बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अगले साल जनवरी तक टल गई है. अब कोर्ट जनवरी 2024 उम्र कैद की सजा पूरी होने से पहले आनंद मोहन की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने मामले की सुनवाई टालने का आग्रह किया था. शुक्रवार को ही चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई टालने की प्रवृत्ति से बचने को कहा था.
यह याचिका गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से दायर की गई है. उमा कृष्णैया ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 में कानून संशोधन के जरिए पूर्वव्यापी प्रभाव से बिहार जेल नियमावली 2012 में बदलाव किया है. ये पूर्वव्यापी प्रभाव यानी रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट उचित और विधि सम्मत नहीं है.
यह पूरे देश के लिए अन्याय'
बिहार की नीतीश सरकार ने कारा अधिनियम में बदलाव करके आनंद मोहन समेत 26 कैदियों को रिहा किया था. आनंद मोहन की रिहाई के बाद से आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया का परिवार लगातार नीतीश सरकार के इस फैसले पर विरोध जता रहा है. आनंद मोहन की रिहाई को जी कृष्णैया की बेटी ने दुखद बताया था. उन्होंने कहा था कि यह हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अन्याय है.
परिवार ने जताया था विरोध
आनंद मोहन की रिहाई के बाद से आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया का परिवार लगातार नीतीश सरकार के इस फैसले पर विरोध जता रहा है. आनंद मोहन की रिहाई को जी कृष्णैया की बेटी ने दुखद बताया था. उन्होंने कहा था कि यह हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अन्याय है. जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने कहा था, जनता आनंद मोहन की रिहाई का विरोध करेगी, उसे वापस जेल भेजने की मांग करेगी. आनंद मोहन को रिहा करना गलत फैसला है. सीएम नीतीश को इस तरह की चीजों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. अगर वह (आनंद मोहन) भविष्य में चुनाव लड़ेंगे तो जनता को उनका बहिष्कार करना चाहिए. मैं उन्हें (आनंद मोहन) वापस जेल भेजने की अपील करती हूं.