कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजीत गंगोपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद उन्होंने 7 मार्च (आज) बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की है. वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उनके इस फैसले की कड़ी आलोचना की. इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में अभिजीत गंगोपाध्याय ने इस बारे में विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि किस वजह से वह राजनीति में आ रहे हैं. साथ ही अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी बात की.
गंगोपाध्याय ने कहा कि मैंने एक न्यायाधीश के रूप में कभी राजनीति नहीं की है. मैंने कभी भी कोई ऐसा राजनीतिक फैसला नहीं दियास जो राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण हो. मैंने जो भी फैसले सुनाए, जो आदेश पारित किए, वह हमेशा मेरे सामने रखे गए तथ्यों के आधार पर दिए.
उन्होंने कहा कि अगर कोई बहुत ज्यादा करप्ट है और उसका भ्रष्टाचार किसी न्यायाधीश के सामने आता है, तो न्यायाधीश हमेशा उचित एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार की जांच कराने के लिए अपना पूरा प्रयास लगाकर सही काम करते हैं. मैंने भी वही किया है. ये किसी के भी (पार्टी के) पक्ष में नहीं है.
अभिजीत गंगोपाध्याय का तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ कई बार टकराव हो चुका है, इस सवाल पर उन्होने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि पश्चिम बंगाल स्टेट ने मेरे द्वारा पारित सभी आदेशों को यह बताए बिना क्यों चुनौती दी कि मैं एक राजनीतिक व्यक्ति हूं और मैं राजनीतिक निर्णय ले रहा हूं. उन्होंने कभी अपीलीय अदालत या सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसा कोई सवाल नहीं उठाया. अब वे सवाल उठा रहे हैं क्योंकि वे लोगों का ध्यान भ्रष्टाचार के मुद्दे से हटाना चाहते हैं.
इंटरव्यू के दौरान गंगोपाध्याय ने खुलासा किया कि उनका कभी भी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का इरादा नहीं था. उन्होने कहा कि मैंने सोचा था कि मैं उचित समय पर यानी अब से 5 महीने बाद रिटायरमेंट ले लूंगा, लेकिन जब मुझे पता चला कि लोग मुझे चुनौती दे रहे हैं और मुझे राजनीतिक क्षेत्र में कूदने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, तो क्यों न मैं ही इसे लेकर पहल करूं.
जज से राजनेता बनने के बारे में पूछे जाने पर गंगोपाध्याय ने कहा कि मैं सात दिनों की छुट्टी पर था, और छुट्टी खत्म होने पर बीजेपी ने कुछ कॉमन फ्रेंड के जरिए मुझसे संपर्क किया. मैंने कुछ कॉमन दोस्तों के जरिए भी बीजेपी से संपर्क किया. हमने पहली बार एक-दूसरे से बात की और उसके बाद मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया. यह चर्चा 3-4 दिन तक चली थी.