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बेची जाएंगी 12,611 शत्रु संपत्तियां... जानें किन लोगों की होती है ये प्रॉपर्टी, कैसे खरीद सकेंगे इन्हें

गृह मंत्रालय देशभर में 12 हजार 611 शत्रु संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रही है. ये वो संपत्तियां हैं, जिनके मालिक अब पाकिस्तान या चीन के नागिरक बन चुके हैं. सरकार ने इनकी संपत्तियां अपने कब्जे में ले लीं हैं. शत्रु संपत्ति और उससे जुड़े कानून के बारे में जानें सबकुछ...

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एक लाख करोड़ की साढ़े 12 हजार से ज्यादा शत्रु संपत्तियों की बिक्री होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एक लाख करोड़ की साढ़े 12 हजार से ज्यादा शत्रु संपत्तियों की बिक्री होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Enemy Property: केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति की नीलामी शुरू कर दी है. शत्रु संपत्ति यानी वो संपत्ति जिनके मालिक अब पाकिस्तान या चीन के नागरिक बन चुके हैं. 

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केंद्र सरकार के मुताबिक, देशभर में 12 हजार 611 संपत्तियां ऐसी हैं जिन्हें शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है. इनकी कीमत एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई हैं. 

शत्रु संपत्ति का संरक्षण कस्टोडियन ऑफ एनेमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (CEPI) के पास है. अभी ये 12 हजार 611 संपत्तियां अचल हैं.

कितनी है शत्रु संपत्ति?

- भारत में 12 हजार 611 संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है. इनकी कीमत एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है.

- इनमें से 12 हजार 485 संपत्तियां पाकिस्तान के नागरिकों की है, जबकि 126 संपत्तियां चीन के नागरिकों की है.

- उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 6 हजार 255 शत्रु संपत्तियां हैं. उसके बाद 4 हजार 88 संपत्तियां पश्चिम बंगाल में हैं. राजधानी दिल्ली में शत्रु संपत्तियों की संख्या 659 है.

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क्या होती है शत्रु संपत्ति?

- जब दो देशों में जंग होती है तो सरकार 'दुश्मन देश' के नागरिकों की संपत्ति को कब्जे में ले लेती है, ताकि दुश्मन लड़ाई के दौरान इसका फायदा न उठा सके.

- पहले और दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका और ब्रिटेन ने जर्मनी के नागरिकों की संपत्ति को इसी आधार पर अपने कब्जे में ले लिया था.

- भारत ने 1962 में चीन, 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ने पर भारत सुरक्षा अधिनियम के तहत इन देशों के नागरिकों की जायदाद पर कब्जा कर लिया था.

- शत्रु संपत्ति के तहत जमीन, मकान, सोना, गहने, कंपनियों के शेयर और दुश्मन देश के नागरिकों की किसी भी दूसरी संपत्ति को कब्जे में लिया जा सकता है.

- शत्रु संपत्ति को बेचकर सरकार अब तक 3,400 करोड़ रुपये कमा चुकी है. इनमें से ज्यादातर गोल्ड जैसी चल संपत्ति है. 

कैसे बिकेंगी ये शत्रु संपत्ति?

- गृह मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी शत्रु संपत्ति को बेचने से पहले डीएम या कमिश्नर की मदद से बेदखली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

- एक करोड़ से कम कीमत की शत्रु संपत्ति के मामले में CEPI पहले कब्जा करने वाले को खरीदने की पेशकश करेगा और अगर इसे खारिज कर दिया जाता है तो इसका निपटारा गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के हिसाब से होगा.

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- वहीं, अगर किसी संपत्ति एक करोड़ से ज्यादा और 100 करोड़ से कम होगी, तो उसका निपटारा ई-नीलामी से होगा. इसके लिए मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड का इस्तेमाल किया जाएगा.

क्या है शत्रु संपत्ति कानून?

- 1965 की भारत-पाकिस्तान जंग के बाद 1968 में शत्रु संपत्ति कानून लागू किया गया था. इस कानून में समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं. लेकिन सबसे अहम संशोधन 2017 में हुआ था.

- इस संशोधन ने शत्रु संपत्ति का दायरा भी बढ़ा दिया. इससे न केवल उन व्यक्तियों की संपत्ति शामिल की गई जो दुश्मन देश से हैं, बल्कि उनके वंशजों और उत्तराधिकारियों की संपत्ति भी शामिल है, जो भले ही भारत के नागरिक हों.

- इस संशोधन ने सरकार को शत्रु संपत्ति बेचने का भी अधिकार दिया, जिस पर पहले रोक थी. इतना ही नहीं, इस संशोधन ने शत्रु संपत्ति का मालिक 'कस्टोडियन' को बना दिया. इसे 1968 से प्रभावी भी माना गया.

- इसके अलावा अगर कोई भारतीय नागरिक किसी शत्रु संपत्ति को खरीदता है, तो वो उसे विरासत में किसी दूसरे को नहीं दे सकता. मसलन, अगर पिता ने शत्रु संपत्ति खरीदी है तो उस पर बच्चों का हक नहीं होगा. 

 

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