
बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने प्रलय मचा दी है. पटना में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है. जबकि बिहार के कई शहरों को सिस्टम की नाकामी से बाढ़ ने घेर लिया है. नालंदा, मोतिहारी, खगड़िया, मुज़फ्फरपुर, छपरा और पटना समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं. बिहार के बेतिया में योगापट्टी प्रखंड क्षेत्र के जरलपुर खुटवनिया पंचायत में लोगों के घर पानी में डूब गए हैं. लोग पानी के बीच में किसी तरह जिंदगी बचाने का जतन कर रहे हैं. कमर तक भर गए पानी ने लोगों के जीवन को तबाह कर दिया है.
बिहार के सहरसा में बाढ़ से लोग दहशत में हैं. भयानक जलबहाव के बीच लोग रस्सी के सहारे अपने आशियाने तक जाने के लिए मजबूर हैं. यहां गंडक नदी ने जमकर कहर बरपाया है. सुगौली के आस पास के इलाके पूरी तरह से डूब चुके हैं. रास्ते बंद हैं और लोग कमर तक पानी में यूं ही जीवन जीने के लिए मजबूर हैं. लोगों की नाराजगी इस बात पर है कि इनकी सुध लेने के लिए न तो शासन न प्रशासन, कोई इनका हाल जानने के लिए नहीं आया.
बिहार के नालंदा में भी बाढ़ ने दस्तक दी है. लगातार हो रही बारिश ने पंचाने नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करा दिया है. सलेमपुर इलाके में 50 से ज्यादा घरों में बाढ़ का पानी घुस आया है, लोगों की गृहस्थी पानी में डूबने लगी है. बाढ़ ने यहां रहने वालों पर भयानक कहर बरपाया है. करीब 350 बीघे में फैली भिंडी, बैगन और बोरा की फसलें पूरी तरह से पानी में डूब गई हैं.
गुजरात में भी कई गांवों में घर कमर तक पानी में डूब गए हैं. लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. राजकोट में सड़कें पानी से लबालब हैं.
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में भी बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है. बिजनौर के मंडावर और चांदपुर इलाके में बाढ़ ने सैकड़ों बीघे में खड़ी गन्ने की फसल को तबाह कर दिया है. पानी की वजह से पशुओं के चारे का संकट पैदा हो गया है. पिछले तीन दिन में एसडीआरएफ और सुरक्षाकर्मियों ने बाढ़ से 95 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है.
पश्चिम बंगाल के हुगली में बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई हुई है. यहां आरामबाग इलाके में चारों ओर पानी ही पानी दिखता है. गंधेश्वरी और द्वारकेश्वर नदियों ने आस-पास के इलाके को जलमग्न कर दिया है. दर्जनों गांव पानी की भेंट चढ़ चुके हैं. करोड़ों की संपत्ति तहस-नहस हो गई है.
उत्तराखंड में नदियां उफान पर, कई हाइवे बंद
उत्तराखंड में नदियां उफान पर हैं और पहाड़ टूट रहे हैं. नदी और पहाड़ सड़कों को निगल गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में हर साल बाढ़ और बारिश से करीब 64 करोड़ का नुकसान होता है. उत्तराखंड कई तरह की आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील है.
उत्तराखंड के चमोली, ऋषिकेश, चंपावत, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग समेत कई इलाकों में बाढ़, बारिश और भूस्खलन का कहर जारी है. उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में पिछले तीन दिन से जारी बारिश ने जन-जीवन को बुरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है. मानसूनी बरसात के बाद गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर जैसी नदियां अपनी हंदे लांघ रही हैं. रुद्रप्रयाग से लेकर ऋषिकेश तक नदी किनारे रहने वालों के बीच ऐलान कर दिया गया है कि वो सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं.
पिथौरागढ़ में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है. उत्तराखंड में अलग अलग जगहों पर पहाड़ गिरने से नेशनल हाइवे समेत 73 सड़कें बंद है. चंपावत जिले के शारदा बैराज में जल स्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर है. जोशीमठ में लगातार 4 दिन से बारिश हो रही है. जगह-जगह पहाड़ दरक रहे हैं, ढह रहे हैं, और नदियों का तेज़ बहाव पहाड़ों के लिए काल बना हुआ है. बद्रनीथ नेशनल हाइवे 58 पर मारवाड़ी पुल से विष्णुप्रयाग तक की सड़क पूरी तरह बंद है.
अलकनंदा नदी यहां अपने पूरे उफान पर है. रुद्रप्रयाग में अलकनंदा अपने खतरे के निशान 627 मीटर पर बह रही है. नदी के किनारे जाने पर रोक लगा दी गई है. नदी किनारे रहने वालों से घर पहले ही खाली करवा दिए गए हैं. वहीं, अलकनंदा नदी का पानी और मलबा लोगों के घरों में भी घुस गया है. प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में भी नदी का मलबा भर गया है.