सोने की तस्करी (Gold Smuggling) पर कस्टम एक्ट (Customs Act) के तहत कार्रवाई की जाएगी या फिर गैरकानून गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत? इसका परीक्षण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. कोर्ट ने मामले में कानून के इस सवाल पर नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने यह नोटिस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक याचिका पर जारी किया है.
दरअसल, एनआईए ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें केरल सोने की तस्करी मामले में 12 आरोपियों को जमानत दी गई थी. याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि वो जमानत रद्द करने के पहलू पर विचार नहीं करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि आरोपी सरकार के कर्मचारी हैं, हम जमानत रद्द करने के पहलू में नहीं जाएंगे. हालांकि, हम कानूनी प्रश्न को खुला छोड़ सकते हैं. बेंच ने कहा कि वो कानून के इस सवाल पर सुनवाई करेंगे? पीठ ने कहा कि क्या यह अपराध सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कवर किया गया था? या यह UAPA की धारा 15(1) (ए) (iiiए) के तहत "आतंकवादी कृत्य" की परिभाषा के अंतर्गत आता है?
केरल हाई कोर्ट ने UAPA नहीं माना
5 जुलाई 2020 को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने 14.82 करोड़ रुपये के 30 किलोग्राम सोने को पकड़ा था. यह सोना संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास को भेजी गई राजनयिक खेप के माध्यम से लाया गया था. इस पूरे मामले की जांच एनआईए कर रही है और आरोपियों पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया था.
एनआईए ने अपने विशेष अदालत के 15 अक्टूबर 2020 के फैसले के खिलाफ केरल हाईकोर्ट के समक्ष अपील दायर की थी, जिसने आरोपी को सशर्त जमानत दी थी और कहा था कि आरोपी के आतंकी संगठनों से संबंध के कोई सबूत न है.
राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा था- तस्करी पर चल सकता है UAPA के तहत मामला
वहीं राजस्थान हाई कोर्ट ने फरवरी में फैसला सुनाया था कि सोने के तस्कर पर भी यूएपीए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 1.5 किलोग्राम से अधिक सोने की तस्करी के आरोप में पकड़े गए मोहम्मद असलम के मामले में की थी.