उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन के पास अनधिकृत कॉलोनियों को हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में प्रशांत भूषण ने एक और याचिका शीर्ष अदालत में दायर की है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है.
उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ कांग्रेस विधायक सुमित ह्रदयेश की अगुवाई में वहां के रहने वाले लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके साथ ही प्रशांत भूषण की ओर से भी याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को जोड़ते हुए गुरुवार को सुनवाई करने को कहा है. नैनीताल जिले के अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र से कुल 4,365 अतिक्रमण हटाए जाएंगे. कई परिवार जो दशकों से इन घरों में रह रहे हैं, वे इस आदेश का कड़ा विरोध कर रहे हैं. अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने रेलवे की 2.2 किलोमीटर लंबी पट्टी पर बने मकानों और अन्य ढांचों को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
हल्द्वानी में अनधिकृत कॉलोनियों को हटाने के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. रेलवे की इस जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के विरोध में 4 हजार से ज्यादा परिवार हैं. इनमें ज्यादातर मुस्लिम हैं. उत्तराखंड हाई कोर्ट की तरफ से अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाद इन अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 4300 से ज्यादा परिवारों को बेदखली का नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है. सूत्रों के मुताबिक जिस जगह से अतिक्रमण हटाया जाना है, वहां करीब 20 मस्जिदें, 9 मंदिर और स्कूल हैं.
सपा डेलीगेशन करेगा पीड़ितों से मुलाकात
हाई कोर्ट के इस आदेश जो लोग प्रभावित होंगे, इनमें कुछ लोगों का कहना है कि वह इसी क्षेत्र में पैदा हुए और यहां रहते हुए उन्हें करीब 80 साल के हो चुके हैं. कुछ परिवार तो सन 1937 से यहां रह रहे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से एक डेलीगेशन हल्द्वानी में पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए जाएगा. सपा सांसद एसटी हसन के नेतृत्व में 10 सदस्यीय डेलीगेशन पीड़ित परिवारों से मिलेगा.
14 कंपनी फोर्स, 1000 सिपाही होंगे तैनात: IG कुमाऊं
कुमाऊं के आईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए 14 कंपनी सीपीएमएफ सेंट्रल पैरामिलेट्री फोर्स और 5 कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स की डिमांड की है. इसके अलावा गढ़वाल मंडल से लगभग 1000 पुलिस के सिपाही और होमगार्ड की भी डिमांड की गई है. फोर्स 8 जनवरी तक हल्द्वानी पहुंच जाएगी. इसके अलावा जिला प्रशासन से जेसीबी, पोकलैंड, ड्रोन कैमरा, वीडियो कैमरा, बैरिकेट्स और अन्य चीजों जिला प्रशासन से मांगी गई हैं. उपद्रव या दंगा भगड़कने की आशंका को देखते हुए लोकल इंटेलिजेंस यूनिट से भी मदद मांगी गई है.
ऐसे समझें पूरा मामला
- 2013 में उत्तराखंड हाई कोर्ट में हल्द्वानी में बह रही गोला नदी में अवैध खनन को लेकर एक पीआईएल दाखिल की गई थी. यह नदी हल्द्वानी रेलवे स्टेशन और रेल पटरी के बगल से बहती है. इस पीआईएल में कहा गया कि रेलवे की भूमि पर अवैध रूप से बसाई गई गफूर बस्ती के लोग गोला में अवैध खनन करते हैं. इसकी वजह से रेल की पटरीयों को और गोला पुल को खतरा है. 2017 में रेलवे ने राज्य सरकार के साथ मिलकर क्षेत्र का सर्वे किया गया और 4365 अवैध कब्जेदारों को चिह्नित किया गया.
- हाई कोर्ट में फिर एक रिट पिटिशन दाखिल की गई, जिसमें कहा गया कि क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने में देरी की जा रही है, जिस पर मार्च 2022 में हाई कोर्ट नैनीताल जिला प्रशासन को रेलवे के साथ मिलकर अतिक्रमण हटाने का प्लान बनाने का निर्देश दिया गया.
- अप्रैल 2022 में रेलवे के अधिकारियों और नैनीताल जिला प्रशासन ने बैठक की, जिसके बाद रेलवे ने HC में अतिक्रमण हटाने के संबंध में एक विस्तृत प्लान दाखिल किया. इसके बाद हाई कोर्ट ने 20 दिसंबर को रेलवे को निर्देश दिया कि एक हफ्ते का नोटिस देकर भूमि से अवैध अतिक्रमणकारियों को तत्काल हटाया जाए.
- इस अतिक्रमण हटाओ अभियान में जिला प्रशासन को शामिल करें और अगर जरूरत पड़े तो पैरामिलिट्री फोर्स की मदद लें. अतिक्रमणकारियों को यह नोटिस अखबारों के माध्यम से और क्षेत्र में मुनादी करवाकर सुनाया जाए. नोटिस जारी होने के 7 दिन बाद भी अगर अतिक्रमणकारियों ने अतिक्रमण नहीं हटाए तो उसके बाद रेलवे बलपूर्वक अतिक्रमण को हटा सकती है.