नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार शाम बिकनी किलर के नाम से मशहूर चार्ल्स शोभराज की रिहाई को मंजूरी दी थी. आज यानी शुक्रवार को उसकी रिहाई हो सकती है. यहां हम आपको बता रहे हैं कि शोभराज साल 1986 में किस तरह तिहाड़ जेल से भागा था.
'आकर्षक और निर्दयी व्यक्ति'
1986 में चार्ल्स शोभराज ने अपना जन्मदिन मनाने के बहाने जेल कर्मचारियों को नशीले पदार्थों वाली मिठाई देकर तिहाड़ से भागने की पटकथा लिखी थी. उसके साथ बातचीत करने वाले अधिकारियों ने उसे एक आकर्षक और निर्दयी व्यक्ति के रूप में व्यक्ति के रूप में याद किया, जो अपने व्यक्तित्व से महिलाओं को लुभा सकता था.
महिला वकीलों से, परफ्यूम लगाकर बन ठन कर मिलता था शोभराज
तिहाड़ जेल के पूर्व कानून अधिकारी सुनील गुप्ता ने कहा कि शोभराज एक ऐसा व्यक्ति था, जो महिला वकीलों से मिलने के लिए तैयार होने के लिए खास प्रयास करता था, लेकिन जब वह अपने पुरुष साथियों के साथ बैठता था तो वह साधारण कपड़ों में होता था. गुप्ता ने पीटीआई को बताया "शोभराज का महिलाओं के प्रति स्वाभाविक झुकाव था. जब भी उसे किसी महिला अतिथि से मिलना होता था, चाहे वह वकील हो या कोई और, वह ठीक से तैयार होने, परफ्यूम लगाने के लिए ज्यादा तैयारी करता था".
करता का महिलाओं को इंप्रेस करने की कोशिश
तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी ने कहा कि उन्होंने कभी भी शोभराज को पुरुष मेहमानों के प्रति इतना ध्यान देते हुए नहीं देखा था. वह पुरुषों से मिलने में काफी साधारण रहता था, लेकिन महिलाओं को इंप्रेस करने की कोशिश करता था. वास्तव में, वह पुरुषों की तुलना में महिला वकीलों के साथ बातचीत करना ज्यादा पसंद करता था. उन दिनों हर तरह के लोग उससे मिलने आते थे."
जेल से भागा और 22 दिन में दोबारा पकड़ा गया
शोभराज को 1976 में तिहाड़ जेल लाया गया था और फ्रांस प्रत्यर्पित किए जाने से पहले 1996 तक वहीं रखा गया था. उसने मार्च 1986 में अपने जेल भागने की पटकथा लिखी, लेकिन 22 दिनों के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे दोबार पकड़ लिया. अपने भागने के समय, वह तिहाड़ के सेंट्रल जेल नंबर 3 में बंद था और उसने अपने दोस्त डेविड रिचर्ड हॉल के साथ सावधानीपूर्वक भागने की योजना बनाई थी. शोभराज द्वारा रची गई योजना की बदौलत कुछ अन्य कैदी भी उस दिन तिहाड़ से भाग निकले थे.
जन्मदिन बोलकर जेल स्टाफ को खिलाई नशे वाली बर्फी
घटना को याद करते हुए गुप्ता ने कहा कि उसने जेल स्टाफ को बताया कि वह अपना जन्मदिन मना रहा है. ये बात मार्च माह की है जबकि उसका जन्मदिन अप्रैल में होता था. उस जमाने में जेल के अंदर खाना बनाने की इजाज़त होने के कारण उन्होंने अपने जन्मदिन के लिए मिठाइयाँ बनवाईं. "अपने दोस्त डेविड हॉल की मदद से, वह Larpose नामक एक दवा प्राप्त करने में कामयाब रहा और इसे भारी मात्रा में बर्फी में मिला दिया. नशीली दवाओं से सजी मिठाई जेल कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों, विशेष रूप से उन लोगों को वितरित की गई जो सामने प्रवेश द्वार की रखवाली कर रहे थे. उन्होंने मिठाई के एक टुकड़े के साथ प्रत्येक को 50 रुपये भी बांटे. "
बेहोश गेटकीपर की कमर से निकाली चाबी
इसके बाद वह गेटकीपर के कार्यालय में गया, जो बेहोश हो चुका था. शोभराज ने उसकी कमर से चाबी निकाल ली और गेट खोल दिया और कुछ अन्य कैदियों के साथ भाग निकला. इसके बाद एक अन्य स्टाफ जो हल्के नशे में था उसने एक ऑटोरिक्शा लिया और जेल उपाधीक्षक के आवास पर पहुंचा और उन्हें जल्दी जेल आने को कहा.
'सुरक्षा एजेंसियों ने किया था मेरा अपहरण'
गुप्ता ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद जेल लाए जाने के बाद, उसने दावा किया कि वह जेल से नहीं भागा था बल्कि सुरक्षा एजेंसियों ने उसका अपहरण कर लिया था, जो उससे जानकारी लेना चाहती थी.
'आत्मविश्वासी चालबाज और धोखेबाज'
प्रयास एनजीओ के संस्थापक आमोद कंठ, उस समय पुलिस उपायुक्त (अपराध) थे, उन्हें मामले की जांच करने का काम सौंपा गया था.उन्होंने कहा, वह न तो 'मनोरोगी' थे और न ही सार्वजनिक सुर्खियों में आने वाले व्यक्ति, वह एक बदमाश, एक आत्मविश्वासी चालबाज और धोखेबाज था."
दरअसल चार्ल्स शोभराज पर कई मामले चल रहे हैं. इस समय शोभराज दो विदेशी युवतियों की हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहा था. इसके अलावा शोभराज एक हत्या के प्रयास और जेल में हुए मर्डर अटेम्ट मामले में भी दोषी पाया गया था. जेल प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से सबकुछ स्पष्ट होने के बाद ही छोड़ने की बात कही थी. ऐसे में हो सकता है कि उसकी शुक्रवार को रिहाई हो जाए.
इनपुट- अंजली पिल्लई