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Hijab Controversy: 'हिजाब इस्लामिक परंपरा का हिस्सा नहीं', कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

Hijab controversy karnataka high court verdict: हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया कि छात्र स्कूल में यूनिफॉर्म पहनने से इनकार नहीं कर सकते और हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

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हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला आया
हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला आया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों से हिजाब विवाद शुरू हुआ था
  • हाईकोर्ट के बाद अब मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाने की तैयारी

Hijab Controversy Verdict: हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट का आज मंगलवार को फैसला आ गया है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिका को खारिज कर दिया है और कहा है कि हिजाब इस्लाम के धार्मिक व्यवहार का हिस्सा नहीं है. कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला मोटे तौर पर चार सवालों के इर्द-गिर्द था. उनका जवाब कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया. कोर्ट ने कहा कि छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म उल्लंघन या मनमाने कपड़े पहन कर स्कूल आने का अधिकार नहीं है.

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बता दें कि कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब विवाद पिछले साल दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था. इसके बाद कई राज्यों में हिजाब को लेकर प्रदर्शन हुए थे. बहस इस बात को लेकर थी कि स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत हो या नहीं. कर्नाटक में काफी प्रदर्शन और हिंसा के बाद फिर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था.

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हिजाब विवाद: कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया चार सवालों का जवाब

1. पहला सवाल यही था कि क्या हिजाब इस्लाम के तहत आवश्यक धार्मिक व्यवहार है. इसपर कोर्ट ने कहा कि हिजाब इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है. यह अनिवार्य नहीं है.

2. दूसरा सवाल यह था कि क्या छात्र उनपर लगाई गई रोक (हिजाब पहनने पर रोक) का विरोध कर सकते हैं? इसके जवाब में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल में यूनिफॉर्म पहनने के लिए बाध्य करना ठीक है, इसका छात्र विरोध नहीं कर सकते. बता दें कि कर्नाटक में स्कूलों ने कहा था कि हिजाब पहनकर स्कूल में एंट्री नहीं दी जाएगी, जिसे कोर्ट ने सही माना है. कोर्ट में छात्राओं द्वारा इसी 5 फरवरी के आदेश को चुनौती दी गई थी, इसी याचिका को खारिज कर दिया गया.

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3. तीसरे सवाल में कहा गया था कि 5 फरवरी का ऑर्डर (Uniform Dress Code) जिसके बाद स्कूलों में हिजाब पर रोक लगी थी क्या वह सरकार ने मनमाने ढंग से जारी किया था? तीसरे सवाल के जवाब में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की तरफ से Uniform Dress Code जारी करने वाला पांच फरवरी का फैसला रद्द नहीं किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कुछ तथ्य नहीं पेश कर पाए कि सरकार ने फैसला मनमाने ढंग से लागू किया.

4. चौथा सवाल इससे जुड़ा था कि क्या प्रतिवादी के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक जांच होगी. इसपर कहा गया कि अबतक इस तरह की कोई तैयारी नहीं है.

हालांकि, अभी मामला शांत होता नहीं दिख रहा है. याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट साहुल ने कहा कि फिलहाल फैसले को देखा जा रहा है. इसपर चिंतन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाया जाएगा.

 

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