हरियाणा में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने अब तक 176 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है. आरोपियों ने बताया कि साजिश के तहत इस हिंसा को अंजाम दिया गया. आरोपियों ने बताया, उन्होंने भीड़ में शामिल होकर अवैध हथियारों से फायरिंग की. उन्होंने शोभायात्रा में शामिल लोगों पर हथियारों, ईंट, पत्थर, लाठी और डंडों से हमला किया था.
नूंह पुलिस हिंसा के मामले में कुल 46 FIR दर्ज की हैं. पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी उम्र 19 से 25 साल के बीच में है. पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि हिंसा को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने अपने हथियार, लाठी-डंडे भी छिपा दिए थे. आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया की हिंसा करने के बाद कई आरोपी मेवात की पहाड़ियों में, राजस्थान के जयपुर-उदयपुर , उत्तर प्रदेश के मेरठ-आगरा-अलीगढ़ में जाकर छिप गए हैं.
कहां-कहां छिपे हैं दंगाई?
कैसे किया भीड़ पर हमला?
नूंह हिंसा के आरोपियों का कबूलनामा!#ATLivestream #AajSubah | @ashutoshjourno https://t.co/HIAEowYa5C— AajTak (@aajtak) August 4, 2023
शोभायात्रा पर पथराव के बाद हुई थी हिंसा
हरियाणा के मेवात-नूंह में 31 जुलाई को बृजमंडल यात्रा निकाली गई थी. इसी दौरान यात्रा पर पथराव हो गया था. देखते ही देखते यह दो समुदायों में हिंसा में बदल गई. सैकड़ों कारों को आग लगा दी गई. साइबर थाने पर भी हमला किया गया. उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया था. नूंह के बाद सोहना में भी पथराव और फायरिंग हुई. वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. इसके बाद हिंसा की आग नूंह से फरीदाबाद-गुरुग्राम तक फैल गई. नूंह हिंसा में दो होमगार्ड समेत 6 लोगों की मौत हुई है.
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5 जिलों में दर्ज हुईं 93 FIR
हरियाणा में हुई हिंसा में अब तक 5 जिलों में 93 FIR दर्ज की गई हैं. 176 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. अकेले नूंह में 46 FIR दर्ज हैं. सोमवार को नूंह में निकाली गई शोभायात्रा पर पथराव के बाद ही दो समुदायों में हिंसा फैली थी. नूंह के अलावा फरीदाबाद में 3, गुरुग्राम में 23, पलवल में 18, रेवाड़ी में 3 FIR दर्ज की गई हैं. पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए 2300 वीडियो की पहचान की है. पुलिस का मानना है कि इन्हीं वीडियो ने हिंसा को उकसाने में अहम भूमिका निभाई.
FIR में भी साजिश का जिक्र
नूंह हिंसा के मामले में पुलिस ने पिछले दिनों इंस्पेक्टर पंकज कुमार के बयान दर्ज किए थे. उन्होंने अपने बयान में कहा, ''हमने तावडू 600 से 700 उपद्रवियों को देखा. भीड़ में शामिल लोग धार्मिक नारे लगा रहे थे. थोड़ी देर बाद भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया. वे लगातार पथराव कर रहे थे. तभी भीड़ के बीच से कुछ लोगों ने फायरिंग कर दी. उनका कहना है कि उन्होंने और इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने माइक्रोफोन के जरिए भीड़ को समझाने की कोशिश की कि कानून अपने हाथ में न लें, लेकिन भीड़ पथराव करती रही और तड़ातड़ गोलियां चलती रहीं. तभी एक गोली इंस्पेक्टर अनिल कुमार को लग गई. वह घायल हो गये और एक अन्य एएसआई जगवीर भी घायल हो गए.''
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इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने अपने बयान में कहा, ''600-700 लोगों उग्र भीड़ इस कदर बेकाबू हो चुकी थी कि वह पुलिसकर्मियों को जान से मारने की नीयत से पथराव और फायरिंग करने लगे. इस घटना सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया है. एफआईआर में कहा गया है कि मजबूरन पुलिस को एके-47 और सर्विस पिस्टल से हवाई फायरिंग करनी पड़ी. लेकिन बदमाशों की मंशा 'पूर्व नियोजित तरीके से साजिश' के तहत पुलिस पर हमला करने की थी. मैं इसमें कुछ लोगों को पहचान सकता हूं. उन्होंने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.''