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ज्ञानवापी मामले में 23 जुलाई को SC में होगी सुनवाई, अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने HC के फैसले को दी है चुनौती

ज्ञानवापी परिसर में व्यास जी के तहखाने में स्थित देवी देवताओं की सेवा पूजा अर्चना के मामले में सुप्रीम कोर्ट 23 जुलाई को सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने व्यास जी के तहखाने में पूजा के खिलाफ मस्जिद पक्ष की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के याचिकाकर्ता शैलेंद्र व्यास को नोटिस जारी किया था.

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ज्ञानवापी मामले पर 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई. (फाइल फोटो)
ज्ञानवापी मामले पर 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई. (फाइल फोटो)

काशी के ज्ञानवापी परिसर में व्यास जी के तहखाने में स्थित देवी देवताओं की सेवा पूजा अर्चना के मामले में सुप्रीम कोर्ट 23 जुलाई मंगलवार को सुनवाई करेगा. देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी.पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ करेगी इस मामले पर सुनवाई.

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अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

कोर्ट ने व्यास जी के तहखाने में पूजा के खिलाफ मस्जिद पक्ष की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के याचिकाकर्ता शैलेंद्र व्यास को नोटिस जारी किया था. वाराणसी की जिला अदालत ने व्यास जी के तहखाने में पूजा अर्चना करने की अनुमति दी थी. इसके खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने जिला अदालत के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया था.

क्या है विवाद

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद काफी हद तक अयोध्या विवाद जैसा ही है. हालांकि, अयोध्या के मामले में मस्जिद बनी थी और इस मामले में मंदिर-मस्जिद दोनों ही बने हुए हैं. काशी विवाद में हिंदू पक्ष का कहना है कि 1669 में मुगल शासक औरंगजेब ने यहां काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई थी. हिंदू पक्ष के दावे के मुताबिक, 1670 से वह इसे लेकर लड़ाई लड़ रहा है. हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां मंदिर नहीं था और शुरुआत से ही मस्जिद बनी थी.

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