चीन से जारी सीमा विवाद के बीच बातचीत का दौर भी जारी है. अब तो चीन से बातचीत कई मोर्चों पर हो रही है. सैन्य स्तर के अलावा अभी हाल ही में दोनों देशों के रक्षा मंत्री और गुरुवार को विदेश मंत्रियों के बीच भी बैठक हुई. चीन एक ओर जहां बातचीत का दिखावा कर रहा है वहीं दूसरी ओर सैन्य जमावड़ा भी बढ़ाता जा रहा है. वहीं सरकारी सूत्रों से जानकारी सामने आ रही है कि दोनों देशों के राजनेताओं की इन मुलाकातों के बाद डिसएंगेजमेंट का कदम उठाया जा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों दोनों देशों के राजनेताओं के बीच हुई बैठक में डिसएंगेजमेंट के मुद्दे पर भारत और चीन सहमत हुए हैं. अब सैन्य कमांडर सुरक्षा बलों के डिसएंगेजमेंट को लेकर बातचीत करेंगे. सूत्रों का कहना है कि सेनाओं के बीच जगह होनी चाहिए जो इस समय आमने-सामने की स्थिति में हैं. यह टकराव से बचने की कोशिश होती है. एक बार जब डिसएंगेजमेंट हो जाता है, तो फिर डिएस्कलेशन और सैनिकों को कम करने के दूसरे चरण में जा सकते हैं.
सरकार के सूत्रों के मुताबिक यह एक महत्वपूर्ण पहला कदम है. राजनेताओं के बीच हुई बैठक का ही परिणाम है कि डिसएंगेजमेंट के लिए राजनीतिक मार्गदर्शन मिला है. इसके पालन के लिए अब सैन्य कमांडरों को बैठक करनी होगी और डिसएंगेजमेंट पर विस्तार से काम करना होगा.
भारत-चीन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक पर सरकार के सूत्रों ने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई मीटिंग एक महत्वपूर्ण और पहला कदम था. जिसकी वजह से ही डिसएंगेजमेंट पर दोनों देश राजी हुए हैं.
वहीं दूसरी ओर भारतीय सेना के सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना और चीनी सेना ने चुशुल में ब्रिगेड-कमांडर स्तर की वार्ता की. यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई थी और लगभग 3 बजे समाप्त हुई.
रूस ने जताई खुशी
रूस ने भारत और चीन के तनाव को कम करने के फैसले का स्वागत किया है. रूस ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख में तनाव को कम करने के लिए भारत और चीन के फैसले का स्वागत किया. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि वह "बहुत खुश" हैं कि वह अपने भारतीय और चीनी समकक्षों को "बहुत सही समय पर" एक मंच प्रदान कर सके.