महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 48 वर्षीय पति को 45 वर्षीय पत्नी ने अपनी किडनी डोनेट की. ये मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि डोनर और रिसीवर दोनों ही एचआईवी संक्रमित थे और दोनों के ही ब्लड ग्रुप भी अलग-अलग थे.
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर्स ने बताया कि पत्नी का ब्लड ग्रुप बी था, जबकि पति का ब्लड ग्रुप ए था. औरंगाबाद के मेडिकवर हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सचिन सोनी ने कहा, "इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हमने चिकित्सा की पूरी खोज की कि यह शायद पहला एचआईवी-से-एचआईवी और एबीओ असंगत (जब डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप अलग हो) ट्रांसप्लांट है. कपास व्यापारी शख्स की किडनी ट्रांसप्लांट 18 जनवरी को किया गया था.
HIV-to-HIV किडनी ट्रांसप्लांट के कई उदाहरण
भारत समेत दुनिया में एचआईवी-टू-एचआईवी किडनी ट्रांसप्लांट के कई उदाहरण सामने आए हैं. डॉ. सोनी ने कहा, "लेकिन एचआईवी पॉजिटिव रिसीवर को अलग ब्लड ग्रुप वाले डोनर से किडनी प्राप्त करने के लिए तैयार करना एक चुनौती थी. दंपति के बेटे ने कहा कि शुक्र है कि मेरे माता-पिता दोनों अच्छे हैं. परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये मिले जबकि बाकी के चार लाख रुपये परिवार और दोस्तों से मिले.
2010 में पहली बार HIV संक्रमित की किडनी ट्रांसप्लांट
बता दें कि साल 2010 में एचआईवी पॉजिटिव शख्स का मुंबई में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. मरीज की मां ने ऑर्गन डोनेट किया था. जसलोक अस्पताल के डॉक्टर मदन बहादुर ने किडनी ट्रांसप्लांट की थी. उन्होंने कहा कि भविष्य में डोनर की हेल्थ पर प्रभाव पड़ सकता है.