कतर में इंडियन नेवी के 8 पूर्व अफसरों को वहां की एक अदालत से मिली मौत की सजा पर भारत सन्न है. एजेंसी रिपोर्ट के मुताबिक कतर ने नौ सेना के इन अफसरों पर इजरायल के लिए कथित रूप से जासूसी का आरोप लगाया है. कतर की अंग्रेजी वेबसाइट अल-जजीरा के अनुसार इन अफसरों पर कतर के सबमरीन प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारियां इजरायल को देने का आरोप है.
हालांकि कतर की सरकार ने यह नहीं बताया है कि नौसेना के पूर्व अफसरों पर लगे जासूसी के आरोप किस किस्म के हैं? भारत के विदेश मंत्रालय ने इन पूर्व अफसरों को मौत की सजा पर बेहद हैरानी जताई है. विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की सरकार इन अफसरों को सभी संभव कानूनी विकल्प मुहैया कराने पर विचार कर रही है. हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भी इस केस का ज्यादा खुलासा नहीं किया है.
नेवी के जिन पूर्व अफसरों को कतर की कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है भारत में उनका सर्विस रिकॉर्ड बेदाग और शानदार रहा है. उच्च पेशेवर दक्षता, तेज तर्रार कामकाज और शार्प माइंड की वजह से इनमें से एक अफसर को भारतीय सेना में सेवा के दौरान राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. एक अधिकारी तमिलनाडु स्थित प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन में अपने सर्विस के दौरान इंस्ट्रक्टर के रोल में रह चुके हैं.
एक दूसरे अधिकारी अपनी सेवा के दौरान भारत के युद्धपोत आईएनएस विराट पर फाइटर कंट्रोलर और नेविगेटिंग ऑफिसर की भूमिका में रह चुके हैं.
सबसे पहले ये जान लेना जरूरी है नौ सेना के जिन अफसरों को कतर की कोर्ट ने कथित जासूसी के आरोपों में सजा सुनाई है वो हैं कौन? वे कतर पहुंचे कैसे? और वहां क्या काम कर रहे थे?
नेवी के वो पूर्व अफसर जिन्हें हुई है मौत की सजा
भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस ऑफ कतर (Court of First Instance of Qatar) ने इस मामले में दोहा में काम कर रहे इंडियन नेवी के आठ पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई है. बता दें कि कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस वो अदालत होती है जहां किसी मामले की पहली बार सुनवाई होती है.
ये अफसर हैं.
कैप्टन नवतेज सिंह गिल
कैप्टन सौरव वशिष्ठ
कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा
कमांडर पूर्णेंदू तिवारी
कमांडर सुगुनकर पाकला
कमांडर संजीव गुप्ता
कमांडर अमित नागपाल
नाविक रागेश
कैसे गए थे कतर?
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ये नेवी में काम कर चुके इन सभी अफसरों की भारतीय नौसेना में बेदाग पारी रही है. इन अफसरों ने नेवी में 20 साल तक काम किया है और महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. पीटीआई के अनुसार इन अफसरों ने नौसेना में तय समय तक सेवा देने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृति (voluntary retirement)ली और बेहतर मौके की तलाश में नौसेना की सर्विस छोड़ी.
इसके बाद इन अधिकारियों ने कतर की प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी अल दहारा ( Al Dahra) के साथ काम करना शुरू किया.
कतर में क्या करते थे नौसेना के ये पूर्व अधिकारी?
पीटीआई के अनुसार अल दहारा ( Al Dahra) कंपनी में भारत के ये पूर्व अधिकारी पिछले कुछ सालों से कतर के नौसेना अधिकारियों को ट्रेनिंग दे रहे थे. प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी अल दहारा ने एक समझौते के तहत कतर की नौसेना को प्रशिक्षण देने का अधिकार प्राप्त किया था.
कैसे सामने आया केस?
रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल अगस्त में जासूसी के कथित आरोप में इंडियन नेवी के इन पूर्व अफसरों को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन न तो कतर ने और न ही भारत की एजेंसियों ने इन अफसरों पर लगे आरोपों की डिटेल दी. इधर अल दहारा कंपनी ने अपने एक अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद मई में कतर में अपना काम-काज ही बंद कर दिया. इस बाबत ये भी रिपोर्ट आई कि अल दहारा के शीर्ष अधिकारी को कस्टडी में लिया गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद उसे छोड़ दिया गया. . इस कंपनी में लगभग 75 भारतीय नागरिक काम करते थे, जिनमें ज्यादातर नौसेना के पूर्व अफसर थे. कंपनी बंद होने के बाद इन सभी भारतीयों को नौकरी से निकाल दिया गया था.
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ये भी जानकारी सामने आई है कि इस मामले में गिरफ्तार भारतीय नागरिकों को कई महीनों तक एकांतवास कारागार में रखा गया था. इसके बाद उन्हें दो लोगों के सेल (Two-person cells) में शिफ्ट किया गया था. कमांडर पूर्णेंदू तिवारी की बहन ने इस बाबत ट्वीट कर पीएम मोदी का ध्यान आकर्षित किया था और उनसे इनकी रिहाई में मदद मांगी थी.
