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कोरोना मैनेजमेंट पर भागवत ने सरकार को दिखाया आईना, बोले- गफलत में आए, इसलिए ऐसे हालात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि पहली लहर से बाद सरकार, प्रशासन और लोगों ने लापरवाही बरती, जिस वजह से मौजूदा हालात पैदा हुए. आरएसएस की लेक्चर सीरीज 'पॉजिटिविटी अनलिमिटेड' में उन्होंने ये बातें कहीं.

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भागवत बोले, ये वक्त किसी पर उंगली उठाने का नहीं है. (फाइल फोटो-PTI)
भागवत बोले, ये वक्त किसी पर उंगली उठाने का नहीं है. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पॉजिटिविटी अनलिमिटेड में दिया भाषण
  • 'कोरोना से हमें घबराना नहीं है'
  • 'कोरोना से लड़ाई धैर्य की परीक्षा है'

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि पहली लहर से बाद सरकार, प्रशासन और लोगों ने लापरवाही बरती, जिस वजह से मौजूदा हालात पैदा हुए. आरएसएस की लेक्चर सीरीज 'पॉजिटिविटी अनलिमिटेड' में उन्होंने ये बातें कहीं. उन्होंने लोगों से ऐसे माहौल में पॉजिटिव रहकर महामारी से लड़ने की अपील की. 

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आरएसएस प्रमुख ने कहा कि ये वक्त एक-दूसरे पर उंगली उठाने का नहीं है, बल्कि एकजुट रहने का है. उन्होंने कहा, "हम ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं, क्योंकि हम सब गफलत में आ गए और सरकार, प्रशासन और लोगों ने डॉक्टरों की चेतावनी के बावजूद पहली लहर के बाद लापरवाही बरती."

मोहन भागवत की ये टिप्पणी इसलिए मायने रखती है क्योंकि उनकी विचारधारा से जुड़ी बीजेपी की केंद्र सरकार मानती है कि उन्होंने सभी प्रोटोकॉल का पालन किया. इस साल फरवरी में बीजेपी ने कोरोना पर जीत की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में प्रस्ताव पास किया था. 

तीसरी लहर के बारे में भागवत ने कहा कि "हमें घबराना नहीं है. हम चट्टान की तरह खड़े होंगे. हमें पॉजिटिव रहना है और खुद को कोविड निगेटिव रखने के लिए सावधानी बरतनी होगी." उन्होंने इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और मशहूर उर्दू के शायर इकबाल का उदाहरण भी दिया. उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के वक्त विंस्टन चर्चिल की डेस्क पर एक कोट लिखा रहता था, जिसमें लिखा था "इस ऑफिस में निराशावादियों की कोई जगह नहीं है. हम हार की संभावनाओं में रूचि नहीं रखते." इसी तरह इकबाल का एक शेर पढ़ते हुए उन्होंने कहा, "कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा."

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भागवत ने आगे कहा, "अगर हम थककर हार मान लेते हैं, तो ये उस चूहे की तरह होगा जो सांप के आगे हार मान लेता है. हम ऐसा होने नहीं दे सकते. जितनी निराशा है, उतनी ही आशा भी है. ऐसे लोग हैं जो अच्छे काम कर रहे हैं और अपनी क्षमता के हिसाब से लोगों की मदद कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "आने वाले वक्त में अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए हमें अभी से इसके लिए तैयार रहना होगा. हमें डरने की जरूरत नहीं है, ताकि हम आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए समय पर तैयार रहें." 

मोहन भागवत ने कहा कि कोविड के खिलाफ लड़ाई भारतीयों के 'धैर्य की परीक्षा' भी है. उन्होंने कहा, सफलता आखिरी नहीं है और नाकामी मृत्यु नहीं है. साहस बनाए रखना ही एकमात्र चीज है जो मायने रखती है.

 

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