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किसान आंदोलन के 300 दिन पूरे, SKM का दावा- अब तक 605 किसानों ने गंवाई जान

साल 2020 के नवंबर महीने में शुरू हुआ आंदोलन आंदोलन दिल्ली की सरहद जारी है. किसान 300 दिन से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमा पर बैठे हैं.

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300 दिन से दिल्ली की सीमा पर किसानों का धरना जारी
300 दिन से दिल्ली की सीमा पर किसानों का धरना जारी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एसकेएम ने जारी की आंदोलन के दौरान मरने वालों की सूची
  • बरनाला के निवासी कहन सिंह जान गंवाने वाले पहले किसान

केंद्र सरकार की ओर से लागू किए नए कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले किसान विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को 300 दिन पूरे हो गए हैं. साल 2020 के नवंबर महीने में शुरू हुआ आंदोलन आंदोलन दिल्ली की सरहद जारी है. किसान 300 दिन से अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमा पर बैठे हैं.

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संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. दिल्ली की सीमा पर किसान जबसे बैठे हैं, 300 दिन पूरे हो चुके हैं. वहीं किसान मोर्चा की कविता कुरुंगाती ने ऑफिशियल वॉट्सएप ग्रुप में ऐसे किसानों की लिस्ट जारी की जिनकी अलग-अलग वजह से इस आंदोलन के दौरान मौत हो गई. मोर्चे की तरफ से दावा किया गया है कि किसान आंदोलन के दौरान 605 किसानों की मौत हुई है.

गौरतलब है कि किसानों ने पहली बार 26 नवंबर 2020 को अलग-अलग सीमा से दिल्ली में दाखिल होने की कोशिश की थी. तब दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर किसानों को दिल्ली में प्रवेश से रोक दिया था. इसके बाद किसान सीमा पर ही बैठ गए और वहीं आंदोलन शुरू कर दिया. एसकेएम के मुताबिक नवंबर अंत में बरनाला के रहने वाले 65 साल के कहन सिंह आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले पहले किसान थे.

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एसकेएम के मुताबिक 605वीं मौत संगरूर के रहने वाले सुरजीत की हुई. जान गंवाने वाले अधिकतर किसान पंजाब से आते हैं. गौरतलब है कि हरिद्वार के लक्सर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर में किसान महापंचायत का आयोजन हुआ था. यमुना एक्सप्रेस-वे पर मथुरा के पास किसानों ने टोल भी फ्री करा दिया था. संयुक्त किसान मोर्चा एमएसपी गारंटी के साथ ही तानों कानूनो को खत्म करने की मांग कर रहा है.

बता दें कि किसान मौर्चे ने 27 सितंबर 2021 को भारत में भारत बंद के अलावा अन्य देशों में भी विरोध की योजना बनाई है. ब्रिटेन में 25 सितंबर को लंदन में इंडिया हाउस के बाहर एकजुटता का प्रदर्शन करने की योजना है तो कनाडा में भारतीय किसानों के विरोध का समर्थन वहां चुनावी मुद्दा बन गया है.

 

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