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हरियाणा के नूंह में हिंसा के बाद चला बुलडोजर फिलहाल थम तो गया है लेकिन अपने आशियाने-दुकान को टूटा देखकर पीड़ित लोगों के जख्म बार-बार उभर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि सभी कागजात होने के बावजूद, बिना किसी नोटिस के उनकी जगहों पर बुलडोजर चलाया गया.
नूंह में हिंसा के बाद वहां बुलडोजर एक्शन हुआ था. जिस पर काफी सवाल उठे. बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले पर खुद संज्ञान लेते हुए बुलडोजर एक्शन पर रोक लगा दी. बुलडोजर एक्शन तो रुक गया लेकिन अभी भी नूंह में जगह-जगह मलबे का ढेर लगा है.
बता दें कि 31 जुलाई को नूंह में हिंसा भड़कने के बाद शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज के पास भी प्रशासन का बुलडोजर चला था. नवाब शेख उर्फ अब्दुल रशीद ने कहा कि उनकी दुकानों को धार्मिक भेदभाव की वजह से तोड़ा गया. उन्होंने दावा किया कि नूंह में किला नंबर 39 में 4/1 और 5/1 किला नंबर में मेडिकल, परचून, लैब टेस्ट की दर्जनभर दुकानें प्रशासन के बुलडोजर से जमींदोज हो चुकी हैं. दरसल 31 जुलाई को हिंसा के बाद नलहड़ मंदिर और मेडिकल कॉलेज के पास दंगा भड़का और काफी तोड़ फोड़ हुई. बाद में नूंह प्रशासन की तरफ से बुलडोजर चला और फिर सब जमींदोज हो गया.
नवाब शेख का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई के वक्त अधिकारियों से मिलने के लिए गए थे, जमीन के कागज दिखाए पर किसी ने नहीं सुनी. नवाब शेख ने कहा, 'हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया. मैंने खुद चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि मैं किसान का बेटा हूं. हजारों किसानों ने दुकान बना रखी है, ये अवैध नहीं है.
उन्होंने कहा कि दस सालों से स्ट्रक्चर कच्चा-पक्का खड़ा था. कभी कोई नोटिस नहीं आया. 10 साल पहले क्यों नहीं तोड़ा. अगर अवैध थी तो क्यों बनाने दी थी दुकान? जब मैं बना रहा था तब अवैध नहीं थी ये. आज जब झगड़ा हुआ तो अवैध हो गई. उन्होंने आरोप लगाया कि तोड़फोड़ सिर्फ भेदभाव की वजह से हुई है. अगर प्रशासन चाहता तो झगड़े नहीं होते. उन्होंने सवाल किया कि यात्रा के दौरान क्यों होमगार्ड लगाए गए थे. पूरी फोर्स क्यों नहीं लगाई गई? इलाके के डीसी धीरेंद्र खरगदा का कहना है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद से अब कोर्ट में ही सारी बातें रखी जाएंगी.
लाखों का नुकसान, करोड़ों दांव पर
हिंसा की आग नलहड़ से झंडा चौक तक भी पहुंची, जहां तीन मंजिला मार्बल शोरूम पर प्रशासन का बुलडोजर चला. शोरूम के मालिक लियाकत का आरोप है की ना कोई नोटिस दिया गया और ना ही पूछा गया कि यह काम क्यों कर रहे हो, बस बुलडोजर चला दिया.
उन्होंने कहा कि हमने 2019 में जमीन ली है 2020 में निर्माण कराया. एक साल तक निर्माण होता रहा. हमारे पास इससे पहले भी कोई नोटिस नहीं है. अपनी जमीन है, रजिस्ट्री है. कागजात पूरे होने के बाद नक्शा पास करके बिल्डिंग बनवाई है. प्रशासन यह बताए कि हमारा दोष क्या है, कार्रवाई के वक्त बात करने की कोशिश की तो मारपीट कर भगा दिया. उन्होंने कहा कि करीब 10 लाख का नुकसान हो गया है.
प्रशासन से मिले आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक बुलडोजर की कारवाई के तहत करीब 57 एकड़ जमीन खाली कराई गई है. नूंह नगीना, फिरोजपुर झिरका और पिंगनवा में भी अतिक्रमण हटाए गए है.
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के संज्ञान से नूंह में बुलडोजर थम तो गया पर तबाही के निशान अब भी कायम है. पुलिस जगह-जगह रेड करके आरोपियों को पकड़ रही है तो कई जगह दुकानें भी खुल रही हैं. अधिकारी दोनो पक्षों की शांति समितियों से बात कर रही है.
(रिपोर्ट: राम किंकर सिंह)