केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. किसानों के इस प्रदर्शन ने सात महीने पूरे कर लिए हैं और अब यह अपने आठवें महीने में प्रवेश कर गया है. किसान अभी भी कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने पर अड़े हुए हैं. जबकि, केंद्र सरकार ने कानूनों को डेढ़ साल तक लागू नहीं करने का ऑफर भी दिया है. इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज शनिवार को किसानों से आंदोलन को खत्म करने की अपील की.
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'केंद्र सरकार कृषि कानूनों के प्रावधानों पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है.' किसान और सरकार के बीच अब तक कृषि कानूनों पर 11 दौर की बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई भी हल नहीं निकल सका है.
पिछली बैठक 22 जनवरी हो हुई थी. किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया था, जिसमें जमकर हिंसा हुई थी. किसानों के इस प्रदर्शन में कई लोग लाल किले तक पहुंच गए थे. इस घटना के बाद से ही बातचीत बंद है.
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मालूम हो कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान बैठे हुए हैं. इन किसानों की मांग कृषि कानूनों को रद्द करने की है. पिछले साल केंद्र सरकार ने संसद में तीन नए कृषि कानून बनाए थे, जिसको लेकर दावा किया गया था कि यह किसानों की बेहतरी के लिए है. वहीं, बड़ी संख्या में किसान नेताओं का कहना है कि ये कानून उद्योगपतियों की मदद के लिए बनाए गए हैं.
कृषि कानूनों का यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. कोर्ट ने कानूनों को लागू करने पर रोक लगा रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक कमेटी का भी गठन किया हुआ है, जिससे रिपोर्ट मांगी गई है. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सब्मिट भी कर दी है.
उधर, प्रदर्शन कर रहे किसान बीच-बीच में बड़े प्रदर्शन भी बुलाते रहे हैं. ऐसा ही प्रदर्शन आज किसान आंदोलन के सात महीने पूरे होने के अवसर पर बुलाया गया था. किसानों ने आज विभिन्न राज्यों के राज्यपालों से मुलाकात करके उन्हें ज्ञापन देने की योजना बनाई थी.