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AIMIM की शिकायत पर यति नरसिंहानंद के खिलाफ FIR दर्ज, पैगंबर मोहम्मद पर की थी विवादित टिप्पणी

हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब भी कोई नफरत फैलाने वाला भाषण देता है, तो उसके खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए. इसके अलावा, शिकायत में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई और आरोप लगाया गया कि नरसिंहानंद जैसे लोगों के लिए इस्लाम को निशाना बनाकर झूठे और गलत बयान देना आम बात हो गई है.

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डासना मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद (File photo)
डासना मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद (File photo)

हैदराबाद पुलिस ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के एक मंदिर के मुख्य पुजारी यति नरसिंहानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. यह एफआईआर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दर्ज की गई है. आईटी एक्ट और बीएनएस के संबंधित प्रावधानों के तहत शहर पुलिस के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है.

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ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शिकायत और एफआईआर की एक प्रति पोस्ट की. इससे पहले दिन में ओवैसी ने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ यहां शिकायत दर्ज कराई और यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी की मांग की.

यहां पुराने शहर के इलाके में हिंदुत्व नेता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान ओवैसी ने पुलिस आयुक्त सी वी आनंद से मुलाकात की और बाद में संवाददाताओं से कहा कि एआईएमआईएम की शिकायत को कार्रवाई के लिए साइबर सेल को भेज दिया गया है. शहर के पुलिस प्रमुख ने उन्हें यह भी बताया कि आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने के बारे में प्रक्रिया के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सूचित किया जाएगा.

ओवैसी ने कहा कि यति नरसिंहानंद को पहले भी नफरत फैलाने वाले भाषण के सिलसिले में जेल भेजा गया था और उनकी जमानत की शर्तों में से एक यह थी कि उन्हें इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. इसलिए, एआईएमआईएम ने मांग की है कि यति नरसिंहानंद की जमानत रद्द की जाए. एआईएमआईएम ने अपनी पुलिस शिकायत में यति नरसिंहानंद द्वारा कथित तौर पर की गई कुछ टिप्पणियों का उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की टिप्पणियां, प्रथम दृष्टया नफरत फैलाने वाले भाषण के बराबर हैं. 

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हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब भी कोई नफरत फैलाने वाला भाषण देता है, तो उसके खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए. इसके अलावा, शिकायत में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई और आरोप लगाया गया कि नरसिंहानंद जैसे लोगों के लिए इस्लाम को निशाना बनाकर झूठे और गलत बयान देना आम बात हो गई है. 

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