन को मौन समर्थन देने की कोशिश की लेकिन इससे किसानों को ही नुकसान पहुंचा. हालांकि, राजस्थान के एक कांग्रेसी नेता कहते हैं, 'केंद्र किसानों की आवाज को दबाना चाहता है. किसानों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है. केंद्र कोयले की आपूर्ति करने में नाकाम रहा है और इसे छिपाने के लिए किसानों के रेल रोको अभियान का इस्तेमाल कर रहा है.'

 

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