राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हाथरस गैंगरेप-मर्डर केस की घटना पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है. मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में डीजीपी और मुख्य सचिव को 4 हफ्ते में घटना की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है.
आयोग को महाराष्ट्र के एक वकील से ऐसी एक शिकायत मिली थी जिसमें घटना की SIT या CB-CID जांच की मांग की गई थी. ठाणे से एडवोकेट आदित्य मिश्रा भी अनुसूचित जाति अधिनियम के अनुसार पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं जिसमें मुआवजा अनिवार्य है.
आदित्य मिश्रा की शिकायत में कहा गया है, "जल्द से जल्द सुनवाई शुरू की जाए और अगर इस केस में किसी भी पुलिस अधिकारी की भूमिका पाई जाती है, तो पुलिस अधिकारी के खिलाफ तत्काल आधार पर न्याय के सर्वोच्च हित में अंतरिम निलंबन आदेश के साथ आपराधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए."
क्या है मामला
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाने के गांव में 14 सितंबर में 19 साल की दलित लड़की के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया. इसके साथ ही उस पर जानलेवा हमला किया गया. उसके परिजनों का आरोप है कि सुबह साढ़े नौ बजे के सवर्ण जाति के करीब चार लोगों ने दलित लड़की के साथ गैंगरेप और दरिंदगी की. घटना के 9 दिन बाद लड़की जब होश में आई तो उसने इशारों से अपना दर्द बयान किया.
पीड़िता को इलाज के लिए पहले अलीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालात बिगड़ने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया गया. लेकिन पीड़िता को बचाया नहीं जा सका और मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया. इसके बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. राजनीतिक स्तर पर हमले भी शुरू किए जाने लगे.
सफदरजंग अस्पताल में मौत के बाद पुलिस शव को लेकर हाथरस पहुंची. उस वक्त रात के करीब 12.45 हो रहे थे. एंबुलेंस के पहुंचते ही लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. नाराज ग्रामीण सड़क पर ही लेट गए. एसपी-डीएम लड़की के बेबस पिता को अंतिम संस्कार के लिए समझाते रहे जब वो नहीं माने तो जबरन उसका अंतिम संस्कार कर दिया.
29 और 30 सितंबर की दरमियानी रात में, लड़की के शव का अंतिम संस्कार पुलिस द्वारा आनन-फानन में कर दिया गया, जबकि परिवार के सदस्यों ने विरोध किया. उनकी मांग थी कि उन्हें लड़की को एक बार घर ले जाने की अनुमति दी जाए. खबरों के अनुसार, दाह संस्कार के दौरान परिवार का एक भी सदस्य नहीं था.
इन मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से पढ़ते हुए, एडवोकेट आदित्य मिश्रा बेहद आहत हो गए और उन्होंने इसको लेकर आयोग से संपर्क करने का फैसला किया. पीड़िता की मौत के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए. इस बीच यूपी सरकार ने इस मामले की एसआईटी जांच कराने का फैसला किया है.