नेवी के क्रीम माइंड थे अधिकारी!
भारतीय नौसेना के पूर्व प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा (रिटायर) ने कहा है कि जिन अधिकारियों को कतर में सजा सुनाई गई है वे बेहतरीन पेशेवर थे जिन्होंने नौसेना और देश को अपनी सेवाएं दी थी. डीके शर्मा ने कहा कि उन्होंने सजा पाए 5 अफसरों के साथ काम किया है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नेवी के पूर्व प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने कहा कि कैप्टन नवतेज गिल रिटायर हो चुके हैं और वे उनके कोर्स-मेट (सहपाठी) थे. वे चंडीगढ़ से ताल्लुक रखते हैं और रिटायर सैन्य अधिकारी के बेटे हैं. डीके शर्मा ने कहा कि उन्हें पढ़ाई के दौरान बेस्ट कैडेट चुना गया था और इस वजह से उन्हें प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था. वे तमिलनाडु के डिफेंस कॉलेज में इंस्ट्रक्टर भी रह चुके हैं.
कमांडर पूर्णेंदू तिवारी (रिटायर) डीके शर्मा के सीनियर रह चुके हैं. डीके शर्मा के हवाले से हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि पूर्णेंदू तिवारी उस समय नौसेना में टॉप अधिकारियों में से थे. वे नेवीगेशन ऑफिसर थे और उन्होंने युद्धपोत आईएनएस मगर को कमांड भी किया था. विदेश में भारत की साफ-सुथरी छवि प्रस्तुत करने के लिए 2019 में कमांडर पूर्णेंदू तिवारी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रवासी भारतीय सम्मान 2019 से सम्मानित किया था. ये सम्मान उन्हें कतर की नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए दिया गया था.
कमांडर अमित नागपाल, कमांडर एसके गुप्ता और कैप्टन बीके वर्मा सभी नौसेना से रिटायर हैं और डीके शर्मा के जूनियर रहे हैं. नागपाल कम्यूनिकेशन और इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ थे. गुप्ता गनरी स्पेशलिस्ट थे. ये वो पद होता है जो किसी यूनिट का ऑपरेशन चीफ होता है. जबकि कैप्टन वर्मा नेविगेशन और डायरेक्शन विशेषज्ञ थे.
जिन दो और अधिकारियों को सजा मिली है वे हैं कैप्टन सौरव वशिष्ठ और कैप्टन सुगुनकर पकाला, ये दोनों ही अधिकारी नेवी में तेज-तर्रार टेक्निकल अधिकारी थे.
कैप्टन डीके शर्मा (रिटायर) ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह विश्वास करने योग्य नहीं है. मुझे विश्वास है कि सरकार इन अधिकारियों की सुरक्षित रिहाई के लिए हर मुमकिन कोशिश करेगी.
एक और जिस भारतीय को मौत की सजा मिली है वे नौसेना में नाविक के पद पर रह चुके हैं.
भारत सरकार के पास अब क्या है विकल्प?
कतर के साथ रिश्तों को देखते हुए भारत सरकार कतर कोर्ट के इस फैसले पर सधी प्रतिक्रिया दे रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारतीयों को सभी कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेगा.
विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम इस मामले को बहुत महत्व देते हैं और इस पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. हम सभी कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे. हम फैसले को कतारी अधिकारियों के समक्ष भी उठाएंगे." विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस मामले की कार्यवाही की गोपनीय प्रकृति के कारण, इस समय कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
बता दें कि कतर में भारत के राजदूत ने काउंसलर एक्सेस मिलने के बाद 1 अक्टूबर को जेल में बंद इन भारतीयों से मुलाकात की थी.
इस मामले में आजतक से बात करते हुए वरिष्ठ वकील और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के जानकार आनंद ग्रोवर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और आईसीसीपीआर (International Covenant on Civil and Political Rights) के प्रावधान कहते हैं कि कुछ असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर आम तौर पर मौत की सजा नहीं दी जानी चाहिए.
भारत की सरकार के पास फिलहाल उस मामले में कई विकल्प हैं. भारत को पहले कतारी न्याय प्रणाली के अनुसार उच्च अदालत में अपील करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि यदि उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता है या अपील प्रक्रिया का पालन नहीं होने दिया जाता है तो भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक मामला ले जा सकता है.
आनंद ग्रोवर ने कहा कि भारत अपने कूटनीतिक दबाव का इस्तेमाल कर कतर से इन अधिकारियों को मौत की सजा की तामील को रुकवा सकता है. हालांकि यहां ध्यान देने के बात यह है कि कतर में 8 लाख भारतीय रहते हैं और कतर के साथ भारत के संबंध भी अच्छे रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर की गैर-सरकारी संस्थाएं, सिविल सोसायटी भी इस मामले को विश्व स्तर पर उठा सकती हैं, इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के जरिये भी कतर पर दबाव बनाया जा सकता है.