गोवा सरकार ने 32 साल बाद पुराने सचिवालय के पीछे फजेंडा बिल्डिंग में लेखा विभाग की एक तिजोरी खोली है. 1961 में गोवा के आजाद होने के बाद पुर्तगाली युग की इस इमारत में रखी तिजोरी को दूसरी बार खोला गया है. इसमें सोने के टुकड़े और तांबे के सिक्कों सहित अत्यधिक मूल्य की कई वस्तुएं मिली हैं.
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि यह 32 साल बाद एक बार फिर तिजोरी को खोला गया है. इससे पहले 1992 में जब इस तिजोरी को खोला गया तो तिजोरी में दुर्लभ और मूल्यवान वस्तुएं मिलीं. इसमें 2.234 किलोग्राम सोने के सामान, आभूषण, पुराने सिक्के शामिल हैं. यह सरकारी खजाना पिछले 32 वर्षों से नहीं खोला गया था. इसमें मिली दुर्लभ वस्तुओं को संग्रहालय में रखा जाएगा.
सीएम ने बताया कि हमें 2.23 किलोग्राम वजन के सोने के टुकड़े, 5,000 प्राचीन सिक्के, अलग-अलग तारीखों के 307 तांबे के सिक्के मिले, जिनका कुल वजन 3.15 किलोग्राम है. 814 सिक्के मिले जिनका वजन 4.78 किलोग्राम है, जिन पर अरबी में शिलालेख है, 786 तांबे के सिक्के जिन पर रानी विक्टोरिया लिखा हुआ है. इसके अलावा ताबें के बरतन आदि सामान भी मिला है."
ऐसे आजाद हुआ था गोवा
बता दें कि गोवा पर पुर्तगालियों ने 451 साल तक शासन किया था. भारत की आजादी के 14 साल बाद गोवा को 19 दिसंबर 1961 को आजादी मिली थी. साल 1961 में भारतीय सेना ने गोवा को पुर्तगालियों के कब्जे से छुड़ाया था. जब साल 1940 में भारत में सत्याग्रह चल रहा था तो उस समय गोवा के कुछ नागरिकों ने भी उसमें भाग लिया था.
गोवा की संस्कृति भारत से बिल्कुल अलग थी इसलिए 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद भी पुर्तगाली गोवा को मुक्त नहीं करना चाहते थे. हालांकि, भारत सरकार ने पुर्तगालियों को समझाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन जब वो नहीं मानें तो भारत सरकार ने सेना के द्वारा ऑपरेशन विजय चलाया और गोवा को पुर्तगालियों के चंगुल से मुक्त करवाया था.