भारत के चार और नागरिकों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह कर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया है. भारत की यशी जैन, मिथिल राजू, सुनील कुमार और पांखी हैरिस छेद ने 17 मई को माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की. ये जानकारी आयोजकों की ओर से गुरुवार को दी गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस अभियान के आयोजक सटोरी एडवेंचर के मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषि भंडारी ने ये जानकारी दी है. भंडारी के मुताबिक बुधवार के दिन 25 साल की यशी जैन, 17 साल के मिथिल राजू, 32 साल के सुनील कुमार और 32 वर्षीय पांखी हैरिस छेद ने सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई की. इनमें से यशी जैन और सुनील कुमार ने ल्होत्से की चोटी पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई की.
ऋषि भंडारी के मुताबिक सुनील कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने के करीब 23 घंटे बाद दुनिया के चौथे सबसे ऊंचे पर्वत ल्होत्से को फतह किया. वहीं, यशी जैन ने भी माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद माउंट ल्होत्से की चोटी पर चढ़ाई की. यशी जैन ने माउंट एवरेस्ट के बाद माउंट ल्होत्से फतह करने में करीब 26 घंटे का समय लिया.
गौरतलब है कि माउंट ल्होत्से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है. इसकी ऊंचाई 8516 मीटर है. बताया जाता है कि इस सप्ताह पांच विदेशियों समेत कुल 19 पर्वतारोही दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे. शेरपा गाइड्स उन सैकड़ों पर्वतारोहियों के लिए रास्ता बनाएंगे जो अगले कुछ हफ्ते में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने निकलेंगे.
माउंट एवरेस्ट के लिए जारी हुए रिकॉर्ड परमिट
माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए निकलने वाले पर्वतारोहियों को पहले परमिट लेना होता है जिसे नेपाल सरकार की ओर से जारी किया जाता है. अधिकारियों के मुताबिक इस साल एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड परमिट जारी किए गए हैं. नेपाल सरकार इस साल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड 466 परमिट जारी किए हैं.
पिछले महीने लापता हो गए तीन पर्वतारोही
गौरतलब है कि पिछले ही महीने यानी अप्रैल में महीने में माउंट एवरेस्ट फतह करने निकले पर्वतारोहियों के साथ हादसा हो गया था. माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन हुआ था. हिमस्खलन के कारण तीन पर्वतारोही लापता हो गए थे. ये तीनों ही पर्वतारोही नेपाल के ही रहने वाले थे. वहीं, हाल ही में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप में तबीयत बिगड़ने से एक भारतीय पर्वतारोही की मौत हो गई थी.