scorecardresearch
 

ग्राउंड रिपोर्ट: सर्द मौसम में दिखा किसानों का गर्म मिजाज, जानें गांव की चौपाल से क्या बोले अन्नदाता

प्रचंड सर्दी के बीच भारी बारिश भी दिल्ली के बॉर्डर पर डटे किसानों के हौसले को नहीं डिगा सकी. बारिश से जलभराव हुआ लेकिन पानी का प्रहार किसानों ने हंसते-हंसते झेला. तिरपालों से पानी गिरा. खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजरा रहे ये किसान हर मुश्किल से लड़ते दिखे. क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या-जवान, किसान आंदोलन में संघर्ष की आहुति देने में कोई पीछे नहीं.

Advertisement
X
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसान
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसानों से आजतक ने की सीधी बात
  • कानून वापसी की मांग पर अडिग हैं किसान

दिल्ली के बॉर्डर पर 26 नवंबर से किसानों ने डेरा जमा रखा है. खून जमा देने वाली सर्दी में भी खुले आसमान के नीचे आंदोलन जारी है. आज की मीटिंग से पहले किसान संगठनों ने एक बड़ा ऐलान किया है और वो है 23 मार्च को राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने का और 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने का. आइए समझते हैं दिल्ली के सर्द मौसम में किसानों के गर्म मिजाज को.

Advertisement

प्रचंड सर्दी के बीच भारी बारिश भी दिल्ली के बॉर्डर पर डटे किसानों के हौसले को नहीं डिगा सकी. बारिश से जलभराव हुआ लेकिन पानी का प्रहार किसानों ने हंसते-हंसते झेला. तिरपालों से पानी गिरा. खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजरा रहे ये किसान हर मुश्किल से लड़ते दिखे. क्या बच्चे और क्या बूढ़े और क्या-जवान, किसान आंदोलन में संघर्ष की आहुति देने में कोई पीछे नहीं. बारिश में भी सिंघु बॉर्डर पर कुछ नहीं बदला, न तो आंदोलन थमा, न ही बारिश के चलते आंदोलनकारी किसानों का रूटीन, हां कड़ाके की सर्दी में कबड्डी की तस्वीरें आई. 

बारिश के बाद सिंघु बॉर्डर पर ऐसा दिखा नजारा

भले ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच मीटिंग से समाधान की आस लगाई जा रही है, लेकिन मीटिंग से पहले किसान संगठनों ने केंद्र सरकार को बड़े कदम उठाने का अल्टीमेटम भी दे दिया है. किसानों ने ऐलान किया है कि अगर सरकार ने मांग नहीं मानी तो 13 जनवरी को कृषि कानूनों की कॉपियां जलाकर लोहड़ी का त्योहार मनाया जाएगा. अब किसानों के रुख के बाद केंद्र सरकार क्या फैसला लेती है, ये सबसे अहम होगा.

Advertisement

देखें आजतक लाइव टीवी

दिल्ली बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं, लेकिन अब हम आपको दिल्ली बॉर्डर के आंदोलनकारी किसानों के गांव का हाल बताते हैं. आखिर गांवों में क्या चल रहा है. किसानों का मिजाज समझने के लिए हमने पूरे गांव का चक्कर लगाने का फैसला किया ताकि सटीक विश्लेषण किया जा सके. सफर शुरू हुआ ट्रैक्टर पर. ट्रैक्टर यानी किसानों के कर्म की सीढ़ी, यानी हल परंपरा की नई पीढ़ी. 

किसानों से बात करके तीन बड़ी बातें सामने आईं:

  • MSP की गारंटी और नए कानून रद्द हो 
  • नए कृषि कानून को अब तक नहीं पढ़ा 
  • सोशल मीडिया देखकर बनाई धारणा

गांव की चौपाल में किसानों की लाइन एकदम क्लियर है:

  • एमएसपी पर कानूनी गारंटी
  • तीनों कृषि कानून रद्द हो
  • कानून रद्द होने तक आंदोलन 

अब तक हमने ट्रैक्टर से गांव का हाल देखा. इसके बाद हम गांव के नुक्कड़ पर बैठे किसानों से मिले. उन्होंने कहा कि सरकार नहीं मानी तो आंदोलन जारी रहेगा. घरों के बाहर किसानों की बात सुनने के बाद हमने गांव की महिलाओं से बात की कि आखिर आधी आबादी का कृषि कानून को लेकर ओपीनियन क्या है. बातचीत में गांव की महिलाओं में वैसी तल्खी नहीं दिखी, जैसी किसानों में दिखी. महिलाओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को किसानों की बात सुननी चाहिए और जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए.

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement