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घंटेभर की देरी से शुरू हुई 'किसान संसद', राकेश टिकैत बोले- विपक्ष बने हमारी आवाज

प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद जंतर-मंतर पहुंचे योगेंद्र यादव ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस द्वारा एक बार फिर बसों की चेकिंग की जा रही है, जिसकी वजह से किसानों को जंतर-मंतर पहुंचने में देरी हुई.

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जंतर-मंतर पर किसान संसद में शामिल हुए किसान (पीटीआई)
जंतर-मंतर पर किसान संसद में शामिल हुए किसान (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'किसान संसद' तय समय से करीब घंटे भर की देरी से शुरू हुई
  • अलग-अलग संगठनों से 3 स्पीकर और 3 डिप्टी स्पीकर बनाए गए
  • बसों की कई जगह चेकिंग की वजह से पहुंचने में हुई देरीः योगेंद्र

मॉनसून सत्र (monsoon session) के बीच संसद (Parliament) से महज 2 किलोमीटर दूर जंतर-मंतर पर किसानों की 'किसान संसद' आज गुरुवार से शुरू हो गई. 'किसान संसद' को लेकर दिल्ली पुलिस और तमाम सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं. दिल्ली पुलिस ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुछ शर्तों के साथ प्रदर्शन की मंजूरी दी है.

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जंतर-मंतर पर गुरुवार को 'किसान संसद' अपने तय समय से करीब घंटे भर की देरी से शुरू हुई और यह शाम 5 बजे तक चली. 'किसान संसद' के दौरान कार्यवाही सही तरीके से चले इसके लिए किसानों के अलग-अलग संगठनों से 3 स्पीकर और 3 डिप्टी स्पीकर बनाए गए.

किसान नेता शिव कुमार ने कहा कि आज सुबह करीब 12 बजे किसानों का पहला जत्था पुलिस की सुरक्षा में जंतर-मंतर पर पहुंचा. और फिर सबसे पहले 3 स्पीकर और 3 डिप्टी स्पीकर चुने गए. उन्होंने बताया कि हर किसी को 90 मिनट का वक्त मिला है, एक स्पीकर के साथ एक डिप्टी मौजूद रहेगा. किसानों की यह संसद 9 अगस्त तक चलेगी और हर दिन पुलिस सुरक्षा में 200 किसान सिंघु बॉर्डर से जंतर-मंतर आएंगे और शाम 5 बजे वापस जाएंगे.

दिल्ली पुलिस ने आज के प्रदर्शन पर कहा कि आज 22 जुलाई को संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के 200 किसानों ने जंतर-मंतर पर डीडीएमए की अनुमति के बाद शांतिपूर्ण रहा. पुलिस ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी. आगे भी इसी तरीके के सपोर्ट की उम्मीद है.

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किसान संसद में शामिल हुए किसान (पीटीआई)
किसान संसद में शामिल हुए किसान (पीटीआई)


शुक्रवार को 200 किसान पहुंचेंगे जंतर मंतर

शाम 5 बजे के करीब राष्ट्रगान के साथ आज पहले दिन की किसान संसद खत्म हुई. अब कल शुक्रवार की सुबह फिर 200 किसान जंतर-मंतर आएंगे. किसान बस में बैठ के वापस सिंघु बॉर्डर के लिए निकल गए.

इस बीच बीजेपी नेता और मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी भड़क गईं. उन्होंने कहा कि पहली बात तो आप उनको किसान कहना बंद करिए क्योंकि वो किसान नहीं हैं, किसानों के पास इतना समय नहीं है कि वो जंतर-मंतर पर धरना देकर बैठे. वो अपने खेतों में काम कर रहे हैं. ये सिर्फ साजिशकर्ताओं द्वारा भड़काए गए लोग हैं जो किसानों के नाम पर ये हरकतें कर रहे हैं.

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मीनाक्षी लेखी से जब 26 जनवरी को हुई घटना के बावजूद जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को आने की इजाजत के बारे में पूछा गया तो वह भड़क गईं. उन्होंने कहा कि फिर आप उन लोगों को किसान बोल रहे हैं. मवाली हैं वो. उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को जो कुछ हुआ वो शर्मनाक था और विपक्ष द्वारा ऐसे लोगों को बढ़ावा दिया गया.

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विपक्ष हमारी आवाज बनेः राकेश टिकैत

इससे पहले आज सुबह जंतर-मंतर पहुंचने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम यहां पर अपनी आवाज उठाएंगे, विपक्ष को सदन के अंदर हमारी आवाज बनना चाहिए.

किसानों की संसद में शामिल होने गई पंजाबी फिल्म अभिनेत्री सोनिया मान ने कहा कि हमारी मुहिम सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना है, संसद से लेकर सड़क तक ये लड़ाई जारी रहेगी.

प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद योगेंद्र यादव ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस द्वारा एक बार फिर बसों की चेकिंग की जा रही है, जिसकी वजह से किसानों को जंतर-मंतर पहुंचने में देरी हुई. वहीं अन्य किसान नेताओं ने भी कहा कि दिल्ली पुलिस और सरकार बार-बार अपने वादे से मुकर रही है तथा किसानों को रास्ते में परेशान कर रही है. 

इस बीच किसानों के प्रदर्शन के बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम किसानों के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, हम पहले भी बात करते रहे हैं. नरेंद्र मोदी सरकार किसान हितेषी है.

प्रदर्शन की सशर्त अनुमति

इससे पहले गुरुवार सुबह की जंतर-मंतर और सिंघु बॉर्डर की कुछ तस्वीरें भी सामने आईं. दोनों ही जगह पर पुलिस की कड़ी सुरक्षा है. कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन (kisan sansad) करने की सशर्त इजाजत दी गई है. किसान चाहते थे कि वे वहां से मार्च करते हुए संसद तक जाएं, लेकिन इसकी इजाजत नहीं मिली.

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दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों को चिंता इसी बात की थी कि जंतर-मंतर के बहाने कोई गड़बड़ी ना हो तभी सभी शामिल होने वाले किसानों पर लगातार कड़ी पहरेदारी रखी जाएगी.

 

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