हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद जो सियासी तूफान घमासान मचा है, वो फिलहाल थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है. पूर्ण बहुमत में होने के बावजूद कांग्रेस को यहां राज्यसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा क्योंकि उसके 6 विधायकों ने पाला बदल लिया. हालांकि विधायकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है और स्पीकर ने सभी की सदस्यता रद्द कर दी.
कैप्टन ने निभाई अहम भूमिका
राज्यसभा चुनाव के इस पूरे मामले को लेकर अब सियासी गलियारों में ऐसी चर्चा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पर्दे के पीछे इस पूरे प्रकरण में अहम भूमिका निभाई थी. सूत्रों के मुताबिक, जिस कैप्टन को पार्टी में 'हाशिए पर' माना जा रहा था,उन्हें हिमाचल प्रदेश का जिम्मा सौंपा गया था. कैप्टन ने हिमाचल राजघरानों की असहमति को भुनाने और उनके साथ संबंधों का उपयोग करते हुए बखूबी से अपने काम को अंजाम दिया.
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विधायकों के संपर्क में थे कैप्टन
नाम न छापने की शर्त पर पार्टी के करीबी एक शख्स ने कहा, "पंजाब के पूर्व सीएम होने और हिमाचल राजघरानों के साथ संबंध होने के कारण वह इस काम के लिए पार्टी के लिए एक आदर्श विकल्प बन गए थे." ऐसा समझा जाता है कि कैप्टन ने हिमाचल कांग्रेस के एक विधायक को 6 अन्य विधायकों वाले ग्रुप में शामिल कराया था. साथ ही छह विधायकों को पंजाब जाने और वापस आने के लिए लगातार हेलिकॉप्टर चलाने की सुविधा मुहैया कराई थी. इसके अलावा वह राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में मतदान करने वाले तीनों निर्दलीय विधायकों के सीधे संपर्क में भी थे.
आपसी संबंध आए काम!
चूंकि हिमाचल प्रदेश में शाही परिवार को दरकिनार कर सुखविंदर सिंह सुक्खू को सीएम बनाया गया था, इसलिए भाजपा ने असंतोष को भांप लिया और कैप्टन अमरिंदर को 'जरूरी कदम उठाने' का काम सौंपा. कई महीने पहले पार्टी ने जब कैप्टन को जिम्मेदारी सौंपी थी तो इस बात की भनक कांग्रेस पार्टी को भी लग गई थी. सूत्रों ने बताया कि चुनाव से लगभग 15 दिन पहले पार्टी द्वारा एक 'एक्शनेबल' प्लान तैयार किया गया था लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया.
दिवंगत महाराज वीरभद्र सिंह की एक बेटी की शादी कैप्टन अमरिंदर के परिवार में हुई है. अपराजिता स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की पांचवीं बेटी हैं, जिनका विवाह अमरिंदर सिंह की बेटी जय इंदर कौर के बेटे अंगद से हुआ है. जय इंदर कौर की शादी दिल्ली स्थित व्यवसायी गुरपाल सिंह से हुई थी.
राज्यसभा चुनाव में कैसे हुआ खेला?
हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर चुनाव था. इसे जीतने के लिए 35 विधायकों के वोट की जरूरत थी. कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, इसलिए पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी की जीत लगभग तय मानी जा रही थी. बीजेपी के यहां 25 विधायक हैं. उसके पास 10 वोट कम थे, फिर भी पार्टी ने हर्ष महाजन को उम्मीदवार बना दिया था.
जब चुनाव हुए तो कांग्रेस के 6 विधायकों ने तो क्रॉस वोटिंग की. तीन निर्दलीय विधायकों ने भी बीजेपी उम्मीदवार के समर्थन में वोट कर दिया. इससे बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार को 34-34 वोट मिले. आखिरकार पर्ची के जरिए फैसला किया गया, जिसमें बीजेपी के हर्ष महाजन की जीत हुई.
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(रिपोर्ट - अभिषेक आनंद)