अगले साल अप्रैल तक भारत को 16 और राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से मिल जाएगा. भारत को इस साल जुलाई में पहले ही 5 राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की डिलीवरी मिल चुकी है. इस तरह से अप्रैल 2021 तक भारत को कुल 21 राफेल फाइटर जेल मिल जाएंगे.
भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए सौदा किया है. 21 राफेल विमानों की डिलीवरी के साथ ही भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा होगा.
अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस से आ रहे राफेल विमानों को गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा.
बता दें कि 29 जुलाई को 5 राफेल जेट अंबाला एयरबेस में पहुंचे थे. इन्हें वायुसेना के 17 स्क्वाड्रन में शामिल किया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 5 नवंबर को राफेल विमानों का अगला बैच भारत आएगा. इसमें 3 राफेल लड़ाकू विमान शामिल होंगे. ये विमान फ्रांस के Bordeaux-Merignac facility से सीधे अंबाला पहुंचेंगे. इन लड़ाकू विमान को ईंधन भरने के लिए बीच में रुकने की जरूरत नहीं होगी, इनकी रिफ्यूलिंग हवा में ही की जाएगी. इससे पहले 29 जुलाई को जो विमान भारत आए थे वे अबू धाबी में रुके थे और वहां पर इन विमानों में ईंधन भरा गया था.
जनवरी, मार्च में 3-3 विमानों की डिलीवरी
नवंबर के बाद जनवरी में राफेल को बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन 3 और राफेल विमानों की डिलीवरी देगी. इसके बाद फिर मार्च में 3 और विमान भारत को सौंपा जाएगा.
अप्रैल 2021 में भारत को फ्रांस 7 और राफेल विमानों की डिलीवरी करने जा रहा है. इस तरह से भारत को अप्रैल 21 तक कुल 21 (5+3+3+3+7) राफेल विमानों की डिलीवरी मिल जाएगी. ये सिंगल सीटर राफेल लड़ाकू विमान हैं.
वहीं 7 दूसरे राफेल विमानों पर इंडियन एयरफोर्स के पॉयलट फ्रांस में ट्रेनिंग ले रहे हैं. ये डबल सीटर लड़ाकू विमान हैं.
गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में तैनाती होगी
21 विमानों की डिलीवरी मिलने के साथ ही 18 राफेल लड़ाकू विमानों के साथ ही गोल्डन एरो स्क्वाड्रन पूरा हो जाएगा. जबकि बाकी 3 विमानों को हाशिमारा एयरबेस पर तैनात किया जा सकेगा. हाशिमारा एयरबेस पश्चिम बंगाल में भारत की पूर्वी सीमा पर स्थित है. यहां पर तैनाती से चीन की ओर से पेश किसी भी संभावित खतरे से भारत बखूबी निपट सकेगा.
बता दें कि ये सभी राफेल फाइटर विमान MICA और मेट्योर एअर टू एअर मिसाइल से लैस हैं, इसके अलावा इनमें स्कैल्प एअर टू ग्राउंड क्रूज मिसाइल से हमला करने की क्षमता मौजूद है. इन विमानों की तैनाती से उत्तर और पूर्व में भारत की हवा और जमीन में मारक क्षमता में जोरदार इजाफा होगा.